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दस करोड़ खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं का टोटा
Updated Wed, 08 Aug 2018 12:40 AM IST
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साढौली कदीम (सहारनपुर)। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते दस करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी क्षेत्रीय जनता स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तरस रही है। हालांकि विभागीय अधिकारी लंबे समय से जल्द ही सीएचसी पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे करते आ रहे हैं।
विकास खंड साढ़ौली कदीम में लगभग 10 करोड़ रुपयों की लागत वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के भवन को कई माह पूर्व स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया गया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते नवनिर्मित भवन के अधिकतर कक्ष खाली पडे़ हुए है। चिकित्सीय कक्षों से लेकर एएनएम कक्षों तक पर ताले लटके रहते हैं। इस सीएचसी पर कभी कोई चिकित्सक दिखाई नहीं दिया। मात्र दो फार्मेसिस्ट सहित पांच कर्मचारियों के भरोसे सीएचसी चल रही है। चौबीस घंटे आकस्मिक सेवाएं देने वाली सीएचसी पर दिन के दो बजे से पहले ही ताले लट जाते हैं। इसके चलते क्षेत्रीय लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए या तो बाहर जाना पड़ता है या प्राइवेट झोलाछाप की शरण लेनी पड़ती है। करोड़ों रुपये के भवन में मरीजों की सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। सीएचसी में एक्सरे एवं अल्ट्रासाउंड संबंधित कोई मशीन नहीं है। दवाइयां एवं वैक्सीन रखने के लिए कोल्ड चेन तक नहीं है। सीएचसी परिसर में चार चिकित्सकों एवं 12 कर्मचारी कक्ष बने हैं। जिन पर कई माह से ताले लटके हुए हैं।
क्षेत्रीय ग्रामीण संजय कुमार, योगेंद्र सिंह, सुखपाल सिंह, राजेश कुमार, केहर सिंह, अवनीश कुमार, अफजाल, माजिद, मुकर्रम, इरशाद आदि का कहना है कि सीएचसी बनने के बाद भी यहां की स्थिति पहले जैसी है। यहां केवल भवन बना दिया गया है। सेवाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। आकस्मिक सेवाएं तो दूर की बात यहां दिन में भी मरीजों को देखने के लिए चिकित्सक तक नहीं है।
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बिल्डिंग के निर्माण के चलते कर्मचारी बेहट सीएचसी में तैनात कर दिये गये थे, अब जल्द ही यहां कर्मचारियों की भरपाई कर प्रशासनिक कार्यालय भी संचालित किया जाएगा तथा आकस्मिक सेवाएं भी बेहतर दी जायेगी।
- डा. नितिन कदवाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी साढ़ौली कदीम।
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विकास खंड साढ़ौली कदीम में लगभग 10 करोड़ रुपयों की लागत वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के भवन को कई माह पूर्व स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया गया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते नवनिर्मित भवन के अधिकतर कक्ष खाली पडे़ हुए है। चिकित्सीय कक्षों से लेकर एएनएम कक्षों तक पर ताले लटके रहते हैं। इस सीएचसी पर कभी कोई चिकित्सक दिखाई नहीं दिया। मात्र दो फार्मेसिस्ट सहित पांच कर्मचारियों के भरोसे सीएचसी चल रही है। चौबीस घंटे आकस्मिक सेवाएं देने वाली सीएचसी पर दिन के दो बजे से पहले ही ताले लट जाते हैं। इसके चलते क्षेत्रीय लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए या तो बाहर जाना पड़ता है या प्राइवेट झोलाछाप की शरण लेनी पड़ती है। करोड़ों रुपये के भवन में मरीजों की सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। सीएचसी में एक्सरे एवं अल्ट्रासाउंड संबंधित कोई मशीन नहीं है। दवाइयां एवं वैक्सीन रखने के लिए कोल्ड चेन तक नहीं है। सीएचसी परिसर में चार चिकित्सकों एवं 12 कर्मचारी कक्ष बने हैं। जिन पर कई माह से ताले लटके हुए हैं।
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क्षेत्रीय ग्रामीण संजय कुमार, योगेंद्र सिंह, सुखपाल सिंह, राजेश कुमार, केहर सिंह, अवनीश कुमार, अफजाल, माजिद, मुकर्रम, इरशाद आदि का कहना है कि सीएचसी बनने के बाद भी यहां की स्थिति पहले जैसी है। यहां केवल भवन बना दिया गया है। सेवाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। आकस्मिक सेवाएं तो दूर की बात यहां दिन में भी मरीजों को देखने के लिए चिकित्सक तक नहीं है।
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बिल्डिंग के निर्माण के चलते कर्मचारी बेहट सीएचसी में तैनात कर दिये गये थे, अब जल्द ही यहां कर्मचारियों की भरपाई कर प्रशासनिक कार्यालय भी संचालित किया जाएगा तथा आकस्मिक सेवाएं भी बेहतर दी जायेगी।
- डा. नितिन कदवाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी साढ़ौली कदीम।