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...जो दिलों में दूरियां हैं उन्हें किस तरह मिटाऊं
Updated Fri, 05 Oct 2018 12:27 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश नागरिक एकता मंच की ओर से एक शाम शायर तनवीर अजमल के नाम मुशायरे वह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने उम्दा कलाम पेश कर श्रोताओं से जमकर दाद बटोरी।
बुधवार की रात्रि मोहल्ला खानकाह में आयोजित हुए कार्यक्रम का उद्घाटन अपना विचार मंच के अध्यक्ष नजम उस्मानी ने फीता काटकर और फैसल नूर शब्बू ने शमा रोशन कर किया। उस्ताद शायर शमीम किरतपुरी ने कहा..अभी कुछ मसलहतें हैं इसलिए खामोश बैठे हैं, वरना वार करने को तो हम पुरजोश बैठे हैं। सलीम उस्मानी तन्हा ने कहा..मैं तुमको देख के खुद को तलाश करता हूं, तुम्हारी आंखों में तहरीर जो मेरी है। दिलशाद खुशतर ने कुछ यूं कहा..अच्छाई को तुम आज कहां ढूंढ रहे हो, पहले ही दुनिया में खुराफात बहुत है। बलराज मलिक ने पढ़ा..मैं मोहब्बतों के नगमे किसे जाके अब सुनाऊं, जो दिलों में दूरियां हैं उन्हें किस तरह मिटाऊं। डा. शमीम देवबंदी ने पढ़ा..सिर्फ आंसू थे कोरे कागज पर, मेरे खत का जवाब अच्छा था। सलमान दिलकश ने कुछ यूं कहा..नफरतों के सौदागर अपनी मौत मर जाएं, इस कदर मोहब्बत को बांट दो जमाने में। नईम अख्तर ने कहा..तेरे दीदार की हसरत में चले आते हैं, हम ही पागल हैं मोहब्बत में चले आते हैं। अदनान अनवर ने कहा..दिल धड़कता है तेरे आने पे जाने क्यूं कर, सब्र और जब्त का मयार कहा से लाऊं। युवा शायर वली वकास ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए..कयामत खैज थी मुझ पर जुदाई मां के आंचल से, वो दुनिया थी मेरी जिसको सुपूर्द-ए-खाक कर डाला। तनवीर अमजल ने कहा..क्या खबर थी परदेसी इस तरह से जाएगा, दे गया मोहब्बत में गम हजार आंखों को। इनके अलावा असीम उस्मानी, नफीस अहमद, चांद देवबंदी, सुहैल अकमल ने भी अपना कलाम पेश किया। कार्यक्रम के संयोजक मो. सलीम उस्मानी व असीम उस्मानी ने शायर तनवीर अजमल, नजम उस्मानी, फैसल नूर शब्बू और डा. शमशाद अहमद को सम्मानित किया। इस मौके पर सैय्यद हारिस, जीशान नजमी, वजाहत अनवर, असलम, मौ. दानिश आदि मौजूद रहे।
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बुधवार की रात्रि मोहल्ला खानकाह में आयोजित हुए कार्यक्रम का उद्घाटन अपना विचार मंच के अध्यक्ष नजम उस्मानी ने फीता काटकर और फैसल नूर शब्बू ने शमा रोशन कर किया। उस्ताद शायर शमीम किरतपुरी ने कहा..अभी कुछ मसलहतें हैं इसलिए खामोश बैठे हैं, वरना वार करने को तो हम पुरजोश बैठे हैं। सलीम उस्मानी तन्हा ने कहा..मैं तुमको देख के खुद को तलाश करता हूं, तुम्हारी आंखों में तहरीर जो मेरी है। दिलशाद खुशतर ने कुछ यूं कहा..अच्छाई को तुम आज कहां ढूंढ रहे हो, पहले ही दुनिया में खुराफात बहुत है। बलराज मलिक ने पढ़ा..मैं मोहब्बतों के नगमे किसे जाके अब सुनाऊं, जो दिलों में दूरियां हैं उन्हें किस तरह मिटाऊं। डा. शमीम देवबंदी ने पढ़ा..सिर्फ आंसू थे कोरे कागज पर, मेरे खत का जवाब अच्छा था। सलमान दिलकश ने कुछ यूं कहा..नफरतों के सौदागर अपनी मौत मर जाएं, इस कदर मोहब्बत को बांट दो जमाने में। नईम अख्तर ने कहा..तेरे दीदार की हसरत में चले आते हैं, हम ही पागल हैं मोहब्बत में चले आते हैं। अदनान अनवर ने कहा..दिल धड़कता है तेरे आने पे जाने क्यूं कर, सब्र और जब्त का मयार कहा से लाऊं। युवा शायर वली वकास ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए..कयामत खैज थी मुझ पर जुदाई मां के आंचल से, वो दुनिया थी मेरी जिसको सुपूर्द-ए-खाक कर डाला। तनवीर अमजल ने कहा..क्या खबर थी परदेसी इस तरह से जाएगा, दे गया मोहब्बत में गम हजार आंखों को। इनके अलावा असीम उस्मानी, नफीस अहमद, चांद देवबंदी, सुहैल अकमल ने भी अपना कलाम पेश किया। कार्यक्रम के संयोजक मो. सलीम उस्मानी व असीम उस्मानी ने शायर तनवीर अजमल, नजम उस्मानी, फैसल नूर शब्बू और डा. शमशाद अहमद को सम्मानित किया। इस मौके पर सैय्यद हारिस, जीशान नजमी, वजाहत अनवर, असलम, मौ. दानिश आदि मौजूद रहे।
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