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गन्ना फसल में पोक्का बोईंग का प्रकोप
Updated Sat, 23 Jun 2018 12:40 AM IST
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सहारनपुर। जनपद में कई स्थानों पर गन्ना फसल पर पोक्का बोईंग रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इस रोग से ग्रसित पौधे की बढ़वार रुक जाती है, जिससे गन्ने का उत्पादन प्रभावित होता है। इस रोग के कवक स्पोर हवा के माध्यम से फैलते हैं। खासतौर पर कोशा 0238, कोशा 8436, कोसे 1434 और कोशा 767 प्रजातियों पर इसका प्रकोप अधिक दिखाई दे रहा है।
कृषि विज्ञान केेंद्र के प्रभारी एवं प्रोफेसर फसल सुरक्षा डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि कई स्थानों पर गन्ना फसल पोक्का बोईंग से ग्रसित है। बीज जनित यह रोग के प्राथमिक लक्षण जून और जुलाई में दिखाई देने लगते हैं। प्रभावित पौधे की गोभ की ऊपरी पत्तियां आपस में उलझी दिखाई देती है, जो बाद में किनारे से फट जाती है। जिससे गन्ने की गोभ पतली और लंबी हो जाती है। इसके बाद गन्ने की गोभ सड़ जाती है और उससे सड़ने जैसी गंध आती है। इसके चलते गन्ने की बढ़वार रुक जाती है। उन्होंने बताया कि इससे रोग से बचाव के लिए गन्ने के बीज को एमेचेटी प्लांट से उपचारित करके ही बोना चाहिए। रोग प्रभावित बीज की बुआई नहीं करनी चाहिए। प्रभावित फसल पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कॉपर आक्सीक्लोराइड की दो ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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कृषि विज्ञान केेंद्र के प्रभारी एवं प्रोफेसर फसल सुरक्षा डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि कई स्थानों पर गन्ना फसल पोक्का बोईंग से ग्रसित है। बीज जनित यह रोग के प्राथमिक लक्षण जून और जुलाई में दिखाई देने लगते हैं। प्रभावित पौधे की गोभ की ऊपरी पत्तियां आपस में उलझी दिखाई देती है, जो बाद में किनारे से फट जाती है। जिससे गन्ने की गोभ पतली और लंबी हो जाती है। इसके बाद गन्ने की गोभ सड़ जाती है और उससे सड़ने जैसी गंध आती है। इसके चलते गन्ने की बढ़वार रुक जाती है। उन्होंने बताया कि इससे रोग से बचाव के लिए गन्ने के बीज को एमेचेटी प्लांट से उपचारित करके ही बोना चाहिए। रोग प्रभावित बीज की बुआई नहीं करनी चाहिए। प्रभावित फसल पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कॉपर आक्सीक्लोराइड की दो ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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