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अब ठेका कर्मचारियों को भी देना होगा इंटरव्यू
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:48 AM IST
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अब ठेका कर्मचारियों को भी देना होगा साक्षात्कार
सहारनपुर। नगर निगम के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं। अभी तक इन कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधित ठेकेदार के द्वारा की जाती है, जिसमें नगर निगम का कोई हस्तक्षेप नहीं रहता है। पूर्व में केवल कागजों में ही कर्मचारियों के काम करने की शिकायतें आती रही हैं, जिनके नाम से वेतन निकाला जाता रहा है। मगर अब ऐसा नहीं होगा। नगर निगम में ठेके पर रखे जाने वाले कर्मचारियों को भी इंटरव्यू से गुजरना होगा। एक अप्रैल के बाद ठेके पर रखे जाने वालों के लिए नगर निगम इस नीति पर काम कर रहा है।
नगर निगम के तमाम विभागों में अनेक कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं। नगर निगम के विभाग जरूरत के हिसाब से कर्मचारी की डिमांड नगरायुक्त से करते हैं, जिसके बाद नगरायुक्त की रिकमंड पर ठेकेदार योग्यता के अनुरूप कर्मचारी उपलब्ध करा देता है। विभिन्न कार्यालयों में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों की संख्या 14 है। इनमें 12 कंप्यूटर ऑपरेटर हैं और दो चपरासी हैं। इनके अलावा स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों के तहत काम करने वाले कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों की नियुक्ति डिमांड के आधार पर सीधे ठेकेदारों के द्वारा की जाती है। शिकायत मिलती रही है कि कुछ विभागों में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी केवल कागजों में हैं, जबकि उनके नाम से वेतन निकाला जा रहा है। ऐसी ही कथित धांधलियों से निपटने के लिए नगर निगम नई व्यवस्था करने जा रहा है। इसके तहत एक अप्रैल 2018 के बाद ठेके पर रखे जाने वाले कर्मचारियों को नगर निगम के अधिकारियों को इंटरव्यू देना होगा।
वेतन में भी धांधली का आरोप
ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिलने के मामले भी सामने आते रहे हैं। सफाई कर्मचारियों की ही बात करें तो एक साल से अधिक समय तक उनके वेतन से पांच सौ रुपये हर महीने के हिसाब से काटे जाते रहे। इस कटौती का हिसाब वह समय-समय पर नगर निगम के अफसरों से मांगते रहे, मगर निगम अफसरों ने कुछ नहीं किया। काटा गया यह पैसा करीब 36 लाख रुपये बैठता है, जिसका हिसाब आज तक कर्मचारियों को नहीं मिला है। अन्य विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें 7200 और 7500 रुपये पर रखा गया था, मगर उन्हें छह हजार रुपये दिए जा रहे हैं। सैकड़ों कर्मचारियों के वेतन से की जा रही इस कटौती का जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।
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जनता के पैसे को फिजूल में उड़ा रहा निगम
नगर निगम प्रत्येक वर्ष जनता का करीब आठ से दस लाख रुपये फिजूल में खर्च करता आ रहा है। दरअसल, कुछ वर्ष पहले शासनादेश आया था, जिसमें स्थाई कर्मचारियों के लिए कंप्यूटर का ज्ञान होना खासकर नेट चलाना और टाइपिंग सीखना अनिवार्य किया गया था। मगर नगर निगम के कर्मचारियों ने कंप्यूटर सीखने की बजाय ठेके पर सहायक के रूप में कर्मचारी रख लिए, जिनका पैसा सरकारी खाते से निकाला जा रहा है।
मेयर ऑफिस में ऐसे ही रख लिए गए कर्मचारी
नगर निगम चुनाव के परिणाम के साथ ही मेयर के लिए दो अस्थाई कर्मचारी रखे गए हैं। यह दोनों कर्मचारी सिफारिश पर लगाए गए हैं। हैरत की बात यह है कि ठेकेदार को इनके रखे जाने की भनक तक नहीं है। जबकि मेयर के स्टेनो भंडारी कर्मचारियों को ठेकेदार द्वारा ही रखे जाने की बात कह रहे हैं। उधर, नगरायुक्त गौरव वर्मा ने बताया कि कर्मचारियों को रखने के लिए टेंडर निकाला जाना चाहिए था, मगर चूंकि कुछ ही महीने के लिए रखा जाना था और मेयर को कर्मचारियों की जरूरत थी। ऐसे में दो कर्मचारियों को रखा गया है।
अभी तक ठेके पर रखे जाने वाले कर्मचारियों यहां तक कि कंप्यूटर ऑपरेटर्स तक का कोई इंटरव्यू नहीं लिया जाता है। मगर मार्च के बाद से रखे जाने वाले ठेका कर्मचारियों के लिए इंटरव्यू को अनिवार्य किया जा रहा है। मैं स्वयं एक-एक कर्मचारी का इंटरव्यू लूंगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और योग्य व्यक्ति को ही काम मिल सके।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।
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सहारनपुर। नगर निगम के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं। अभी तक इन कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधित ठेकेदार के द्वारा की जाती है, जिसमें नगर निगम का कोई हस्तक्षेप नहीं रहता है। पूर्व में केवल कागजों में ही कर्मचारियों के काम करने की शिकायतें आती रही हैं, जिनके नाम से वेतन निकाला जाता रहा है। मगर अब ऐसा नहीं होगा। नगर निगम में ठेके पर रखे जाने वाले कर्मचारियों को भी इंटरव्यू से गुजरना होगा। एक अप्रैल के बाद ठेके पर रखे जाने वालों के लिए नगर निगम इस नीति पर काम कर रहा है।
नगर निगम के तमाम विभागों में अनेक कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं। नगर निगम के विभाग जरूरत के हिसाब से कर्मचारी की डिमांड नगरायुक्त से करते हैं, जिसके बाद नगरायुक्त की रिकमंड पर ठेकेदार योग्यता के अनुरूप कर्मचारी उपलब्ध करा देता है। विभिन्न कार्यालयों में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों की संख्या 14 है। इनमें 12 कंप्यूटर ऑपरेटर हैं और दो चपरासी हैं। इनके अलावा स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों के तहत काम करने वाले कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों की नियुक्ति डिमांड के आधार पर सीधे ठेकेदारों के द्वारा की जाती है। शिकायत मिलती रही है कि कुछ विभागों में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी केवल कागजों में हैं, जबकि उनके नाम से वेतन निकाला जा रहा है। ऐसी ही कथित धांधलियों से निपटने के लिए नगर निगम नई व्यवस्था करने जा रहा है। इसके तहत एक अप्रैल 2018 के बाद ठेके पर रखे जाने वाले कर्मचारियों को नगर निगम के अधिकारियों को इंटरव्यू देना होगा।
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वेतन में भी धांधली का आरोप
ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिलने के मामले भी सामने आते रहे हैं। सफाई कर्मचारियों की ही बात करें तो एक साल से अधिक समय तक उनके वेतन से पांच सौ रुपये हर महीने के हिसाब से काटे जाते रहे। इस कटौती का हिसाब वह समय-समय पर नगर निगम के अफसरों से मांगते रहे, मगर निगम अफसरों ने कुछ नहीं किया। काटा गया यह पैसा करीब 36 लाख रुपये बैठता है, जिसका हिसाब आज तक कर्मचारियों को नहीं मिला है। अन्य विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें 7200 और 7500 रुपये पर रखा गया था, मगर उन्हें छह हजार रुपये दिए जा रहे हैं। सैकड़ों कर्मचारियों के वेतन से की जा रही इस कटौती का जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।
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जनता के पैसे को फिजूल में उड़ा रहा निगम
नगर निगम प्रत्येक वर्ष जनता का करीब आठ से दस लाख रुपये फिजूल में खर्च करता आ रहा है। दरअसल, कुछ वर्ष पहले शासनादेश आया था, जिसमें स्थाई कर्मचारियों के लिए कंप्यूटर का ज्ञान होना खासकर नेट चलाना और टाइपिंग सीखना अनिवार्य किया गया था। मगर नगर निगम के कर्मचारियों ने कंप्यूटर सीखने की बजाय ठेके पर सहायक के रूप में कर्मचारी रख लिए, जिनका पैसा सरकारी खाते से निकाला जा रहा है।
मेयर ऑफिस में ऐसे ही रख लिए गए कर्मचारी
नगर निगम चुनाव के परिणाम के साथ ही मेयर के लिए दो अस्थाई कर्मचारी रखे गए हैं। यह दोनों कर्मचारी सिफारिश पर लगाए गए हैं। हैरत की बात यह है कि ठेकेदार को इनके रखे जाने की भनक तक नहीं है। जबकि मेयर के स्टेनो भंडारी कर्मचारियों को ठेकेदार द्वारा ही रखे जाने की बात कह रहे हैं। उधर, नगरायुक्त गौरव वर्मा ने बताया कि कर्मचारियों को रखने के लिए टेंडर निकाला जाना चाहिए था, मगर चूंकि कुछ ही महीने के लिए रखा जाना था और मेयर को कर्मचारियों की जरूरत थी। ऐसे में दो कर्मचारियों को रखा गया है।
अभी तक ठेके पर रखे जाने वाले कर्मचारियों यहां तक कि कंप्यूटर ऑपरेटर्स तक का कोई इंटरव्यू नहीं लिया जाता है। मगर मार्च के बाद से रखे जाने वाले ठेका कर्मचारियों के लिए इंटरव्यू को अनिवार्य किया जा रहा है। मैं स्वयं एक-एक कर्मचारी का इंटरव्यू लूंगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और योग्य व्यक्ति को ही काम मिल सके।
गौरव वर्मा, नगरायुक्त।