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सुविधाओं के अभाव में विकसित नहीं हो रहा औद्योगिक क्षेत्र
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सहारनपुर। इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन चैप्टर सहारनपुर के चेयरमैन कृष्ण राजीव सिंघल की अध्यक्षता में साप्ताहिक बैठक का आयोजन आईआईए सभागार में किया गया। बैठक में उत्तर प्रदेश स्टेट औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) निर्मित औद्योगिक क्षेत्र पिलखनी में आवश्यक सुविधाएं दिलाने और समस्याओं का समाधान कराने के लिए समिति के गठन का निर्णय लिया गया।
बैठक में चेयरमैन कृष्ण राजीव सिंघल ने कहा कि वर्ष 2005 में यूपीएसआईडीसी द्वारा औद्योगिक क्षेत्र पिलखनी में उद्योगों को स्थापित करने के लिए भूखंड आवंटित किए थे, परंतु विभाग की नकारात्मक कार्यशैली के चलते यह औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया है। साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक अवस्थापना सुविधाएं जैसे होजरी, हस्तनिर्मित साबुन उद्योग से निकलने वाले जल के लिए कोई भूखंड का आवंटन नहीं किया गया था। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में इटीपी प्लांट स्थापित नहीं किया गया। विद्युत वितरण प्रणाली वर्ष 2010 में क्रियान्वित किए जाने आदि की सुविधाएं नहीं दी गई। इस कारण औद्योगिक क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया है। संस्था का प्रयास है कि जिन उद्यमियों के प्लांट निरस्त हो चुके हैं, उनको दोबारा से शुरू कराया जाएगा ताकि औद्योगिक क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सके। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामजी सुनेजा ने कहा कि यूपीएसआईडीसी द्वारा निर्मित औद्योगिक क्षेत्र पिलखनी की समस्याओं के निस्तारण हेतु एक कमेटी का गठन किया जाएगा ताकि क्षेत्र की समस्याओं का निराकरण कराया जा सके।
महासचिव प्रमोद सड़ाना ने कहा कि गत वर्षों में जनपद में खनन नीति के अंतर्गत वर्ष 2016 से वर्ष 2018 तक अपने उद्योगों को विकसित करने में बाधा उत्पंन होती रही, जिस कारण से उद्यमी अपना उद्योग यूपीएसआईडीसी द्वारा निर्मित औद्योगिक क्षेत्र पिलखनी में स्थापित नहीं कर पाए।
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बैठक में प्रदेश सचिव आरके धवन, कोषाध्यक्ष प्रियेश गर्ग, अनूप खन्ना, संजीव अरोड़ा, सुनील सैनी, अनिल अग्रवाल, अतुल मित्तल, मनीष डंग, सुशील भारद्वाज, कमल जैन, मनोज शर्मा, राजीव अग्रवाल, पंकज गुप्ता, तुषार अरोड़ा और अविनाश अरोड़ा आदि मौजूद रहे।
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बैठक में चेयरमैन कृष्ण राजीव सिंघल ने कहा कि वर्ष 2005 में यूपीएसआईडीसी द्वारा औद्योगिक क्षेत्र पिलखनी में उद्योगों को स्थापित करने के लिए भूखंड आवंटित किए थे, परंतु विभाग की नकारात्मक कार्यशैली के चलते यह औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया है। साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक अवस्थापना सुविधाएं जैसे होजरी, हस्तनिर्मित साबुन उद्योग से निकलने वाले जल के लिए कोई भूखंड का आवंटन नहीं किया गया था। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में इटीपी प्लांट स्थापित नहीं किया गया। विद्युत वितरण प्रणाली वर्ष 2010 में क्रियान्वित किए जाने आदि की सुविधाएं नहीं दी गई। इस कारण औद्योगिक क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया है। संस्था का प्रयास है कि जिन उद्यमियों के प्लांट निरस्त हो चुके हैं, उनको दोबारा से शुरू कराया जाएगा ताकि औद्योगिक क्षेत्र का सर्वांगीण विकास हो सके। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामजी सुनेजा ने कहा कि यूपीएसआईडीसी द्वारा निर्मित औद्योगिक क्षेत्र पिलखनी की समस्याओं के निस्तारण हेतु एक कमेटी का गठन किया जाएगा ताकि क्षेत्र की समस्याओं का निराकरण कराया जा सके।
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महासचिव प्रमोद सड़ाना ने कहा कि गत वर्षों में जनपद में खनन नीति के अंतर्गत वर्ष 2016 से वर्ष 2018 तक अपने उद्योगों को विकसित करने में बाधा उत्पंन होती रही, जिस कारण से उद्यमी अपना उद्योग यूपीएसआईडीसी द्वारा निर्मित औद्योगिक क्षेत्र पिलखनी में स्थापित नहीं कर पाए।
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बैठक में प्रदेश सचिव आरके धवन, कोषाध्यक्ष प्रियेश गर्ग, अनूप खन्ना, संजीव अरोड़ा, सुनील सैनी, अनिल अग्रवाल, अतुल मित्तल, मनीष डंग, सुशील भारद्वाज, कमल जैन, मनोज शर्मा, राजीव अग्रवाल, पंकज गुप्ता, तुषार अरोड़ा और अविनाश अरोड़ा आदि मौजूद रहे।