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एमईआईएस बंद होने से वुड कार्विंग निर्यातकों को 50 करोड़ का झटका

Sat, 20 Feb 2021 12:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2021 12:11 AM IST
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50 million blow to wood carving exporters due to closure of MEIS
-- रविंद्र मिगलानी, निर्यातक एवं आईआईए चैप्टर चेयरमैन - फोटो : SAHARANPUR
एमईआईएस बंद होने से वुड कार्विंग निर्यातकों को 50 करोड़ का झटका
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सहारनपुर। वुड कार्विंग निर्यातकों के सामने कई चुनौतियां आ रही है। एक तरफ एमईआईएस (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम) बंद हो गई है तो नई योजना निर्यात उत्पादों पर शुल्क व कर छूट (रोडटेप) की पूरी जानकारी मिल नहीं रही है। पुरानी स्कीम एमईआईएस का रिफंड भी अटका हुआ है, जिससे सहारनपुर के वुड कार्विंग निर्यातकों को करीब 50 करोड़ रुपये का झटका लगा है। सहारनपुर से सालाना करीब 1000 करोड़ रुपये के वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात होता है। निर्यातकों की मांग है कि प्रोत्साहन योजना को लागू करने में प्रभावी कदम उठाए जाएं।
दरअसल, एमईआईएस (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम) 31 दिसंबर 2020 को बंद हो गई। जबकि उससे पहले करीब मार्च से ही इस स्कीम के तहत मिलने वाला रिफंड भी अटका हुआ था। एमईआईएस के जरिए निर्यातकों को कुल निर्यात पर पांच प्रतिशत छूट रिफंड के तौर पर मिलती थी जो फिलहाल नहीं मिल पा रही है। एमईआईएस बंद होने के बाद निर्यातकों को प्रोत्साहन देने के लिए एक जनवरी से नई स्कीम रोडटेप (उत्पादों पर शुल्क व कर छूट) आई। लेकिन निर्यातकोें को अभी इस स्कीम का पूरा ब्योरा तक पता नहीं है। निर्यातकों को पोर्टल पर भी इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है कि स्कीम में कितना लाभ मिलना है और किस तरह मिलना है। उससे निर्यातक पूरी तरह वाकिफ नहीं हो पा रहे हैं।
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प्रोत्साहन की कमी का यह भी प्रभाव
वुड कार्विंग कारोबार के सामने बड़ी चुनौती उन देशों से मिल रही है, जहां कारोबार को प्रोत्साहन के लिए काफी कारगर प्रयास किए जा रहे हैं। निर्यातकों की मानें तो सबसे बड़ी चुनौती वियतनाम, कंबोडिया, फिलिपींस से मिल रही है। इन देशों से बीते दस साल में वुड कार्विंग का निर्यात तेज हुआ है। उसकी वजह सरकार की तरफ से निर्यातकों और वहां के स्थानीय कारोबारियों को मिलने वाला प्रोत्साहन बताया जा रहा है। तकनीकी रूप से भी इनके सामने भारत के निर्यातक अभी पीछे हैं।
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वुड़ कार्विंग निर्यातकों की पीड़ा
पिछली स्कीम का रिफंड मिला नहीं और नई स्कीम पूरी तरह लागू नहीं हो पाई। इससे निर्यातकों के सामने हताशा बनी हुई है। पूर्व में डीजीएफटी (डायरेक्टर जनरल ऑफ फोरेन ट्रेड) को भी इस बारे में पत्र भेजा गया। -- रविंद्र मिगलानी, निर्यातक एवं आईआईए चैप्टर चेयरमैन
एक करोड़ रुपये के वुड़ कार्विंग उत्पादों का निर्यात करने पर एमईआईएस के तहत करीब पांच लाख रुपये रिफंड मिलता था। यह व्यवस्था दो दशक से चल रही थी, इसके बंद होने से निर्यातकों को नुकसान हुआ है। -- रामजी सुनेजा, निर्यातक।
वुड कार्विंग कारोबार की बेहतरी के लिए निर्यातकों को प्रोत्साहन मिलना आवश्यक है। केंद्र सरकार को प्रोत्साहन संबंधी किसी भी नई स्कीम को जारी करने के साथ उसे प्रभावी ढंग से लागू कराने में गंभीरता लानी होगी। -- ओसाफ गुड्डू, निर्यातक

मार्च के बाद से एमईआईएस का लाभ नहीं मिला। निर्यातकों के सामने चुनौतियां हैं, निर्यात में भी कमी आई है। दूसरे देशों में अच्छा प्रोत्साहन मिलने से वुड कार्विंग कारोबार अच्छी तरक्की कर रहा है और भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती बना है। -- परविंदर सिंह, निर्यातक

-  रामजी सुनेजा, वुड़ कार्विंग निर्यातक

- रामजी सुनेजा, वुड़ कार्विंग निर्यातक- फोटो : SAHARANPUR

- ओसाफ गुड्डू -- वुड़ कार्विंग निर्यातक

- ओसाफ गुड्डू -- वुड़ कार्विंग निर्यातक- फोटो : SAHARANPUR

-- परविंदर सिंह, वुड़ कार्विंग निर्यातक

-- परविंदर सिंह, वुड़ कार्विंग निर्यातक- फोटो : SAHARANPUR

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