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पानी में उतरे बिना ही कर दी पांवधोई नदी की सफाई
Updated Sun, 15 Jul 2018 12:44 AM IST
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पानी में उतरे बिना ही कर दी पांवधोई नदी की सफाई
सहारनपुर। पांवधोई नदी की सफाई के लिए सात जुलाई को जोर शोर के साथ शुरू हुए सफाई अभियान की एक सप्ताह में ही हवा निकल गई है। शनिवार को सफाईकर्मियों ने सफाई के लिए नदी में उतरना तक जरूरी नहीं समझा। केवल घाट के आसपास की सफाई करने के बाद लौट गए।
कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने पांवधोई नदी की सफाई के लिए सात जुलाई को महाअभियान शुरू किया। उनके निर्देश पर सैकड़ों की संख्या में सफाईकर्मी, युवा, छात्र और तमाम विभागों के अधिकारी नदी के उद्गम स्थल और बाबा लालदास बाड़ा स्थित घाट पर जमा हुए थे। हालांकि सात जुलाई को ही अभियान का भविष्य तय हो गया था। जब तक अधिकारी मौके पर रहे, तभी तक नदी की सफाई के लिए जेसीबी चली और तभी तक सफाईकर्मी मौके पर रहे थे। अधिकारियों के निकलते ही काम अधूरा छोड़कर जेसीबी और सफाईकर्मी निकल गए थे। बाकी कसर नदी के घाट पर गंदगी छोड़ने से पूरी हो गई थी, जिसे अमर उजाला ने अपने नौ जुलाई के संस्करण में प्रमुखता से उठाया था। नगरायुक्त का दावा था कि नदी की सफाई के लिए प्रत्येक शनिवार को अभियान चलाया जाएगा। ऐसे में शनिवार 14 जुलाई को अमर उजाला की टीम ने अभियान की हकीकत जानने के लिए नदी का दौरा किया। नगर निगम के सफाईकर्मी बाबा लाल दास का बाड़ा स्थित घाट पर सफाई के लिए पहुंचे तो थे, मगर उन्होंने नदी के भी उतरकर सफाई करना जरूरी नहीं समझा। केवल घाट की सीढ़ियों पर खड़े होकर बाहर से ही फावड़ा चलाकर फोटो कराकर इतिश्री कर दी गई। हैरत की बात यह रही कि नदी में फावड़ा उसी जगह पर चलाया गया, जिस जगह पर पिछले सप्ताह चला था, जबकि घाट से ठीक 50 मीटर पीछे नदी में भारी गंदगी और कचरा भरा हुआ है, जिसे साफ करना जरूरी नहीं समझा गया। इतना ही नहीं, सफाईकर्मियों की टीम नदी के घाट के आसपास खाली पड़ी जमीन की सफाई करने के बाद लौट गई।
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पांवधोई की सफाई के लिए नगर निगम पूरी तरह गंभीर है। शनिवार को भी हमारे सफाईकर्मी घाट पर पहुंचे और सफाई की है। प्रत्येक शनिवार इसी तरह सफाई अभियान चलाकर नदी को साफ किया जाएगा।
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-- डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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सहारनपुर। पांवधोई नदी की सफाई के लिए सात जुलाई को जोर शोर के साथ शुरू हुए सफाई अभियान की एक सप्ताह में ही हवा निकल गई है। शनिवार को सफाईकर्मियों ने सफाई के लिए नदी में उतरना तक जरूरी नहीं समझा। केवल घाट के आसपास की सफाई करने के बाद लौट गए।
कमिश्नर चंद्रप्रकाश त्रिपाठी ने पांवधोई नदी की सफाई के लिए सात जुलाई को महाअभियान शुरू किया। उनके निर्देश पर सैकड़ों की संख्या में सफाईकर्मी, युवा, छात्र और तमाम विभागों के अधिकारी नदी के उद्गम स्थल और बाबा लालदास बाड़ा स्थित घाट पर जमा हुए थे। हालांकि सात जुलाई को ही अभियान का भविष्य तय हो गया था। जब तक अधिकारी मौके पर रहे, तभी तक नदी की सफाई के लिए जेसीबी चली और तभी तक सफाईकर्मी मौके पर रहे थे। अधिकारियों के निकलते ही काम अधूरा छोड़कर जेसीबी और सफाईकर्मी निकल गए थे। बाकी कसर नदी के घाट पर गंदगी छोड़ने से पूरी हो गई थी, जिसे अमर उजाला ने अपने नौ जुलाई के संस्करण में प्रमुखता से उठाया था। नगरायुक्त का दावा था कि नदी की सफाई के लिए प्रत्येक शनिवार को अभियान चलाया जाएगा। ऐसे में शनिवार 14 जुलाई को अमर उजाला की टीम ने अभियान की हकीकत जानने के लिए नदी का दौरा किया। नगर निगम के सफाईकर्मी बाबा लाल दास का बाड़ा स्थित घाट पर सफाई के लिए पहुंचे तो थे, मगर उन्होंने नदी के भी उतरकर सफाई करना जरूरी नहीं समझा। केवल घाट की सीढ़ियों पर खड़े होकर बाहर से ही फावड़ा चलाकर फोटो कराकर इतिश्री कर दी गई। हैरत की बात यह रही कि नदी में फावड़ा उसी जगह पर चलाया गया, जिस जगह पर पिछले सप्ताह चला था, जबकि घाट से ठीक 50 मीटर पीछे नदी में भारी गंदगी और कचरा भरा हुआ है, जिसे साफ करना जरूरी नहीं समझा गया। इतना ही नहीं, सफाईकर्मियों की टीम नदी के घाट के आसपास खाली पड़ी जमीन की सफाई करने के बाद लौट गई।
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पांवधोई की सफाई के लिए नगर निगम पूरी तरह गंभीर है। शनिवार को भी हमारे सफाईकर्मी घाट पर पहुंचे और सफाई की है। प्रत्येक शनिवार इसी तरह सफाई अभियान चलाकर नदी को साफ किया जाएगा।
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-- डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।