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बिना सुरक्षा पटरी पर दौड़ रही स्पेशल ट्रेने
Updated Tue, 03 Jul 2018 12:13 AM IST
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सहारनपुर। पाटलिपुत्र सुपरफास्ट एक्सप्रेस में शुक्रवार को हुई डकैती की घटना ने साप्ताहिक ट्रेनों में सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैैं। इस रूट पर बिना सुरक्षा कर्मियों के ही साप्ताहिक एवं स्पेशल ट्रेनें दौड़ रहीं हैं। यही नहीं कई पैसेंजर ट्रेनों में भी सुरक्षा कर्मी तैनात नहीं किए गए हैं। जिससे यात्रियों के साथ ट्रेनों में लूट, चोरी एवं झपटमारी की घटनाएं घटित हो रहीं हैं। सिर्फ पाटलीपुत्र ही नहीं सहारनपुर से होकर गुजरने वाली अधिकांश साप्ताहिक सुपरफास्ट एवं स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा रामभरोसे है। सुपरफास्ट एवं एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में जीआरपी और आरपीएफ की तैनाती नहीं है। इसी का फायदा उठाकर बदमाश घटना को अंजाम देकर जंगल में ट्रेनों को चेन पुलिंग कर रुकवा लेते हैं और घटना को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। सहारनपुर से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में लूटपाट, चोरी, झपटमारी की घटनाएं लगातार हो रहीं हैं। सहारनपुर से होकर गुजरने वाली कई पैसेंजर ट्रेनों में भी जीआरपी अथवा आरपीएफ का कर्मचारी नहीं होता। सहारनपुर से रात आठ बजे जाने वाली अंबाला-मेरठ पैसेंजर के तो घटना के डर पीछे के डिब्बों को खाली कराकर यात्रियों को आगे के डिब्बों में बैठाया जाता है।
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आगे दूर जाकर स्टेशन पर ही देनी पड़ रही है रिपोर्ट
साप्ताहिक एवं स्पेशल ट्रेनों में पुलिसकर्मी के न होने से यात्री अपने साथ हुई घटना की सूचना भी नहीं दे पा रहे हैं। इसका कारण है कि सुपरफास्ट ट्रेनें सिर्फ बड़े स्टेशनों पर ही रुकतीं हैं। ऐसे में पीड़ित अगले किसी बड़े स्टेशन पर पहुंचने पर ही पुलिस को सूचना दे पाते हैं। पाटलीपुत्र अंबाला के बाद सहारनपुर ही रुकती है। जबकि घटना जगाधरी के पास हुई। एक दर्जन यात्री एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे, लेकिन ट्रेन कुछ ही मिनट रुकी, इसलिए सिर्फ एक यात्री ही एफआईआर दर्ज करा सका। जबकि दूसरे यात्रियों ने मुगलसराय पहुंचकर लूट की एफआईआर दर्ज कराई थी।
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सहारनपुर से निकलतीं हैं 19 साप्ताहिक ट्रेनें
सहारनपुर से होकर 19 साप्ताहिक ट्रेनें गुजरती हैं। ये ट्रेनें सप्ताह में सिर्फ एक बार ही सहारनपुर पहुंचतीं हैं। जबकि सप्ताह में तीन से चार ट्रेनें स्पेशल गुजरतीं हैं। इसके अलावा कुछ ट्रेनें सप्ताह में दो बार और कुछ ट्रेनें सप्ताह में तीन बार भी गुजर रहीं हैं।
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समयबद्ध गाड़ियों में नहीं हो पाती तैनाती
जो साप्ताहिक अथवा 15 दिन में अथवा दस दिन में चलने वाली स्पेशल ट्रेनें हैं, उनमें जीआरपी अथवा आरपीएफ की तैनाती नहीं हो पाती है। कई ट्रेनों में स्टाफ की कमी के चलते सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं हो पाते हैं।
- एसपी सिंह, वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक, सहारनपुर
साप्ताहिक और स्पेशल ट्रेनें दूरी वाले मुख्य स्टेशनों पर ही रुकतीं हैं। जहां सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होती है। रास्ते में ट्रेन कहीं नहीं रुकती। कुछ दूरी पर क्षेत्र बदल जाता है, इसलिए इन ट्रेनों में सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं हो पाते।
-अशोक कुमार सिसौदिया, जीआरपी प्रभारी, सहारनपुर
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आगे दूर जाकर स्टेशन पर ही देनी पड़ रही है रिपोर्ट
साप्ताहिक एवं स्पेशल ट्रेनों में पुलिसकर्मी के न होने से यात्री अपने साथ हुई घटना की सूचना भी नहीं दे पा रहे हैं। इसका कारण है कि सुपरफास्ट ट्रेनें सिर्फ बड़े स्टेशनों पर ही रुकतीं हैं। ऐसे में पीड़ित अगले किसी बड़े स्टेशन पर पहुंचने पर ही पुलिस को सूचना दे पाते हैं। पाटलीपुत्र अंबाला के बाद सहारनपुर ही रुकती है। जबकि घटना जगाधरी के पास हुई। एक दर्जन यात्री एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे, लेकिन ट्रेन कुछ ही मिनट रुकी, इसलिए सिर्फ एक यात्री ही एफआईआर दर्ज करा सका। जबकि दूसरे यात्रियों ने मुगलसराय पहुंचकर लूट की एफआईआर दर्ज कराई थी।
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सहारनपुर से निकलतीं हैं 19 साप्ताहिक ट्रेनें
सहारनपुर से होकर 19 साप्ताहिक ट्रेनें गुजरती हैं। ये ट्रेनें सप्ताह में सिर्फ एक बार ही सहारनपुर पहुंचतीं हैं। जबकि सप्ताह में तीन से चार ट्रेनें स्पेशल गुजरतीं हैं। इसके अलावा कुछ ट्रेनें सप्ताह में दो बार और कुछ ट्रेनें सप्ताह में तीन बार भी गुजर रहीं हैं।
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समयबद्ध गाड़ियों में नहीं हो पाती तैनाती
जो साप्ताहिक अथवा 15 दिन में अथवा दस दिन में चलने वाली स्पेशल ट्रेनें हैं, उनमें जीआरपी अथवा आरपीएफ की तैनाती नहीं हो पाती है। कई ट्रेनों में स्टाफ की कमी के चलते सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं हो पाते हैं।
- एसपी सिंह, वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक, सहारनपुर
साप्ताहिक और स्पेशल ट्रेनें दूरी वाले मुख्य स्टेशनों पर ही रुकतीं हैं। जहां सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होती है। रास्ते में ट्रेन कहीं नहीं रुकती। कुछ दूरी पर क्षेत्र बदल जाता है, इसलिए इन ट्रेनों में सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं हो पाते।
-अशोक कुमार सिसौदिया, जीआरपी प्रभारी, सहारनपुर