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जर्जर भवनों में रहने वाले 400 परिवारों पर मंडराया खतरा
Updated Wed, 04 Jul 2018 12:25 AM IST
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जर्जर इमारतों पर फिर खतरा, रहते हैं 400 परिवार
सहारनपुर। बरसात शुरू होते ही शहर में खड़ी प्राचीन और जर्जर इमारतों और उनमें बसे करीब 400 परिवारों की जिंदगी पर खतरा मंडराने लगा है। नगर निगम उक्त इमारतों को गिराने की कार्रवाई के लिए सर्वे कर चुका है। मगर कार्रवाई अभी तक नहीं हो सकी है। ऐसे में पिछले पांच साल से लोग इन जर्जर इमारतों में दबकर जान गंवाते आ रहे हैं।
ऐतिहासिक शहर होने की वजह से सहारनपुर में मुगलों और अंग्रेजों के जमाने की अनेक इमारतें खड़ी हैं। शहर में इन इमारतों की संख्या 150 से अधिक बताई जा रही हैं। एक-एक इमारत में तीन से चार परिवार वर्षों से रहते आ रहे हैं। शहर के बीचोंबीच होने की वजह से कोई भी व्यक्ति इन इमारतों से कब्जा नहीं छोड़ना चाहता है। अनेक इमारतों की हालत ऐसी है कि उनके हिस्से बरसात के दिनों में लगातार टूटकर गिर रहे हैं, मगर उनमें बसे परिवार छोड़ने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले पांच साल में डेढ़ दर्जन से अधिक लोग जर्जर इमारतों में दबकर अपनी जिंदगी गवा चुके हैं।
चार वर्ष पहले मां-बेटा समेत तीन लोगों की इमारत में दबकर मौत हो गई थी। तीन साल पहले मानकमऊ में जर्जर मकान की छत गिरने से बच्चों की मौत हुई थी। हिरन मारान में भी तीन साल पहले जर्जर इमारत की बैठ जाने से उनमें काम कर रहे आठ मजदूर दब गए थे। लगातार होदसे होने और लोगों की जान जाने से भी जर्जर इमारतों में कब्जा जमाए बैठे लोग सबक नहीं ले पा रहे हैं। नगर निगम ने तीन साल पहले जर्जर इमारतों को चिन्हित कर गिराने का निर्णय लिया था। डेढ सौ से अधिक इमारतें चिन्हित की गईं थीं, जिनमें कुछ नई बनी हुई भी थीं। मगर नगर निगम अभी तक एक भी इमारत पर कार्रवाई नहीं कर सका है। अब बरसात शुरू हो चुकी है, जिसके साथ ही इमारतों पर फिर से खतरा मंडराने लगा है।
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कोर्ट में विचाराधीन हैं इमारतों के मामले
इमारतें शहर के बीचोंबीच होने तथा इन इमारतों में पुश्तों से रहने की वजह से कोई भी व्यक्ति कब्जा नहीं छोड़ रहा है। इतना ही नहीं, इमारतों पर कब्जे को लेकर इनमें रह रहे परिवारों के बीच कोर्ट में वाद भी चल रहे हैं। नगर निगम द्वारा कार्रवाई से हाथ खींचने की मुख्य वजह भी यही माना जा रहा है।
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शहर में जितने भी जर्जर भवन हैं, उनका दोबारा सर्वे कराया जाएगा और जरूरी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम का मुख्य उद्देश्य जर्जर भवनों के गिरने से होने वाली जान और माल की हानि को रोकना है। इसके लिए जो भी संभव होगा कदम उठाए जाएंगे।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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सहारनपुर। बरसात शुरू होते ही शहर में खड़ी प्राचीन और जर्जर इमारतों और उनमें बसे करीब 400 परिवारों की जिंदगी पर खतरा मंडराने लगा है। नगर निगम उक्त इमारतों को गिराने की कार्रवाई के लिए सर्वे कर चुका है। मगर कार्रवाई अभी तक नहीं हो सकी है। ऐसे में पिछले पांच साल से लोग इन जर्जर इमारतों में दबकर जान गंवाते आ रहे हैं।
ऐतिहासिक शहर होने की वजह से सहारनपुर में मुगलों और अंग्रेजों के जमाने की अनेक इमारतें खड़ी हैं। शहर में इन इमारतों की संख्या 150 से अधिक बताई जा रही हैं। एक-एक इमारत में तीन से चार परिवार वर्षों से रहते आ रहे हैं। शहर के बीचोंबीच होने की वजह से कोई भी व्यक्ति इन इमारतों से कब्जा नहीं छोड़ना चाहता है। अनेक इमारतों की हालत ऐसी है कि उनके हिस्से बरसात के दिनों में लगातार टूटकर गिर रहे हैं, मगर उनमें बसे परिवार छोड़ने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले पांच साल में डेढ़ दर्जन से अधिक लोग जर्जर इमारतों में दबकर अपनी जिंदगी गवा चुके हैं।
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चार वर्ष पहले मां-बेटा समेत तीन लोगों की इमारत में दबकर मौत हो गई थी। तीन साल पहले मानकमऊ में जर्जर मकान की छत गिरने से बच्चों की मौत हुई थी। हिरन मारान में भी तीन साल पहले जर्जर इमारत की बैठ जाने से उनमें काम कर रहे आठ मजदूर दब गए थे। लगातार होदसे होने और लोगों की जान जाने से भी जर्जर इमारतों में कब्जा जमाए बैठे लोग सबक नहीं ले पा रहे हैं। नगर निगम ने तीन साल पहले जर्जर इमारतों को चिन्हित कर गिराने का निर्णय लिया था। डेढ सौ से अधिक इमारतें चिन्हित की गईं थीं, जिनमें कुछ नई बनी हुई भी थीं। मगर नगर निगम अभी तक एक भी इमारत पर कार्रवाई नहीं कर सका है। अब बरसात शुरू हो चुकी है, जिसके साथ ही इमारतों पर फिर से खतरा मंडराने लगा है।
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कोर्ट में विचाराधीन हैं इमारतों के मामले
इमारतें शहर के बीचोंबीच होने तथा इन इमारतों में पुश्तों से रहने की वजह से कोई भी व्यक्ति कब्जा नहीं छोड़ रहा है। इतना ही नहीं, इमारतों पर कब्जे को लेकर इनमें रह रहे परिवारों के बीच कोर्ट में वाद भी चल रहे हैं। नगर निगम द्वारा कार्रवाई से हाथ खींचने की मुख्य वजह भी यही माना जा रहा है।
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शहर में जितने भी जर्जर भवन हैं, उनका दोबारा सर्वे कराया जाएगा और जरूरी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम का मुख्य उद्देश्य जर्जर भवनों के गिरने से होने वाली जान और माल की हानि को रोकना है। इसके लिए जो भी संभव होगा कदम उठाए जाएंगे।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।