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Saharanpur News: जिले में अत्यंत कुपोषित बच्चे 4058, अस्पताल में बेड मात्र 10

Mon, 13 May 2024 01:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Mon, 13 May 2024 01:36 AM IST
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4058 extremely malnourished children in the district, only 10 beds in the hospital
सहारनपुर। जिले में तमाम कवायद के बावजूद कुपोषण से बच्चों को बचाने के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के सर्वे में 4058 अत्यंत कुपोषित बच्चे मिले हैं। इनको तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है, लेकिन जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में मात्र इन बच्चों के लिए दस बेड ही आरक्षित हैं। ऐसे में कुपोषण का दंश कैसे दूर हो पाएगा।
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जिले में वर्तमान में हुए सर्वे में अत्यंत कुपोषित बच्चे 4058 हैं, जबकि कुपोषित बच्चों की संख्या 12199 हैं। कुपोषित बच्चों को दवाओं और पुष्टाहार के जरिये स्थिति में सुधार हो जाता है, जबकि अत्यंत कुपोषित बच्चों से 10 से 15 दिन जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र भर्ती कर इलाज दिलाकर अत्यंत कुपोषित श्रेणी से बाहर लाया जाता है। इसके बाद उनको दवाओं और पुष्टाहार के जरिये स्वस्थ बनाने की कवायद होती है। मगर, इतनी संख्या में बच्चे कुपोषित होने के कारण इनके लिए इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। क्योंकि, पोषण पुनर्वास केंद्र में मात्र दस बैड ही आरक्षित हैं।
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- अभिभावक भी करते हैं अनदेखी
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा अत्यंत कुपोषित बच्चों को इलाज दिलाने के लिए अभिभावकों को जागरूक किया जाता है, लेकिन बड़ी संख्या में अभिभावक भी लापरवाही दिखाते हैं, जो बच्चों को इलाज दिलाने में रुचि नहीं दिखाते हैं। ऐसे में बच्चे अत्यंत कुपोषित श्रेणी से जल्दी बाहर नहीं आ पाते हैं।
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--- कुपोषण के लक्षण
- जन्म के समय दो किलो से कम वजन होना

- बच्चे में चिड़चिड़ापन और सुस्ती रहना
- बार-बार बीमारियों की चपेट में आना
- बच्चे में उम्र के साथ वजन न बढ़ना
- कई बच्चे ऐसे होते हैं, जो खाया पिया नहीं पचा पाते
-- इस तरह करें बचाव और बरतें सावधानी
- रोगों से बचाने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
- नौ माह की आयु तक बच्चे को मां अपना दूध पिलाएं
- जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे रोज तीन कप दूध दें
- रोजाना दो कटोरी दाल और दलिया दिया जाए

- बच्चे को उबला हुआ पानी ठंडा कर पिलाएं
-- वर्जन : अत्यंत कुपोषित बच्चों को समुचित उपचार दिलाया जाता है। इसमें अभिभावकों को भी गंभीरता दिखानी चाहिए। सही देखभाल से बच्चा जल्दी ही कुपोषण की श्रेणी से बाहर आ जाता है। विभाग समय-समय पर केंद्रों पर बच्चों वजन तोलने के अलावा चेकअप भी कराता है। - नंदलाल प्रसाद, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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