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बजट ने उच्च वर्गीय परिवार का भी बजट बिगड़ा
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:33 AM IST
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सहारनपुर। बजट ने आम ही नहीं खास वर्ग के भी परिवार का बजट बिगड़ा है। जेवी जैन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संदीप गुप्ता और उनका परिवार बजट से खुश नहीं है। परिवार का मानना है कि यदि सरकार बुनियादी जरूरतों की वस्तुओं के दाम कम नहीं कर सकती थी तो बढ़ाने भी नहीं चाहिएं थे।
हकीकतनगर में रहने वाले डॉ. संदीप गुप्ता की पत्नी ने बताया कि उन्होंने पेट्रोल के बढ़ते दाम को देखते हुए पेट्रोल की गाड़ी बेचकर डीजल की कार खरीदी थी। मगर वर्तमान में डीजल के दाम पेट्रोल के बराबर पहुंच गए हैं, जबकि विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम इससे बिल्कुल आधे बताए जा रहे हैं। श्रृंगार का सामान जैसे क्रीम, पाउडर, लिपिस्टिक आदि भी महंगी कर दी गई हैं। खाने पीने की वस्तुओं जैसे आटा, दाल, चावल यहां तक कि होटल और रेस्टोरेंट का खाना भी महंगा कर दिया गया है। एक तरफर सरकार ऑनलाइन और कैशलेस सिस्टम केे बढ़ावा दे रही है, वहीं स्मार्ट फोन और कंप्यूटर आदि के दाम बढ़ाकर उन्हें आम आदमी की पहुंच से दूर किया जा रहा है। बजट पूरी तरह निराश करने वाला है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि का कहना है कि बजट से आम आदमी को लाभ कम और नुकसान ज्यादा हुआ है।
अर्थ शास्त्री भी हुए निराश
सहारनपुर। जेवी जैन कॉलेज के अर्थ शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरवीर सिंह का कहना है कि टैक्स लिमिट ढाई लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर कम से कम तीन लाख किया जाना चाहिए था। यानी सालाना तीन लाख तक कमाई टेक्स फ्री होनी चाहिए। जो पांच फीसदी टेक्स लगता है वह भी साढ़े तीन से पांच लाख तक की इनकम पर लगना चाहिए। एटीसी की लिमिट भी डेढ लाख से बढ़ाकर ढाई लाख करने की मांग उठ रही थी, मगर उसे भी नजर अंदाज किया गया है।
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हकीकतनगर में रहने वाले डॉ. संदीप गुप्ता की पत्नी ने बताया कि उन्होंने पेट्रोल के बढ़ते दाम को देखते हुए पेट्रोल की गाड़ी बेचकर डीजल की कार खरीदी थी। मगर वर्तमान में डीजल के दाम पेट्रोल के बराबर पहुंच गए हैं, जबकि विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम इससे बिल्कुल आधे बताए जा रहे हैं। श्रृंगार का सामान जैसे क्रीम, पाउडर, लिपिस्टिक आदि भी महंगी कर दी गई हैं। खाने पीने की वस्तुओं जैसे आटा, दाल, चावल यहां तक कि होटल और रेस्टोरेंट का खाना भी महंगा कर दिया गया है। एक तरफर सरकार ऑनलाइन और कैशलेस सिस्टम केे बढ़ावा दे रही है, वहीं स्मार्ट फोन और कंप्यूटर आदि के दाम बढ़ाकर उन्हें आम आदमी की पहुंच से दूर किया जा रहा है। बजट पूरी तरह निराश करने वाला है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि का कहना है कि बजट से आम आदमी को लाभ कम और नुकसान ज्यादा हुआ है।
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अर्थ शास्त्री भी हुए निराश
सहारनपुर। जेवी जैन कॉलेज के अर्थ शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरवीर सिंह का कहना है कि टैक्स लिमिट ढाई लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर कम से कम तीन लाख किया जाना चाहिए था। यानी सालाना तीन लाख तक कमाई टेक्स फ्री होनी चाहिए। जो पांच फीसदी टेक्स लगता है वह भी साढ़े तीन से पांच लाख तक की इनकम पर लगना चाहिए। एटीसी की लिमिट भी डेढ लाख से बढ़ाकर ढाई लाख करने की मांग उठ रही थी, मगर उसे भी नजर अंदाज किया गया है।
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