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शुरू होते ही विवादों में घिरा सहारनपुर महोत्सव
Updated Wed, 20 Jun 2018 12:52 AM IST
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सहारनपुर। ना हल्दी लगी और ना फिटकरी और रंग चोखा ही चोखा। सहारनपुर महोत्सव और शिल्प कला मेले में फूटी कौड़ी लगाए बिना प्रशासन आयोजक होने पर तमगा लगाए है। महोत्सव का पूरा खर्च मेला संचालक और प्रायोजकों पर छोड़ा गया है। सोमवार रात महोत्सव में झूला टूटने से कई दर्शकों के घायल होने के बाद सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठने लगे हैं। इन सब के बीच महोत्सव के नाम पर कई सराफ से चंदा वसूली की चर्चाएं भी हैं।
प्रशासन और उद्योग विभाग की तरफ से 17 से 28 जून तक महाराज सिंह कालेज ग्राउंड में सहारनपुर महोत्सव और शिल्पकला मेला लगाया गया है। प्रशासन ने राज्यमंत्री धर्म सिंह सैनी से इस महोत्सव का शुभारंभ कराया। आप यह सुनकर चौक जाएंगे कि महोत्सव का बजट जीरो है। प्रशासन बाहरी मदद के सहारे ही महोत्सव की कामयाबी का सपना संजोए है। प्रशासन ने तो सिर्फ महोत्सव के लिए जगह उपलब्ध कराई है, जबकि मेला लगाने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जिम्मेदारी दूसरे के पास है। प्रशासन ने सिर्फ मेला संचालक से शिल्पकारों को 40 के करीब स्टाल फ्री में उपलब्ध कराए है। बाकी दुकानदारों, स्टाल और झूले संचालकों से वसूली की जिम्मेदारी मेला संचालक पर सौंपी गई है। महोत्सव जिस आधी-अधूरी तैयारी के साथ शुरू हुआ है। उस हिसाब से सुरक्षा प्रबंधों को लेकर पहले दिन से ही आशंकाएं थीं। सोमवार देर रात झूला टूटा तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। अधिकारियों ने घायलों का हाल जानने के बाद सीधे महोत्सव स्थल पर पहुंचकर नए सिरे से व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंगलवार को चंदा वसूली की चर्चाओं ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। कहा जा रहा है कि कई सराफ से महोत्सव के नाम पर चंदा वसूली की गई है। वहीं एडीएम(वित्त) विनोद कुमार का कहना है कि डिप्टी कलेक्टर डीपी सिंह से मामले की जांच कराई जा रही है।
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महोत्सव के लिए एक रुपये का भी बजट नहीं है। महोत्सव में होने वाले कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रायोजक बनाए गए हैं। इसके पीछे मकसद जिले की नक्काशी को बढ़ावा देना है। चंदा वसूली की चर्चाओं का उन्हें संज्ञान नहीं है। यदि ऐसा कुछ सामने आया तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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--कल्पना, उपायुक्त उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र
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प्रशासन और उद्योग विभाग की तरफ से 17 से 28 जून तक महाराज सिंह कालेज ग्राउंड में सहारनपुर महोत्सव और शिल्पकला मेला लगाया गया है। प्रशासन ने राज्यमंत्री धर्म सिंह सैनी से इस महोत्सव का शुभारंभ कराया। आप यह सुनकर चौक जाएंगे कि महोत्सव का बजट जीरो है। प्रशासन बाहरी मदद के सहारे ही महोत्सव की कामयाबी का सपना संजोए है। प्रशासन ने तो सिर्फ महोत्सव के लिए जगह उपलब्ध कराई है, जबकि मेला लगाने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जिम्मेदारी दूसरे के पास है। प्रशासन ने सिर्फ मेला संचालक से शिल्पकारों को 40 के करीब स्टाल फ्री में उपलब्ध कराए है। बाकी दुकानदारों, स्टाल और झूले संचालकों से वसूली की जिम्मेदारी मेला संचालक पर सौंपी गई है। महोत्सव जिस आधी-अधूरी तैयारी के साथ शुरू हुआ है। उस हिसाब से सुरक्षा प्रबंधों को लेकर पहले दिन से ही आशंकाएं थीं। सोमवार देर रात झूला टूटा तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। अधिकारियों ने घायलों का हाल जानने के बाद सीधे महोत्सव स्थल पर पहुंचकर नए सिरे से व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंगलवार को चंदा वसूली की चर्चाओं ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। कहा जा रहा है कि कई सराफ से महोत्सव के नाम पर चंदा वसूली की गई है। वहीं एडीएम(वित्त) विनोद कुमार का कहना है कि डिप्टी कलेक्टर डीपी सिंह से मामले की जांच कराई जा रही है।
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महोत्सव के लिए एक रुपये का भी बजट नहीं है। महोत्सव में होने वाले कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग प्रायोजक बनाए गए हैं। इसके पीछे मकसद जिले की नक्काशी को बढ़ावा देना है। चंदा वसूली की चर्चाओं का उन्हें संज्ञान नहीं है। यदि ऐसा कुछ सामने आया तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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--कल्पना, उपायुक्त उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र