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तीन, पांच या दस दिन नहीं बल्कि पूरे महीने की होती है तरावीह: फारुकी
Updated Fri, 25 May 2018 12:36 AM IST
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तीन, पांच या दस दिन नहीं बल्कि पूरे महीने की होती है तरावीह: फारुकी
देवबंद (सहारनपुर)। मुकद्दस रमजान माह में अलग अलग दिन की तरावीह में कुरआन पाक सुनने को लेकर फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि तरावीह तीन, पांच या फिर दस दिन की नहीं बल्कि पूरे महीने के लिए होती है। जो लोग पूरे महीने की तरावीह पढ़ते हैं अल्लाह उनके पिछले सभी गुनाहों को माफ कर देता है।
बताया कि जरूरी है कि मुकद्दस रमजान माह की पहली रात से आखिरी रात तक तरावीह पढे़ और बड़े ही ध्यान से कुरआन के एक-एक अलफाज को सुने। कहा कि तरावीह के संबंध में कुछ लोगों का मानना है कि तीन, पांच, सात या फिर दस दिन में तरावीह में कुरआन सुन लेना ही काफी है और उसके बाद वे बेफिक्र हो जाते हैं। लेकिन शायद उन्हें ये मालूम नहीं कि कुरआन पूरा हो जाने से तरावीह पूरी नहीं हो जाती। इसलिए जो लोग महीने से भी कम समय में कुरआन पूरा कर लेते हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वो पूरे महीने तरावीह पढ़े। मुफ्ती अरशद ने कहा कि जो लोग कारोबार या अन्य व्यस्तता के चलते एक मस्जिद या एक स्थान पर तरावीह की पाबंदी नहीं कर सकते तो वह कुछ शर्तों के साथ तीन, पांच, सात या फिर दस दिन की तरावीह पढ़ सकते हैं। लेकिन जरूरी है कि जहां कहीं भी वे जाएं तरावीह का सिलसिला जारी रखें।
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देवबंद (सहारनपुर)। मुकद्दस रमजान माह में अलग अलग दिन की तरावीह में कुरआन पाक सुनने को लेकर फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि तरावीह तीन, पांच या फिर दस दिन की नहीं बल्कि पूरे महीने के लिए होती है। जो लोग पूरे महीने की तरावीह पढ़ते हैं अल्लाह उनके पिछले सभी गुनाहों को माफ कर देता है।
बताया कि जरूरी है कि मुकद्दस रमजान माह की पहली रात से आखिरी रात तक तरावीह पढे़ और बड़े ही ध्यान से कुरआन के एक-एक अलफाज को सुने। कहा कि तरावीह के संबंध में कुछ लोगों का मानना है कि तीन, पांच, सात या फिर दस दिन में तरावीह में कुरआन सुन लेना ही काफी है और उसके बाद वे बेफिक्र हो जाते हैं। लेकिन शायद उन्हें ये मालूम नहीं कि कुरआन पूरा हो जाने से तरावीह पूरी नहीं हो जाती। इसलिए जो लोग महीने से भी कम समय में कुरआन पूरा कर लेते हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वो पूरे महीने तरावीह पढ़े। मुफ्ती अरशद ने कहा कि जो लोग कारोबार या अन्य व्यस्तता के चलते एक मस्जिद या एक स्थान पर तरावीह की पाबंदी नहीं कर सकते तो वह कुछ शर्तों के साथ तीन, पांच, सात या फिर दस दिन की तरावीह पढ़ सकते हैं। लेकिन जरूरी है कि जहां कहीं भी वे जाएं तरावीह का सिलसिला जारी रखें।
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