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सूतक काल में भगवान के दर्शन करना अशुभ : पंडित सतेंद्र
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:32 AM IST
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सूतक काल में भगवान के दर्शन करना अशुभ : पंडित सतेंद्र
देवबंद। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया कि चंद्र ग्रहण में सूतक काल दौरान भगवान के दर्शन शुभ नहीं माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि सूतक काल 27 जुलाई की दोपहर 2 बजे से आरंभ होकर 28 जुलाई की सुबह 4.48 बजे तक रहेगा। इस दौरान सिर्फ घरों में बैठकर पूजा अर्चना करनी चाहिए। सूतक काल समाप्ति के मोक्ष काल के बाद तक धार्मिक स्थलों को पवित्र करने के बाद ही मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। चंद्र ग्रहण के समय दान करना और ईश्वर की आराधना करना शुभ माना जाता है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ग्रहणों का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रहण के समय कोई नया कार्य नहीं करना चाहिए। भगवान की मूर्ति का स्पर्श भी नहीं करें। बच्चों का नामकरण, भोजन बनाना व खाना अशुभ माना जाता है। ब्यूरो
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देवबंद। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया कि चंद्र ग्रहण में सूतक काल दौरान भगवान के दर्शन शुभ नहीं माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि सूतक काल 27 जुलाई की दोपहर 2 बजे से आरंभ होकर 28 जुलाई की सुबह 4.48 बजे तक रहेगा। इस दौरान सिर्फ घरों में बैठकर पूजा अर्चना करनी चाहिए। सूतक काल समाप्ति के मोक्ष काल के बाद तक धार्मिक स्थलों को पवित्र करने के बाद ही मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। चंद्र ग्रहण के समय दान करना और ईश्वर की आराधना करना शुभ माना जाता है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ग्रहणों का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रहण के समय कोई नया कार्य नहीं करना चाहिए। भगवान की मूर्ति का स्पर्श भी नहीं करें। बच्चों का नामकरण, भोजन बनाना व खाना अशुभ माना जाता है। ब्यूरो