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तीन तलाक पर लोकसभा में पेश हुए बिल का देवबंद में विरोध...
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:25 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक पर लोकसभा में बिल पेश किए जाने का देवबंद में महिलाओं ने विरोध किया है। महिलाओं का कहना है कि सरकार शरीयत के मामले में हस्तक्षेप कर तीन तलाक का सियासी करण कर रही है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शुक्रवार को मोहल्ला बेरुन कोटला में अल कुरैश एजूकेशन एकेडमी के बैनर तले महिलाओं ने लोकसभा में पेश हुए बिल के खिलाफ आवाज बुलंद की। यहां महिलाओं ने बैठक कर पुरजोर तरीके से इसका विरोध करते हुए दो टूक कहा कि सरकार बिना वजह शरीयत के मामलों में दखलंदाजी कर तीन तलाक का सियासी करण कर रही है। एकेडमी की अध्यक्ष महताब बेगम ने कहा कि मुसलमानों का अपना अलग शरिया कानून है जिसे भारतीय संविधान से धार्मिक तौर पर आजादी मिली हुई है। उसके बावजूद सरकार इसमें बिना वजह का हस्तक्षेप कर रही है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आमना रोशी ने कहा कि जब केंद्र सरकार महिलाओं के हक में होने का दावा कर रही है तो लोकसभा में पेश किया गया तीन तलाक पर तीन साल सजा वाले बिल से खामियाें को दूर क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे जल्दबाजी में पेश क्यों किया गया। इससे लगता है कि सरकार की नीयत साफ नहीं है। इस बिल को पेश कर मुस्लिम महिलाओं के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। गुल सबा ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार मुुस्लिम महिलाओं की इतनी फिक्र करती है तो वह उन्हें शिक्षा और रोजगार में आरक्षण क्यों नहीं देती। यदि सरकार इस दिशा में कदम उठाए तो यह माना जाए कि सरकार महिलाओं को लेकर बेहद संजीदा है। इस मौके पर मेराज बेगम, स्वालेहा, जुबैदा, सलमा बेगम, मरियन, शीबा नाज, जुलेखा, रिहाना, मोमिना, रेशमा खातूम, रजिया बेगम आदि मौजूद रहीं।
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शुक्रवार को मोहल्ला बेरुन कोटला में अल कुरैश एजूकेशन एकेडमी के बैनर तले महिलाओं ने लोकसभा में पेश हुए बिल के खिलाफ आवाज बुलंद की। यहां महिलाओं ने बैठक कर पुरजोर तरीके से इसका विरोध करते हुए दो टूक कहा कि सरकार बिना वजह शरीयत के मामलों में दखलंदाजी कर तीन तलाक का सियासी करण कर रही है। एकेडमी की अध्यक्ष महताब बेगम ने कहा कि मुसलमानों का अपना अलग शरिया कानून है जिसे भारतीय संविधान से धार्मिक तौर पर आजादी मिली हुई है। उसके बावजूद सरकार इसमें बिना वजह का हस्तक्षेप कर रही है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आमना रोशी ने कहा कि जब केंद्र सरकार महिलाओं के हक में होने का दावा कर रही है तो लोकसभा में पेश किया गया तीन तलाक पर तीन साल सजा वाले बिल से खामियाें को दूर क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे जल्दबाजी में पेश क्यों किया गया। इससे लगता है कि सरकार की नीयत साफ नहीं है। इस बिल को पेश कर मुस्लिम महिलाओं के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। गुल सबा ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार मुुस्लिम महिलाओं की इतनी फिक्र करती है तो वह उन्हें शिक्षा और रोजगार में आरक्षण क्यों नहीं देती। यदि सरकार इस दिशा में कदम उठाए तो यह माना जाए कि सरकार महिलाओं को लेकर बेहद संजीदा है। इस मौके पर मेराज बेगम, स्वालेहा, जुबैदा, सलमा बेगम, मरियन, शीबा नाज, जुलेखा, रिहाना, मोमिना, रेशमा खातूम, रजिया बेगम आदि मौजूद रहीं।
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