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चीन के इंजीनियर्स की देखरेख में बनेगा सिंथेटिक ट्रैक
Updated Wed, 20 Jun 2018 12:43 AM IST
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सहारनपुर। डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण चीन के इंजीनियर्स की देखरेख में होगा। ट्रैक पर साढ़े सात करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह राशि शासन ने जारी भी कर दी है। अब केवल निर्माण एजेंसी फाइनल होनी बाकी है। बता दें कि डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम सिंथेटिक ट्रैक वाला प्रदेश का पहला स्टेडियम होगा। इसे लेकर खेल अधिकारी, खेल एसोसिएशन के पदाधिकारी और खिलाड़ी उत्साहित हैं।
खेलो इंडिया स्कीम के तहत प्रदेश भर में केवल सहारनपुर को सिंथेटिक ट्रैक की सौगात मिली है। इतना ही नहीं, शासन ने इसके लिए साढ़े सात करोड़ रुपये जारी भी कर दिए हैं। एजेंसी फाइनल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिसके तुरंत बाद ट्रैक पर काम शुरू होगा। माना जा रहा है कि शुरू होने के बाद मुश्किल से 40 दिन में ट्रैक बनकर तैयार हो जाएगा। विभागीय सूत्रों ने बताया कि चीन के इंजीनियर सिंथेटिक ट्रैक बनाने के एक्सपर्ट माने जाते हैं। भारत के भीतर अनेक ट्रैक तैयार करने में चीन के इंजीनियर्स का हाथ रहा है। सहारनपुर में भी चीन के ही इंजीनियर काम करेंगे, जो ट्रैक के काम शुरू होने से निपटने तक यहीं रहेंगे। सिंथेटिक ट्रैक बनने को लेकर एथलेटिक्स खिलाड़ी खासे उत्साहित हैं। गौरतलब है कि अभी तक वह कच्ची मिट्टी के ट्रैक पर दौड़कर अपने खेल में निखार लाने का प्रयास करते रहे हैं। अनेक खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित भी किया है। कुछ खिलाड़ियों ने सुविधाओं की तलाश में सहारनपुर से पलायन भी किया है। खिलाड़ियों के साथ ही एथलेटिक्स कोच लाल धर्मेंद्र प्रताप भी उत्साहित हैं। कोच का मानना है कि ट्रैक बनने के बाद खिलाड़ियों को तैयारी कराने में आनंद आएगा। प्रतिभाएं भी निखरेंगी।
छह लाइन का बनेगा ट्रैक!
स्टेडियम में बनाया जाने वाला सिंथेटिक ट्रैक छह लाइन का होगा। इसकी प्रमुख वजह स्टेडियम के पास पर्याप्त जगह न होना है। छह लाइन का ट्रैक बनाने को लेकर अधिकारी, एसोसिएशन पदाधिकारी और खिलाड़ी थोड़े मायूस हैं। मगर खुशी इस बात की है कि प्रदेश भर में केवल सहारनपुर के स्टेडियम में यह ट्रैक बनने जा रहा है। साथ ही छह लाइन का ट्रैक बनने के बाद सहारनपुर को राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक्स प्रतियोगिता की मेजबानी भी नहीं मिल सकेगी, क्योंकि राष्ट्रीय प्रतियोगिता कराने के लिए आठ लाइन का ट्रैक चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि यदि आठ लाइन के ट्रैक के चक्कर में पड़े तो काम लेट होगा, जिससे पैसा वापस भी जा सकता है। ऐसे में छह लाइन का भी बन जाए तो ठीक है।
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सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए अब केवल एजेंसी फाइनल होना बाकी है। एजेंसी फाइनल होते ही काम शुरू होगा। ट्रैक बनाने के लिए चीन के इंजीनियर आने की उम्मीद है। ट्रैक छह लाइन का होगा। आठ लाइन के ट्रैक के लिए अधिक जगह चाहिए, जो हमारे पास नहीं है।
- प्रेम कुमार, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी।
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खेलो इंडिया स्कीम के तहत प्रदेश भर में केवल सहारनपुर को सिंथेटिक ट्रैक की सौगात मिली है। इतना ही नहीं, शासन ने इसके लिए साढ़े सात करोड़ रुपये जारी भी कर दिए हैं। एजेंसी फाइनल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिसके तुरंत बाद ट्रैक पर काम शुरू होगा। माना जा रहा है कि शुरू होने के बाद मुश्किल से 40 दिन में ट्रैक बनकर तैयार हो जाएगा। विभागीय सूत्रों ने बताया कि चीन के इंजीनियर सिंथेटिक ट्रैक बनाने के एक्सपर्ट माने जाते हैं। भारत के भीतर अनेक ट्रैक तैयार करने में चीन के इंजीनियर्स का हाथ रहा है। सहारनपुर में भी चीन के ही इंजीनियर काम करेंगे, जो ट्रैक के काम शुरू होने से निपटने तक यहीं रहेंगे। सिंथेटिक ट्रैक बनने को लेकर एथलेटिक्स खिलाड़ी खासे उत्साहित हैं। गौरतलब है कि अभी तक वह कच्ची मिट्टी के ट्रैक पर दौड़कर अपने खेल में निखार लाने का प्रयास करते रहे हैं। अनेक खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित भी किया है। कुछ खिलाड़ियों ने सुविधाओं की तलाश में सहारनपुर से पलायन भी किया है। खिलाड़ियों के साथ ही एथलेटिक्स कोच लाल धर्मेंद्र प्रताप भी उत्साहित हैं। कोच का मानना है कि ट्रैक बनने के बाद खिलाड़ियों को तैयारी कराने में आनंद आएगा। प्रतिभाएं भी निखरेंगी।
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छह लाइन का बनेगा ट्रैक!
स्टेडियम में बनाया जाने वाला सिंथेटिक ट्रैक छह लाइन का होगा। इसकी प्रमुख वजह स्टेडियम के पास पर्याप्त जगह न होना है। छह लाइन का ट्रैक बनाने को लेकर अधिकारी, एसोसिएशन पदाधिकारी और खिलाड़ी थोड़े मायूस हैं। मगर खुशी इस बात की है कि प्रदेश भर में केवल सहारनपुर के स्टेडियम में यह ट्रैक बनने जा रहा है। साथ ही छह लाइन का ट्रैक बनने के बाद सहारनपुर को राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक्स प्रतियोगिता की मेजबानी भी नहीं मिल सकेगी, क्योंकि राष्ट्रीय प्रतियोगिता कराने के लिए आठ लाइन का ट्रैक चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि यदि आठ लाइन के ट्रैक के चक्कर में पड़े तो काम लेट होगा, जिससे पैसा वापस भी जा सकता है। ऐसे में छह लाइन का भी बन जाए तो ठीक है।
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सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए अब केवल एजेंसी फाइनल होना बाकी है। एजेंसी फाइनल होते ही काम शुरू होगा। ट्रैक बनाने के लिए चीन के इंजीनियर आने की उम्मीद है। ट्रैक छह लाइन का होगा। आठ लाइन के ट्रैक के लिए अधिक जगह चाहिए, जो हमारे पास नहीं है।
- प्रेम कुमार, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी।