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मनुष्य का परमात्मा से दूर होना है अशांति की वजह

Sat, 16 Dec 2017 12:37 AM IST
Updated Sat, 16 Dec 2017 12:37 AM IST
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मनुष्य का परमात्मा से दूर होना है अशांति की वजह
छुटमलपुर (सहारनपुर)। महात्मा आराधना बाई ने कहा कि अशांति से बचने के लिए मन को परमात्मा के नाम में लगाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में अशांति की सबसे बड़ी वजह मनुष्य का परमात्मा से दूर होना है।
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मानव उत्थान सेवा समिति छुटमलपुर शाखा के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में महात्मा आराधना बाई ने कहा कि गुणवाचक नामों से आध्यात्मिक लाभ नहीं होगा। संसार में हजारों गुणवाचक नाम प्रभु के हैं, लेकिन वह आदि नाम एक ही है जिसका भेद केवल समय के सच्चे सद्गुरु ही करा सकते हैं। इसलिए हमें जीवन में सच्चे सद्गुरु की खोज करके उनसे आत्मज्ञान प्राप्त करके उस प्रभु के सच्चे नाम को जान कर उसका सुमिरन करना चाहिए। महात्मा करुणा बाई ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल खाना, पीना एवं घर बनाना ही नहीं है। बल्कि उसका मुख्य उद्देश्य परमपिता परमात्मा का साक्षात्कार करके बंधन मुक्त होना है। मनुष्य जीवन मोक्ष का साधन है। महात्मा राधिका बाई ने कहा कि गुरु की पहचान केवल ज्ञान से होती है। जो हमें उस परमपिता परमात्मा के सच्चे नाम का बोध करा दे और उस परमात्मा को हृदय से साक्षात्कार करा दे वही सच्चा गुरु होता है। महात्मा तुरियानंद जी ने भी श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। इससे पूर्व यहां पहुंचने पर संतों का हार्ट टच की टीम के अध्यक्ष एडवोकेट गौरव शर्मा, प्रकाशी देवी, निर्मला शर्मा, सतपाल सैनी, जितेश्वर सैनी, दिनेश पंडित, कोमल पंडित आदि ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
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