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शांकभरी में हालात सुधरे, मगर मुश्किलें बाकी
Updated Tue, 26 Sep 2017 01:11 AM IST
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बेहट (सहारनपुर)। बारिश रुक गई है और नदी में पानी का बहाव भी कम हो गया, इसके बावजूद सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना पड़ रहा है। सिद्धपीठ से दो किमी पहले नागलमाफी गांव में ग्राम समाज की भूमि पर बनाई गई वैकल्पिक पार्किंग पर श्रद्धालुओं से पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। वहां से श्रद्धालुओं को दो किमी लंबा सफर पैदल तय करके माता के दर्शन हो पा रहे हैं।
बता दें कि तीन दिन तक लगातार पहाड़ियों पर बारिश होने से सिद्धपीठ में नदी में बाढ़ आने के बाद हालात खराब हो गए थे। आस्था में डूबे श्रद्धालुओं ने पुलिस के मना करने के बावजूद जान जोखिम में डालकर तेज बहाव से होकर नदी को पार किया और मां के दर्शन किए। सोमवार को दर्शन को पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि बारिश रुक गई और नदी में पानी भी कम है, फिर भी उन्हें अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सिद्धपीठ से दो किमी पहले नागलमाफी गांव में ग्राम समाज की भूमि पर वैकल्पिक पार्किंग बना दी गई है, जहां अवैध की जा रही है। साथ ही मां के दर्शन के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। जबकि, पार्किंग वसूलने की अनुमति केवल मेला परिक्षेत्र में है।
जिला पंचायत की बदइंतजामी पर हर कोई गुस्सा
बेहट। बारिश और बाढ़ खत्म होने के बाद सिद्धपीठ में हालात सामान्य होने लगे है। सोमवार को नदी का बहाव बीच में होने के बाद दोनों साइड में दुकानदारों ने फिर से दुकानें लगानी शुरू कर दी थी, लेकिन उनमें जिला पंचायत की बदइंतजामी को लेकर गहरा आक्रोश था। दुकानदारों ने बताया कि 1500 रुपये प्रति फीट की जगह नीलाम में छुड़वाने के बाद भी उनके लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई। उधर, श्रद्धालु भी अव्यवस्था से नाराज हैं। उनका आरोप है कि अवैध से पार्किंग बनाकर श्रद्धालुओं से वसूली की जा रही है। रविवार को बाढ़ आने पर जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी ने सिद्धपीठ में पहुंचकर कोई सुध नहीं ली। सोमवार को हालात सुधरने पर ही वे सिद्धपीठ पहुंची।
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बता दें कि तीन दिन तक लगातार पहाड़ियों पर बारिश होने से सिद्धपीठ में नदी में बाढ़ आने के बाद हालात खराब हो गए थे। आस्था में डूबे श्रद्धालुओं ने पुलिस के मना करने के बावजूद जान जोखिम में डालकर तेज बहाव से होकर नदी को पार किया और मां के दर्शन किए। सोमवार को दर्शन को पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि बारिश रुक गई और नदी में पानी भी कम है, फिर भी उन्हें अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सिद्धपीठ से दो किमी पहले नागलमाफी गांव में ग्राम समाज की भूमि पर वैकल्पिक पार्किंग बना दी गई है, जहां अवैध की जा रही है। साथ ही मां के दर्शन के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। जबकि, पार्किंग वसूलने की अनुमति केवल मेला परिक्षेत्र में है।
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जिला पंचायत की बदइंतजामी पर हर कोई गुस्सा
बेहट। बारिश और बाढ़ खत्म होने के बाद सिद्धपीठ में हालात सामान्य होने लगे है। सोमवार को नदी का बहाव बीच में होने के बाद दोनों साइड में दुकानदारों ने फिर से दुकानें लगानी शुरू कर दी थी, लेकिन उनमें जिला पंचायत की बदइंतजामी को लेकर गहरा आक्रोश था। दुकानदारों ने बताया कि 1500 रुपये प्रति फीट की जगह नीलाम में छुड़वाने के बाद भी उनके लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई। उधर, श्रद्धालु भी अव्यवस्था से नाराज हैं। उनका आरोप है कि अवैध से पार्किंग बनाकर श्रद्धालुओं से वसूली की जा रही है। रविवार को बाढ़ आने पर जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी ने सिद्धपीठ में पहुंचकर कोई सुध नहीं ली। सोमवार को हालात सुधरने पर ही वे सिद्धपीठ पहुंची।
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