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कचरे से पाट दिया तालाब
Updated Mon, 15 Jan 2018 11:53 PM IST
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सहारनपुर। जनपद में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। यही वजह है कि पानी को रिचार्ज करने के लिए शासन और प्रशासन लगातार तालाबों और पोखरों को कब्जा मुक्त कराकर पुनर्जीवित करने में जुटे हैं। मगर नगर निगम सहारनपुर तालाबों के अस्तित्व को खत्म करने में जुटा है। ताजा मामला बेहट रोड का है, जहां 50 साल से अधिक पुराने तालाब को नगर निगम ने कचरे से पाट दिया है। अब भी लगातार वहां कचरे के ट्रक खाली किए जा रहे हैं। तालाब को पाट देने से स्थानीय लोग नाराज हैं।
बेहट रोड स्थित गांव गोपालपुर के पास पुलिया से उतरते ही बाई ओर करीब तीन बीघा जमीन पर पुराना तालाब है। तालाब में 12 महीने पानी रहता है। पिछले करीब चार दिन से नगर निगम प्रशासन इस तालाब को पाटने में जुटा है। तालाब का करीब आधा हिस्सा कचरे से पाट दिया गया है। तालाब को पाटने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। नाराजगी की एक वजह कचरा भी है। लोगों का कहना है कि कचरे से उठने वाली दुर्गंध उन्हें परेशान कर रही है, जिसकी वजह से बीमारियां फैलने का खतरा बन रहा है। इसके अलावा इस मार्ग पर मां शाकंभरी देवी सिद्धपीठ और साईं बाबा की सिद्धपीठ भी है। जहां जाने वाले श्रद्धालुओं को कचरे से परेशानी हो रही है।
तालाब नहीं, पुलिस विभाग की है जमीन
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गीताराम ने बताया कि जिस जगह को लोग तालाब बता रहे हैं वह तालाब नहीं है। लोगों ने अपनी जरूरत के लिए समय-समय पर मिट्टी निकाली, जिसकी वजह से वह बड़ा गड्ढा बन गया और उसमें पानी जमा रहने लगा। बताया कि वह पुलिस विभाग की जमीन है, जिसपर देहात कोतवाली बनाई जानी है। पुलिस के कहने पर ही गड्ढे को कचरे से भरा जा रहा है।
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बेहट रोड स्थित गांव गोपालपुर के पास पुलिया से उतरते ही बाई ओर करीब तीन बीघा जमीन पर पुराना तालाब है। तालाब में 12 महीने पानी रहता है। पिछले करीब चार दिन से नगर निगम प्रशासन इस तालाब को पाटने में जुटा है। तालाब का करीब आधा हिस्सा कचरे से पाट दिया गया है। तालाब को पाटने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। नाराजगी की एक वजह कचरा भी है। लोगों का कहना है कि कचरे से उठने वाली दुर्गंध उन्हें परेशान कर रही है, जिसकी वजह से बीमारियां फैलने का खतरा बन रहा है। इसके अलावा इस मार्ग पर मां शाकंभरी देवी सिद्धपीठ और साईं बाबा की सिद्धपीठ भी है। जहां जाने वाले श्रद्धालुओं को कचरे से परेशानी हो रही है।
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तालाब नहीं, पुलिस विभाग की है जमीन
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गीताराम ने बताया कि जिस जगह को लोग तालाब बता रहे हैं वह तालाब नहीं है। लोगों ने अपनी जरूरत के लिए समय-समय पर मिट्टी निकाली, जिसकी वजह से वह बड़ा गड्ढा बन गया और उसमें पानी जमा रहने लगा। बताया कि वह पुलिस विभाग की जमीन है, जिसपर देहात कोतवाली बनाई जानी है। पुलिस के कहने पर ही गड्ढे को कचरे से भरा जा रहा है।
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