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‘हजारों लोग प्यासे मर गए, समंदर फिर भी शर्मिंदा नहीं’
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:12 AM IST
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‘हजारों लोग प्यासे मर गए, समंदर फिर भी शर्मिंदा नहीं’
सहारनपुर। मोहल्ला शीराजान स्थित स्कूल गुलशन-ए-तालीम में साहित्यिक संस्था उर्दू मरकज की ओर से बुधवार रात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया।
अध्यक्षता करते हुए शायर आसिफ शम्सी ने कहा कि उर्दू मरकज 23 वर्षों से सहारनपुर में साहित्य एवं साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने का काम कर रही है। संयोजक शाकिर नजर ने शायरों और कवियों का स्वागत किया। शमां रोशन सगीर सागर और हाजी जहूर अहमद ने की।
आसिफ ने अपना कलाम पेश करते हुए सुनाया- गया है मयकदे से जब से दौर जामे जमशेदी, मेरे तिश्ना लबों तक फिर कभी सागर नहीं आया। मुस्तकीम रौशन ने कहा- परोसा जा रहा है फिर लहू क्यों, लहू का जब कोई प्यासा नहीं है। सैयद राशिद ने कहा- हजारों दिल जलाए और हजारों दिल किए घायल, मगर फिर भी कोई इल्जाम उसके सर नहीं आया। शाकिर नजर ने कहा कि भटक कर राह में रह जाता है वो, किसी के साथ जो चलता नहीं। फराज अहमद फराज ने कहा- हजारों लोग प्यासे मर गए, समंदर फिर भी शर्मिंदा नहीं है।
असलम मोहसिन ने कहा-सिमट कर दर्द जब तक रूह के अंदर नहीं आया, छलक कर आंख से आंसू कोई बाहर नहीं आया। बिलाल सहारनपुर सुनाया-पड़ोसन की तरह मेरी भी तुम तारीफ कर देते, नजर के रूबरू ऐसा कोई मंजर नहीं आया। सिकंदर हयात, डा. इरशाद सागर, डा. अमजद, अय्यूब सादिक, डा. इलियास आलम, मोहम्मद उवैस आदि ने भी अपने कलाम पेश किए।
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सहारनपुर। मोहल्ला शीराजान स्थित स्कूल गुलशन-ए-तालीम में साहित्यिक संस्था उर्दू मरकज की ओर से बुधवार रात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया।
अध्यक्षता करते हुए शायर आसिफ शम्सी ने कहा कि उर्दू मरकज 23 वर्षों से सहारनपुर में साहित्य एवं साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने का काम कर रही है। संयोजक शाकिर नजर ने शायरों और कवियों का स्वागत किया। शमां रोशन सगीर सागर और हाजी जहूर अहमद ने की।
आसिफ ने अपना कलाम पेश करते हुए सुनाया- गया है मयकदे से जब से दौर जामे जमशेदी, मेरे तिश्ना लबों तक फिर कभी सागर नहीं आया। मुस्तकीम रौशन ने कहा- परोसा जा रहा है फिर लहू क्यों, लहू का जब कोई प्यासा नहीं है। सैयद राशिद ने कहा- हजारों दिल जलाए और हजारों दिल किए घायल, मगर फिर भी कोई इल्जाम उसके सर नहीं आया। शाकिर नजर ने कहा कि भटक कर राह में रह जाता है वो, किसी के साथ जो चलता नहीं। फराज अहमद फराज ने कहा- हजारों लोग प्यासे मर गए, समंदर फिर भी शर्मिंदा नहीं है।
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असलम मोहसिन ने कहा-सिमट कर दर्द जब तक रूह के अंदर नहीं आया, छलक कर आंख से आंसू कोई बाहर नहीं आया। बिलाल सहारनपुर सुनाया-पड़ोसन की तरह मेरी भी तुम तारीफ कर देते, नजर के रूबरू ऐसा कोई मंजर नहीं आया। सिकंदर हयात, डा. इरशाद सागर, डा. अमजद, अय्यूब सादिक, डा. इलियास आलम, मोहम्मद उवैस आदि ने भी अपने कलाम पेश किए।
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