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देहरादून भेजा गया 50 लाख साल पुराना जीवाश्म
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वन दरोगा को जीवाश्मदेते वन सरंक्षक वीके जैन
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। शिवालिक वन प्रभाग के बादशाही बाग रेंज में मिला 50 लाख साल पुराना हाथी का जीवाश्म वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून भेज दिया गया है। शुक्रवार को वन संरक्षक वीके जैन ने जीवाश्म के साथ टीम को देहरादून के लिए रवाना किया। देहरादून के इंस्टीट्यूट में इस जीवाश्म पर गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा और डाइमेशन से लेकर क्लीनिंग भी की जाएगी।
सहारनपुर वन वृत और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया की ओर से छह महीने तक विशेष सर्वेक्षण किया गया था। सहारनपुर वन क्षेत्र के 33229 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब छह माह तक वन्य जीवों की कैमरा ट्रैप सहित अन्य विधियों से गणना की गई। कैमरा ट्रैप में ही पहली बार 50 से अधिक तेंदुओं की शिवालिक में मिलने की पुष्टि भी हुई। इसी दौरान मार्च माह में यह जीवाश्म बादशाही बाग रेंज से तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर डाठा सोत के पास मिला था। जून माह में मुख्य वन संरक्षक वीके जैन और अन्य अधिकारियों ने प्रेसवार्ता कर इस बारे में विस्तृत जानकारी दी थी। तब बताया गया था कि जीवाश्म हाथी के पूर्वज का है, दाईं ओर के जबड़े का है और करीब 50 लाख वर्ष पुराना है। वैज्ञानिक भाषा में इसे स्टेगोडॉन कहते हैं, जो वर्तमान में विलुप्त हो चुके हैं। उत्तर भारत में हाथी के पूर्वज का इतना पुराना जीवाश्म शायद ही कहीं मिला होगा।
उधर, शुक्रवार को मुख्य वन संरक्षक वीके जैन ने उक्त जीवाश्म वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून भेजने के लिए वन दरोगा वरुण ठाकुर और एक अन्य कर्मी को रवाना किया। मुख्य वन संरक्षक वीके जैन ने बताया कि इस जीवाश्म का गहन वैज्ञानिक अध्ययन वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून में होगा।
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सहारनपुर वन वृत और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया की ओर से छह महीने तक विशेष सर्वेक्षण किया गया था। सहारनपुर वन क्षेत्र के 33229 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब छह माह तक वन्य जीवों की कैमरा ट्रैप सहित अन्य विधियों से गणना की गई। कैमरा ट्रैप में ही पहली बार 50 से अधिक तेंदुओं की शिवालिक में मिलने की पुष्टि भी हुई। इसी दौरान मार्च माह में यह जीवाश्म बादशाही बाग रेंज से तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर डाठा सोत के पास मिला था। जून माह में मुख्य वन संरक्षक वीके जैन और अन्य अधिकारियों ने प्रेसवार्ता कर इस बारे में विस्तृत जानकारी दी थी। तब बताया गया था कि जीवाश्म हाथी के पूर्वज का है, दाईं ओर के जबड़े का है और करीब 50 लाख वर्ष पुराना है। वैज्ञानिक भाषा में इसे स्टेगोडॉन कहते हैं, जो वर्तमान में विलुप्त हो चुके हैं। उत्तर भारत में हाथी के पूर्वज का इतना पुराना जीवाश्म शायद ही कहीं मिला होगा।
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उधर, शुक्रवार को मुख्य वन संरक्षक वीके जैन ने उक्त जीवाश्म वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून भेजने के लिए वन दरोगा वरुण ठाकुर और एक अन्य कर्मी को रवाना किया। मुख्य वन संरक्षक वीके जैन ने बताया कि इस जीवाश्म का गहन वैज्ञानिक अध्ययन वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून में होगा।
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