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नाटक के माध्यम से दी मानसिक रोगों के निदान की सलाह
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नाटक के माध्यम से दी मानसिक रोगों के निदान की सलाह
छुटमलपुर। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में नाट्य संस्था द्वारा नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन कर मानसिक रोगों के प्रति लोगों को जागरुक किया गया।
सीएचसी कैंपस में आयोजित नुक्कड नाटक में ग्रुप लीडर शौकीन राज की अगुवाई में लोकेश वर्मा, कपिल और मोहित आदि कलाकारों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया कि जरा से असामान्य व्यवहार को भी अनदेखा न करना चाहिए। तत्काल प्रभावित व्यक्ति को मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। नाटक के माध्यम से यह भी बताया कि किस प्रकार तांत्रिक और ओझा के चक्कर में आने से रोगी की जान पर बन आती है। सीएचसी इंचार्ज डा नवदीप गुप्ता ने बताया कि तनाव की स्थिती में बार बार बेहोश होना, हाथ पैर में कंपन और ऐंठन, अचानक आवाज या याद्दाश्त चली जाना हिस्टेरिया या डिसोसिएटिव डिसआर्डर की बीमारी होती है। अत्यधिक क्रोध और असामान्य हिंसात्मक व्यवहार साइकोशिश या स्किजोफ्रेनिया की बीमारी के लक्षण होते हैं। इनकी अनदेखी बिल्कुल भी न करें और विशेषज्ञ से उपचार कराएं। उन्होंने बताया कि इन बीमारियों का पूर्ण उपचार संभव है। किसी ओझा या झाड फूंक वाले के चक्कर में बिल्कुल भी ना आएं। कई बार ऐसा करने से मरीज की जान तक पर बन आती है। इस दौरान डा सुमित मेकनाइट, महिला चिकित्साधिकारी डा नीतू शर्मा, नीरज कुमार, सतबीर सिंह, मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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छुटमलपुर। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में नाट्य संस्था द्वारा नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन कर मानसिक रोगों के प्रति लोगों को जागरुक किया गया।
सीएचसी कैंपस में आयोजित नुक्कड नाटक में ग्रुप लीडर शौकीन राज की अगुवाई में लोकेश वर्मा, कपिल और मोहित आदि कलाकारों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया कि जरा से असामान्य व्यवहार को भी अनदेखा न करना चाहिए। तत्काल प्रभावित व्यक्ति को मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। नाटक के माध्यम से यह भी बताया कि किस प्रकार तांत्रिक और ओझा के चक्कर में आने से रोगी की जान पर बन आती है। सीएचसी इंचार्ज डा नवदीप गुप्ता ने बताया कि तनाव की स्थिती में बार बार बेहोश होना, हाथ पैर में कंपन और ऐंठन, अचानक आवाज या याद्दाश्त चली जाना हिस्टेरिया या डिसोसिएटिव डिसआर्डर की बीमारी होती है। अत्यधिक क्रोध और असामान्य हिंसात्मक व्यवहार साइकोशिश या स्किजोफ्रेनिया की बीमारी के लक्षण होते हैं। इनकी अनदेखी बिल्कुल भी न करें और विशेषज्ञ से उपचार कराएं। उन्होंने बताया कि इन बीमारियों का पूर्ण उपचार संभव है। किसी ओझा या झाड फूंक वाले के चक्कर में बिल्कुल भी ना आएं। कई बार ऐसा करने से मरीज की जान तक पर बन आती है। इस दौरान डा सुमित मेकनाइट, महिला चिकित्साधिकारी डा नीतू शर्मा, नीरज कुमार, सतबीर सिंह, मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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