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छठे दिन उतम संयम धर्म की हुई पूजा
Updated Fri, 01 Sep 2017 12:36 AM IST
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सरसावा (सहारनपुर)। दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की पूजा की गयी तथा धूप दशमी का त्योहार मनाया गया। इस मौके पर मंदिरों में धूप को अग्नि में समाहित कर कर्मों की निर्जरा की गयी।
बृहस्पतिवार को भी नगर की जैन समाज में धर्म की धारा बहती रही। दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की पूजा की गयी। इससे पूर्व श्रीजी का अभिषेक किया गया। इस मौके पर विद्वान सतीश चंद जैन ने बताया की इंद्रियों पर विजय पाना उत्तम संयम धर्म की पालना है। लेकिन आज का सांसारिक जीव भौतिकतावादी युग में धर्म की राह से भटक रहा है तथा सांसारिक उलझनों में उलझा रहता है यही अवसाद का कारण है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में साफ वर्णन है कि संयम के बिना जीवन नहीं है। मोक्ष गमन करने वाले तीर्थंकरों ने भी संयम धारण किया तब जाकर मोक्ष की प्राप्ति हुयी। जैन विद्वान ने समझाया की आपके असंयमित व्यवहार से किसी प्राणी को कष्ट ना पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि जीवन को शांतिपूर्ण तरीके से जीना चाहते हो तो संयम धारण करना ही पड़ेगा।
दोपहर के समय धूप दशमी का पर्व मनाया गया। जिसमें कथा श्रवण के पश्चात मंदिरों में धूप सामग्री को अग्रि में समाहित किया गया। सतीश चंद जैन ने बताया कि इससे कर्मों की निर्जरा होती है। रात्री के समय अनेक प्रतियोगिताऐं आयोजित हुयी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को भी नगर की जैन समाज में धर्म की धारा बहती रही। दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की पूजा की गयी। इससे पूर्व श्रीजी का अभिषेक किया गया। इस मौके पर विद्वान सतीश चंद जैन ने बताया की इंद्रियों पर विजय पाना उत्तम संयम धर्म की पालना है। लेकिन आज का सांसारिक जीव भौतिकतावादी युग में धर्म की राह से भटक रहा है तथा सांसारिक उलझनों में उलझा रहता है यही अवसाद का कारण है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में साफ वर्णन है कि संयम के बिना जीवन नहीं है। मोक्ष गमन करने वाले तीर्थंकरों ने भी संयम धारण किया तब जाकर मोक्ष की प्राप्ति हुयी। जैन विद्वान ने समझाया की आपके असंयमित व्यवहार से किसी प्राणी को कष्ट ना पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि जीवन को शांतिपूर्ण तरीके से जीना चाहते हो तो संयम धारण करना ही पड़ेगा।
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दोपहर के समय धूप दशमी का पर्व मनाया गया। जिसमें कथा श्रवण के पश्चात मंदिरों में धूप सामग्री को अग्रि में समाहित किया गया। सतीश चंद जैन ने बताया कि इससे कर्मों की निर्जरा होती है। रात्री के समय अनेक प्रतियोगिताऐं आयोजित हुयी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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