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निरक्षर मां-पिता के बेटे ने लिखी सफलता कर इबारत
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सहारनपुर। यूपी बोर्ड की दसवीं कक्षा में सफलता पाने वाले अंकित के पिता किशोर कुमार और मां माया निरक्षर हैं, मगर अंकित ने कड़ी मेहनत के साथ सेल्फ स्टडी करते हुए दसवीं में 90.83 फीसदी अंकों के साथ जनपद में दूसरा स्थान हासिल किया है। अंकित को जनपद में दूसरा स्थान मिलने का पता तक नहीं था, जब अचानक से मीडियाकर्मी अंकित के घर पहुंचे और अंकित के बारे में परिजनों को बताया तो मां के आंसू छलक आए। अंकित बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जिनके पिता किशोर कुमार फर्नीचर पर पॉलिश करने का काम करते हैं।
अंकित का परिवार हबीबगढ़ में रहता है। एक संकरी सी गली में अंकित का आठ बाई 12 फुट का कच्चा मकान है। मकान पुराना होने की वजह से गली में पड़े खडंजे से करीब तीन फुट नीचे हो गया है। मकान के सामने बनी तीन फुट की गली में लकड़ी से जलने वाला चूल्हा रखा है और दूसरी साइड में हैंडपंप लगा है। पिता किशोर कुमार एक फैक्ट्री में लड़की पर पॉलिश करने का काम करते हैं, जबकि मां माया घर संभालती हैं। अंकित की दो छोटी बहने हैं, जिनमें से एक बहन अनु, अंकित के ही साथ दसवीं में पढ़ती थी और 77 फीसदी अंकों के साथ पास हुई है। छोटी बहन शिवानी सातवीं कक्षा में पढ़ती है। अंकित ने बताया कि गरीबी के कारण वह ट्यूशन नहीं ले सका। ऐसे में उसने अपनी खुद की तैयारी की। अंकित ने बताया उसे गणित विषय में 99 या 100 प्रतिशत अंक आने की उम्मीद थी, मगर यह नहीं पता था कि वह जिले में दूसरा स्थान पा जाएगा। उसने बताया कि मामा प्रदीप ने उन्हें फोन कर 90.83 अंकों के साथ पास होने की सूचना दी थी। मगर जिले में दूसरा स्थान आने का पता जब चला, जब मीडियाकर्मी घर पर पहुंचे। अंकित ने प्रतिदिन चार घंटे पढ़ाई कर सफलता पाई है। अंकित ने अपनी सफलता का श्रेय अपने मामा प्रदीप से मली गाइडेंस, प्रधानाचार्य सुमन शर्मा सभी शिक्षकों और माता-पिता के आशीर्वाद को दिया है। अंकित का सपना आईआईटी से बीटेक करने के बाद सिविल सेवा में जाने का है। अंकित कहते हैं कि वह डीएम बनकर समाज के नीचे के तबके के लिए काम करना चाहते हैं। उनका सपना है कि कोई भी बच्चे धन के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे। अंकित ने बताया कि उसके माता-पिता निरक्षर हैं मगर वह घर मकान बनाने की बजाय उन तीनों भाई-बहनों की पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं।
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अंकित का परिवार हबीबगढ़ में रहता है। एक संकरी सी गली में अंकित का आठ बाई 12 फुट का कच्चा मकान है। मकान पुराना होने की वजह से गली में पड़े खडंजे से करीब तीन फुट नीचे हो गया है। मकान के सामने बनी तीन फुट की गली में लकड़ी से जलने वाला चूल्हा रखा है और दूसरी साइड में हैंडपंप लगा है। पिता किशोर कुमार एक फैक्ट्री में लड़की पर पॉलिश करने का काम करते हैं, जबकि मां माया घर संभालती हैं। अंकित की दो छोटी बहने हैं, जिनमें से एक बहन अनु, अंकित के ही साथ दसवीं में पढ़ती थी और 77 फीसदी अंकों के साथ पास हुई है। छोटी बहन शिवानी सातवीं कक्षा में पढ़ती है। अंकित ने बताया कि गरीबी के कारण वह ट्यूशन नहीं ले सका। ऐसे में उसने अपनी खुद की तैयारी की। अंकित ने बताया उसे गणित विषय में 99 या 100 प्रतिशत अंक आने की उम्मीद थी, मगर यह नहीं पता था कि वह जिले में दूसरा स्थान पा जाएगा। उसने बताया कि मामा प्रदीप ने उन्हें फोन कर 90.83 अंकों के साथ पास होने की सूचना दी थी। मगर जिले में दूसरा स्थान आने का पता जब चला, जब मीडियाकर्मी घर पर पहुंचे। अंकित ने प्रतिदिन चार घंटे पढ़ाई कर सफलता पाई है। अंकित ने अपनी सफलता का श्रेय अपने मामा प्रदीप से मली गाइडेंस, प्रधानाचार्य सुमन शर्मा सभी शिक्षकों और माता-पिता के आशीर्वाद को दिया है। अंकित का सपना आईआईटी से बीटेक करने के बाद सिविल सेवा में जाने का है। अंकित कहते हैं कि वह डीएम बनकर समाज के नीचे के तबके के लिए काम करना चाहते हैं। उनका सपना है कि कोई भी बच्चे धन के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे। अंकित ने बताया कि उसके माता-पिता निरक्षर हैं मगर वह घर मकान बनाने की बजाय उन तीनों भाई-बहनों की पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं।
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