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मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक बिल काला बिल है: आमना
Updated Thu, 22 Mar 2018 12:48 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य आमना रिजवान ने किया कि तीन तलाक बिल मुस्लिम महिलाओं के लिए काला बिल है। जो उनके और बच्चों के भविष्य को तबाह व बरबाद कर देगा।
बुधवार को ईदगाह रोड स्थित हीरा गार्डन में माहद आयशा सिद्दीका कासिमुल उलूम लिलबनात की ओर से तहाफ्फुज-ए-शरीयत कांफ्रेंस शीर्षक से आयोजित कार्यक्रम में आमना रिजवान ने कहा कि इस्लाम मजहब ने मुस्लिम महिलाओं को शिक्षा का हक आज से 1400 वर्ष पहले दे दिया था। आज उन्नीसवीं सदी में जाकर अपने आपको बड़ा कहने वाली कौमों ने यह हक महिलाओं को अब दिया है। उन्होंने लोकसभा में पारित हुए तीन तलाक बिल पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये बिल सरासर जुल्म और नाइंसाफी को जन्म देने वाला है। क्योंकि बिल के मुताबिक तलाक नहीं होगी और शौहर जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया जाएगा। ऐसे में बीवी घर के खर्चे के लिए दर-दर की ठोकरें खाती रहेगी और उसके बच्चों का भविष्य भी खत्म हो जाएगा। संस्था की प्रधानाचार्य इफ्फत नदीम ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि पूर्व में माहद आयशा सिद्दीका की छात्राओं ने मुफ्ती यासिर नदीम की आवाज पर शांतिपूर्वक विरोध किया और दीन व देश के दुश्मन शख्स तारिक फतेह को मुल्क से निकलने पर मजबूर कर दिया था। अब जब तीन तलाक बिल लोकसभा में पेश किया गया तो हमने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ऐलान का समर्थन करते हुए इसके विरोध में आवाज बुलंद की। जिसके तहत विभिन्न राज्यों और जिलों में 100 से अधिक कार्यक्रम किए और महिलाओं को तीन तलाक के मामले में जागरूक किया। संचालन सना शाहिद व तुबा अब्दुल्ला मारुफी ने संयुक्त रुप से किया। इस मौके पर फरहीन, सायमा आलम, तहसीन शीबा, गुलअफशां, शीबा जमील, सदफ सनाउलहक, सफिया सईदुर्रहमान, हामदा, नर्गिंस यामीन, जीनत, जुबैदा आदि महिलाएं मौजूद रहीं।
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बुधवार को ईदगाह रोड स्थित हीरा गार्डन में माहद आयशा सिद्दीका कासिमुल उलूम लिलबनात की ओर से तहाफ्फुज-ए-शरीयत कांफ्रेंस शीर्षक से आयोजित कार्यक्रम में आमना रिजवान ने कहा कि इस्लाम मजहब ने मुस्लिम महिलाओं को शिक्षा का हक आज से 1400 वर्ष पहले दे दिया था। आज उन्नीसवीं सदी में जाकर अपने आपको बड़ा कहने वाली कौमों ने यह हक महिलाओं को अब दिया है। उन्होंने लोकसभा में पारित हुए तीन तलाक बिल पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये बिल सरासर जुल्म और नाइंसाफी को जन्म देने वाला है। क्योंकि बिल के मुताबिक तलाक नहीं होगी और शौहर जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया जाएगा। ऐसे में बीवी घर के खर्चे के लिए दर-दर की ठोकरें खाती रहेगी और उसके बच्चों का भविष्य भी खत्म हो जाएगा। संस्था की प्रधानाचार्य इफ्फत नदीम ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि पूर्व में माहद आयशा सिद्दीका की छात्राओं ने मुफ्ती यासिर नदीम की आवाज पर शांतिपूर्वक विरोध किया और दीन व देश के दुश्मन शख्स तारिक फतेह को मुल्क से निकलने पर मजबूर कर दिया था। अब जब तीन तलाक बिल लोकसभा में पेश किया गया तो हमने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ऐलान का समर्थन करते हुए इसके विरोध में आवाज बुलंद की। जिसके तहत विभिन्न राज्यों और जिलों में 100 से अधिक कार्यक्रम किए और महिलाओं को तीन तलाक के मामले में जागरूक किया। संचालन सना शाहिद व तुबा अब्दुल्ला मारुफी ने संयुक्त रुप से किया। इस मौके पर फरहीन, सायमा आलम, तहसीन शीबा, गुलअफशां, शीबा जमील, सदफ सनाउलहक, सफिया सईदुर्रहमान, हामदा, नर्गिंस यामीन, जीनत, जुबैदा आदि महिलाएं मौजूद रहीं।
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