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स्वामी विवेकानंद के भाषण को याद किया
Updated Tue, 12 Sep 2017 12:24 AM IST
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स्वामी विवेकानंद के शिकागो में हुए भाषण को याद किया
गंगोह (सहारनपुर) । विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिये गये बेहद चर्चित भाषण की 125वीं वर्षगांठ पर स्वामी जी को याद किया गया। वक्ताओं ने उनके ओजस्वी भाषण के सार को समझाते हुए उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
रामकृष्ण मेहता इंटर कालेज में प्रधानाचार्य ओमपाल सिंह ने विद्यार्थियों को स्वामी जी के जीवन से परिचित कराते हुए उनके द्वारा दिए गए भाषण की जानकारी दी। बताया कि सन 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म परिषद हो रही थी। स्वामी विवेकानंद उसमें देश के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे थे। यूरोप-अमेरिका के लोग उस वक्त पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे। वहां लोगों ने बहुत प्रयास किया कि स्वामी जी को सर्वधर्म परिषद में बोलने का समय ही नहीं मिले। मगर एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें कुछ समय मिल गया। उनके विचार सुनकर विद्वान भी चकित रह गए थे। फिर अमेरिका में उनका बहुत स्वागत हुआ और वहां इनके अनुयायियों का एक बड़ा समुदाय हो गया। वह तीन वर्षों तक वहां रहे और लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अद्भुत ज्योति प्रदान करते रहे। इस अवसर पर अध्यापक प्रवीण शर्मा को सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा लाला किशनचंद राजकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश के नाम संबोधन के प्रसारण को सुना।
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गंगोह (सहारनपुर) । विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिये गये बेहद चर्चित भाषण की 125वीं वर्षगांठ पर स्वामी जी को याद किया गया। वक्ताओं ने उनके ओजस्वी भाषण के सार को समझाते हुए उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
रामकृष्ण मेहता इंटर कालेज में प्रधानाचार्य ओमपाल सिंह ने विद्यार्थियों को स्वामी जी के जीवन से परिचित कराते हुए उनके द्वारा दिए गए भाषण की जानकारी दी। बताया कि सन 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म परिषद हो रही थी। स्वामी विवेकानंद उसमें देश के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे थे। यूरोप-अमेरिका के लोग उस वक्त पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे। वहां लोगों ने बहुत प्रयास किया कि स्वामी जी को सर्वधर्म परिषद में बोलने का समय ही नहीं मिले। मगर एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें कुछ समय मिल गया। उनके विचार सुनकर विद्वान भी चकित रह गए थे। फिर अमेरिका में उनका बहुत स्वागत हुआ और वहां इनके अनुयायियों का एक बड़ा समुदाय हो गया। वह तीन वर्षों तक वहां रहे और लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अद्भुत ज्योति प्रदान करते रहे। इस अवसर पर अध्यापक प्रवीण शर्मा को सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा लाला किशनचंद राजकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश के नाम संबोधन के प्रसारण को सुना।
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