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मानवाधिकार संरक्षण दिवस मनाया
Updated Tue, 12 Dec 2017 12:54 AM IST
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इस्लामिया कॉलेज में मानवाधिकार संरक्षण दिवस मनाया
देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामिया डिग्री कॉलेज में मानवाधिकार संरक्षण दिवस धूमधाम से मनाया गया। वक्ताओं ने छात्रों के साथ अपने विचार साझा किए। इसमें सामाजिक मुद्दों के साथ ही मानवाधिकार संरक्षण पर जोर दिया गया।
विधि विभाग की प्रवक्ता डा. अमितेश आनंद ने बताया कि मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। वर्ष 1948 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर को हर वर्ष मानवाधिकार मनाने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि मानव अधिकार दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मानव जीवन से गरीबी का उन्मूलन और जीवन को अच्छी तरह से जीने में मदद करना है। छात्रों ने संगीत, नाटक, नृत्यकला आदि कार्यक्रमों से लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
बुशरा शफीक ने बताया कि मानवाधिकार सभी सामाजिक विषयों में सबसे गंभीर है। इसे हम एकतरफा होकर नहीं सोच सकते। लेकिन इस विषय पर बहस करते समय हमें उस रास्ते को चुनना चाहिए जो समाज के लिए बेहतर हो। चाहे उस रास्ते के लिए हमे कुर्बानियां क्यों न देनी पड़े। छात्रा पद्मावती ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दों को उठाया तो पूनम ने बाल श्रम के प्रति जागरूकता फैलाई। मोहित त्यागी ने संविधान की प्रस्तावना को समझाया। इनके अलावा अनिल, आशुतोष, लवी बंसल, राहुल, दीक्षा चंद्रा, रीतू, निशा, तमन्ना आदि ने कविता, गजल और भाषण से लोगों को मानवाधिकारों के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर डा. अश्वनी कुमार, अतुल वर्मा, राहुल देव त्यागी, आरिफ कुरैशी, इनाम उल हक आदि रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामिया डिग्री कॉलेज में मानवाधिकार संरक्षण दिवस धूमधाम से मनाया गया। वक्ताओं ने छात्रों के साथ अपने विचार साझा किए। इसमें सामाजिक मुद्दों के साथ ही मानवाधिकार संरक्षण पर जोर दिया गया।
विधि विभाग की प्रवक्ता डा. अमितेश आनंद ने बताया कि मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। वर्ष 1948 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर को हर वर्ष मानवाधिकार मनाने की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि मानव अधिकार दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मानव जीवन से गरीबी का उन्मूलन और जीवन को अच्छी तरह से जीने में मदद करना है। छात्रों ने संगीत, नाटक, नृत्यकला आदि कार्यक्रमों से लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
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बुशरा शफीक ने बताया कि मानवाधिकार सभी सामाजिक विषयों में सबसे गंभीर है। इसे हम एकतरफा होकर नहीं सोच सकते। लेकिन इस विषय पर बहस करते समय हमें उस रास्ते को चुनना चाहिए जो समाज के लिए बेहतर हो। चाहे उस रास्ते के लिए हमे कुर्बानियां क्यों न देनी पड़े। छात्रा पद्मावती ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दों को उठाया तो पूनम ने बाल श्रम के प्रति जागरूकता फैलाई। मोहित त्यागी ने संविधान की प्रस्तावना को समझाया। इनके अलावा अनिल, आशुतोष, लवी बंसल, राहुल, दीक्षा चंद्रा, रीतू, निशा, तमन्ना आदि ने कविता, गजल और भाषण से लोगों को मानवाधिकारों के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर डा. अश्वनी कुमार, अतुल वर्मा, राहुल देव त्यागी, आरिफ कुरैशी, इनाम उल हक आदि रहे।
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