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पत्थरबाजों के खिलाफ दारुल उलूम से फतवा देने की मांग
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:43 AM IST
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गंगोह (सहारनपुर)। दारुल उलूम देवबंद का फतवा विभाग सेना के ऊपर हमला करने वाले कश्मीर के पत्थरबाजों और देश विरोधी काम करने वाले तत्वों के खिलाफ फतवा जारी नहीं कर रहा है। अब दो माह बीतने के बावजूद दारुल उलूम ने फतवा जारी करने के बजाय अपीलकर्ता को चर्चा के लिए दारुल उलूम आने का दावतनामा दिया है।
नगर के मोहल्ला कुरैशियान निवासी युवक रिहान कुरैशी ने दारुल उलूम देवबंद के उलेमा और फतवा विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि हिंदू समाज की आस्था का सम्मान करते हुए गोहत्या के खिलाफ जारी फतवे को बड़ी तादाद में मुस्लिम समाज द्वारा कबूला गया। उसके बाद अधिकांश मुस्लिम गोहत्या व गोमांस से परहेज करने लगे। जो एक सराहनीय कार्य था। मगर आज उससे भी बड़ा और खतरनाक मसला कश्मीर को लेकर चल रहा है। इससे आम मुसलमान परेशान हैं और पूरी कौम बदनाम हो रही है। वहां भारतीय फौज पर पत्थरबाजी करने वाले युवकों के कारण देशद्रोह को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में भटके हुए कश्मीरी मुसलमानों और युवाओं को समझाने के लिए उलेमा को आगे आने की आवश्यकता है। फतवा जारी कर कश्मीरी नौजवानों को मुख्य धारा में लाने के लिए पत्थरबाजी के खिलाफ फतवा जारी करने की आवश्यकता है, ताकि देश की आजादी व तरक्की में कंधे से कंधा मिलाकर साथ रहने वाले कश्मीरी मुसलमान देश की बर्बादी के बजाय अमन चैन की राह पर लौट सके। सेना पर पथराव करने के अलावा उनके साथ मिलकर देश की हिफाजत कर सके। 13 मई 2017 को लिखे पत्र के जवाब में फतवा तो जारी नहीं किया गया। अलबता रिहान को इस गंभीर मुद्दे पर बातचीत के लिए देवबंद आने की दावत दी गई है।
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नगर के मोहल्ला कुरैशियान निवासी युवक रिहान कुरैशी ने दारुल उलूम देवबंद के उलेमा और फतवा विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि हिंदू समाज की आस्था का सम्मान करते हुए गोहत्या के खिलाफ जारी फतवे को बड़ी तादाद में मुस्लिम समाज द्वारा कबूला गया। उसके बाद अधिकांश मुस्लिम गोहत्या व गोमांस से परहेज करने लगे। जो एक सराहनीय कार्य था। मगर आज उससे भी बड़ा और खतरनाक मसला कश्मीर को लेकर चल रहा है। इससे आम मुसलमान परेशान हैं और पूरी कौम बदनाम हो रही है। वहां भारतीय फौज पर पत्थरबाजी करने वाले युवकों के कारण देशद्रोह को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में भटके हुए कश्मीरी मुसलमानों और युवाओं को समझाने के लिए उलेमा को आगे आने की आवश्यकता है। फतवा जारी कर कश्मीरी नौजवानों को मुख्य धारा में लाने के लिए पत्थरबाजी के खिलाफ फतवा जारी करने की आवश्यकता है, ताकि देश की आजादी व तरक्की में कंधे से कंधा मिलाकर साथ रहने वाले कश्मीरी मुसलमान देश की बर्बादी के बजाय अमन चैन की राह पर लौट सके। सेना पर पथराव करने के अलावा उनके साथ मिलकर देश की हिफाजत कर सके। 13 मई 2017 को लिखे पत्र के जवाब में फतवा तो जारी नहीं किया गया। अलबता रिहान को इस गंभीर मुद्दे पर बातचीत के लिए देवबंद आने की दावत दी गई है।
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