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सता के लिए जनता की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही बीजेपी: उलमा
Updated Sat, 24 Mar 2018 12:48 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। मध्य प्रदेश के छतरपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया तो धर्मगुरुओं में जुबानी बहस छिड़ गई। देवबंदी उलमा की तरफ से कहा गया कि संघ और बीजेपी राम मंदिर के नाम पर सत्ता के लिए देशवासियों की आस्थाओं से खिलवाड़ कर रही है। हिंदू धर्म की ओर से ध्यानगुरु स्वामी दीपांकर महाराज ने कहा कि वह आधे अधूरे ज्ञान के साथ बोल रहे हैं।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर शुक्रवार को देवबंद के मुफ्ती सैय्यद अजफर हुसैन ने कहा कि भाजपा को सत्ता का स्वाद चखते चार वर्ष हो चुके हैं। इस अवधि में राम मंदिर के नाम पर केवल बयानबाजी ही की जा रही है। इसलिए अब उन्हें देशवासियों को गुमराह करना बंद कर देना चाहिए। साथ ही कहा कि जो लोग राम मंदिर निर्माण की केवल बात कर रहे हैं पहले उन्हें राम जैसा भी तो बनना चाहिए। आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और संघ यह बात अच्छे से जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में उनके पास जीत का एकमात्र मंत्र राम मंदिर का मुद्दा है। जिसे उठाकर वो हिंदू समाज की भावनाओं से खिलवाड़ कर उनके वोट हासिल करेंगे। उधर, मुफ्ती अजफर के बयान पर पलटवार करते हुए अंतरराष्ट्रीय ध्यानगुरु स्वामी दीपांकर महाराज ने कहा कि बेहद गंभीर मुद्दे पर आधे अधूरे ज्ञान के साथ बयान देना देश को नुकसान पहुंचाना वाला साबित होता है। कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है तो ऐसे में कोई भी सरकार अध्यादेश कैसे ला सकती है।
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संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर शुक्रवार को देवबंद के मुफ्ती सैय्यद अजफर हुसैन ने कहा कि भाजपा को सत्ता का स्वाद चखते चार वर्ष हो चुके हैं। इस अवधि में राम मंदिर के नाम पर केवल बयानबाजी ही की जा रही है। इसलिए अब उन्हें देशवासियों को गुमराह करना बंद कर देना चाहिए। साथ ही कहा कि जो लोग राम मंदिर निर्माण की केवल बात कर रहे हैं पहले उन्हें राम जैसा भी तो बनना चाहिए। आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और संघ यह बात अच्छे से जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में उनके पास जीत का एकमात्र मंत्र राम मंदिर का मुद्दा है। जिसे उठाकर वो हिंदू समाज की भावनाओं से खिलवाड़ कर उनके वोट हासिल करेंगे। उधर, मुफ्ती अजफर के बयान पर पलटवार करते हुए अंतरराष्ट्रीय ध्यानगुरु स्वामी दीपांकर महाराज ने कहा कि बेहद गंभीर मुद्दे पर आधे अधूरे ज्ञान के साथ बयान देना देश को नुकसान पहुंचाना वाला साबित होता है। कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है तो ऐसे में कोई भी सरकार अध्यादेश कैसे ला सकती है।
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