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शिया समुदाय ने बरामद किया मातमी जलूस
Updated Wed, 29 Nov 2017 12:50 AM IST
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नानौता।
अय्यामे अजा के आखिरी दिन और हजरत इमाम हसन असकरी अलैहिसल्लाम की शहादत के मौके पर शिया समुदाय द्वारा अलविदाई मातमी जुलूस बरामद किया गया। इसमें नगर की चारों अंजुमनों अंजुमन सरकारे अबुतालिब (रजिस्टर्ड), अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन हैदरी, अंजुमन जुल्फकारे हैदरी के नोहाख्वानी गुलशन रजा, मीसम नाजा, शाने अब्बास, महमूद अली, अली अख्तर, जफर मेहंदी, सफदर अब्बास, आदि नोहाख्वानों ने अलविदाई नोहे पड़े। जुलूस से पूर्व नगर के बारगाहे कसरे फातमी में एक मजलिस का आयोजन किया गया। जिसको मौलाना सैय्यद अली हैदर आब्दी साहब ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन अलैहिसल्लाम की सफात बयान करते हुए बताया कि आज के पूरा आशोब माहौल में बहुत सी नापाक ताकतें यजीद पलीद जैसे फासिको फाजिर इंसान को रजिअल्लाह बनाने पर तुले हुए है जिसका नतीजा ये है कि रोहित सरदाना जैसे लोग आले रसूल के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। मजलिस के बाद मौलाना ने मसाएब बयान किए मजलिस के बाद एक विशाल जलूस बरामद किया गया जो हजरत इमाम हुसैन चौक इमामबारगाह महल से होते हुए दादा मीराजी रोड स्थित दरगाह हजरत इमाम हुसैन अलैहिसल्लाम पर जाकर समाप्त हुआ। इस जुलूस में काफी शिया सोगवार मौजूद रहे।
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अय्यामे अजा के आखिरी दिन और हजरत इमाम हसन असकरी अलैहिसल्लाम की शहादत के मौके पर शिया समुदाय द्वारा अलविदाई मातमी जुलूस बरामद किया गया। इसमें नगर की चारों अंजुमनों अंजुमन सरकारे अबुतालिब (रजिस्टर्ड), अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन हैदरी, अंजुमन जुल्फकारे हैदरी के नोहाख्वानी गुलशन रजा, मीसम नाजा, शाने अब्बास, महमूद अली, अली अख्तर, जफर मेहंदी, सफदर अब्बास, आदि नोहाख्वानों ने अलविदाई नोहे पड़े। जुलूस से पूर्व नगर के बारगाहे कसरे फातमी में एक मजलिस का आयोजन किया गया। जिसको मौलाना सैय्यद अली हैदर आब्दी साहब ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन अलैहिसल्लाम की सफात बयान करते हुए बताया कि आज के पूरा आशोब माहौल में बहुत सी नापाक ताकतें यजीद पलीद जैसे फासिको फाजिर इंसान को रजिअल्लाह बनाने पर तुले हुए है जिसका नतीजा ये है कि रोहित सरदाना जैसे लोग आले रसूल के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। मजलिस के बाद मौलाना ने मसाएब बयान किए मजलिस के बाद एक विशाल जलूस बरामद किया गया जो हजरत इमाम हुसैन चौक इमामबारगाह महल से होते हुए दादा मीराजी रोड स्थित दरगाह हजरत इमाम हुसैन अलैहिसल्लाम पर जाकर समाप्त हुआ। इस जुलूस में काफी शिया सोगवार मौजूद रहे।