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महिलाओं की चूड़ी को कमजोरी नहीं शक्ति के रुप में देखे समाज
Updated Thu, 15 Feb 2018 12:13 AM IST
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चिलकाना (सहारनपुर)। ‘उमड़ते सौ करोड़- शोषण के खिलाफ एक जुटता अभियान’ विषय पर आयोजित सेमिनार में कहा गया कि इस सेमिनार का उद्देश्य लड़कियों तथा औरत के खिलाफ होने वाली किसी भी तरह की हिंसा को रोकना है।
बुधवार को दिशा सामाजिक संगठन के तत्वावधान होने वाली विचार गोष्ठी में उत्तराखंड की प्रमुख सोशल वर्कर गीता गैरोला ने कहा कि प्राकृतिक तौर पर सभी समान हैं, लेकिन आज महिलाएं हिंसा की शिकार हैं या हिंसा के भय में जी रही हैं। यह अभियान वैसे तो पूरे विश्व में चल रहा है, लेकिन विश्व के 27 देश इस अभियान में सीधे-सीधे शामिल हैं। महिलाओं पर होने वाली कुछ हिंसा तो दिखाई देती है, लेकिन कुछ हिंसा ऐसी भी है, जिसे महिला भी देख एवं समझ नहीं पाती है। विश्व में हर जगह अलग-अलग तरह की महिला हिंसा हैं। महिलाएं संगठित होकर ही इस हिंसा तथा शोषण का विरोध करेगी तभी वह मुख्य धारा में शामिल हो सकेगी। दिशा संगठन की समन्वयक जाह्नवी तिवारी ने कहा कि महिलाओं पर होने वाली हिंसा को महिला के साथ पुरुष को भी समझनी चाहिए। महिलाओं की चूड़ी को उसकी कमजोरी नहीं वरन शक्ति के रूप में देखना चाहिए। जब तक महिलाओं को राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक समानता नहीं मिलेगी तब तक यह आवाज उठती रहेगी। उन्होंने कहा कि विश्व की सौ करोड़ महिलाएं हिंसा से पीडित हैं। यह अभियान उनके प्रति होने वाली हिंसा को रोकने के लिए है।
नगर चेयरमैन अकबर कुरैशी ने कहा कि महिला आज हर क्षेत्र में पुरुष के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर चल रही हैं। यदि समाज में महिलाओं पर हिंसा होगी तो यह समाज के लिए कलंक होगा। निर्मला देवी, लियाकत कुरैशी, अशोक काशी, कुन्ता देवी, रेनु, फरीदा, शाहिन, नसीमा आदि ने भी उमड़ते 100 करोड़ अभियान पर विचार प्रकट किए। सेमिनार में महिला जागरूकता गीत प्रस्तुत किए गए। इस दौरान कुलदीप, रेखा, मुकेश रानी, मीरा, शमीम, रजनी, राज्जो, अरुण, हरीचन्द, राजकुमार, नीलम, रजनीश, रियासत, सुमन, प्रीति, सुरेशो सैनी, जयपाल सैनी, तनवीर, पीराम, सविता, रामरती आदि उपस्थित रहे। संचालन तस्नीम ने किया।
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बुधवार को दिशा सामाजिक संगठन के तत्वावधान होने वाली विचार गोष्ठी में उत्तराखंड की प्रमुख सोशल वर्कर गीता गैरोला ने कहा कि प्राकृतिक तौर पर सभी समान हैं, लेकिन आज महिलाएं हिंसा की शिकार हैं या हिंसा के भय में जी रही हैं। यह अभियान वैसे तो पूरे विश्व में चल रहा है, लेकिन विश्व के 27 देश इस अभियान में सीधे-सीधे शामिल हैं। महिलाओं पर होने वाली कुछ हिंसा तो दिखाई देती है, लेकिन कुछ हिंसा ऐसी भी है, जिसे महिला भी देख एवं समझ नहीं पाती है। विश्व में हर जगह अलग-अलग तरह की महिला हिंसा हैं। महिलाएं संगठित होकर ही इस हिंसा तथा शोषण का विरोध करेगी तभी वह मुख्य धारा में शामिल हो सकेगी। दिशा संगठन की समन्वयक जाह्नवी तिवारी ने कहा कि महिलाओं पर होने वाली हिंसा को महिला के साथ पुरुष को भी समझनी चाहिए। महिलाओं की चूड़ी को उसकी कमजोरी नहीं वरन शक्ति के रूप में देखना चाहिए। जब तक महिलाओं को राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक समानता नहीं मिलेगी तब तक यह आवाज उठती रहेगी। उन्होंने कहा कि विश्व की सौ करोड़ महिलाएं हिंसा से पीडित हैं। यह अभियान उनके प्रति होने वाली हिंसा को रोकने के लिए है।
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नगर चेयरमैन अकबर कुरैशी ने कहा कि महिला आज हर क्षेत्र में पुरुष के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर चल रही हैं। यदि समाज में महिलाओं पर हिंसा होगी तो यह समाज के लिए कलंक होगा। निर्मला देवी, लियाकत कुरैशी, अशोक काशी, कुन्ता देवी, रेनु, फरीदा, शाहिन, नसीमा आदि ने भी उमड़ते 100 करोड़ अभियान पर विचार प्रकट किए। सेमिनार में महिला जागरूकता गीत प्रस्तुत किए गए। इस दौरान कुलदीप, रेखा, मुकेश रानी, मीरा, शमीम, रजनी, राज्जो, अरुण, हरीचन्द, राजकुमार, नीलम, रजनीश, रियासत, सुमन, प्रीति, सुरेशो सैनी, जयपाल सैनी, तनवीर, पीराम, सविता, रामरती आदि उपस्थित रहे। संचालन तस्नीम ने किया।
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