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चुनाव में किए वायदे संसद में पहुंचकर गए भूल

Wed, 09 May 2018 12:04 AM IST
Updated Wed, 09 May 2018 12:04 AM IST
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चुनाव में किए वायदे संसद में पहुंचकर गए भूल
सहारनपुर। कैराना उपचुनाव को लेकर विपक्ष और भाजपा ने शंखनाद कर दिया है, मगर गंगोह और नकुड़ विधानसभा के मतदाताओं में ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा है। लोकसभा की दो योजनाओं में जीतकर गए सांसद उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। लोगों का कहना कि चुनावी वायदे तो किए, मगर संसद में पहुंचते ही भूल गए।
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कैराना लोकसभा की नकुड़ विधानसभा में करीब तीन लाख 28 हजार और गंगोह विधानसभा में करीब तीन लाख 55 हजार मतदाता हैं। परिसीमन के बाद 2009 के चुनाव में यह दोनों विधानसभाएं सहारनपुर से निकलकर कैराना लोकसभा में शामिल हो गई थी। पहली बार बसपा के टिकट पर इस सीट से तबस्सुम बेगम की ताजपोशी हुई थी। 2014 में इस सीट से हुकुम सिंह चुने गए। चुनाव के समय विकास योजनाओं को गति देने के साथ कॉलेज, पुल के निर्माण और रोडवेज बस स्टैंड निर्माण जैसे वायदे किए गए थे। वक्त बदला और तमाम वायदे नेपथ्य में चले गए। उपचुनाव को लेकर लोगों में किसी तरह का उत्साह नहीं है।
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वायदों पर नही भरोसा
नकुड़। कपड़ा व्यापारी पीयूष जैन का कहना है कि विगत दस वर्षों से विकास के नाम पर नकुड़ क्षेत्र में कोई काम ऐसा नजर नहीं आ रहा है, जिसके लिए क्षेत्रीय सांसद की वाहवाही की जाए। किसान चौधरी विक्रम सिंह का कहना है कि चुनाव के समय क्षेत्र में हरियाणा की तर्ज पर प्लाईवुड की फैक्ट्रियां लगवाये जाने के अनेक बार वादे किए गए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। किसान तेलूराम सैनी का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में यह इलाका पिछड़ा है। मास्टर कैलाशचंद शर्मा का कहना है कि कई वर्षों से हरियाणा को जोड़ने वाला यमुना नदी पर लखनौती का पुल अधर में लटका है।
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लोगों में नाराजगी
गंगोह। यहां से निर्वाचित होकर गए सांसदों द्वारा विकास कार्यों में रुचि ना लेने के कारण लोग खासे नाराज हैं। डा. अमित गर्ग का कहना है कि हरियाणा की सीमा से लगे यह इलाका बरसों से उपेक्षित है। राजेश नामदेव का कहना है कि चुनाव के समय जरूर राजनीतिक दल नजर आते हैं, मगर उसके बाद कोई मुड़कर नहीं देखता। फहीम अहमद का कहना है कि इलाके में इंटर कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधाएं ना के बराबर हैं।
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