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अध्यापन छोड़कर किताबें ढोने को मजबूर गुरुजी
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:47 AM IST
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अध्यापन छोड़कर किताबें ढोने को मजबूर गुरुजी
सहारनपुर। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक इन दिनों अध्यापन कार्य छोड़कर किताबें ढोने में व्यस्त हैं। दरअसल, विद्यालयों तक किताबों को पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की थी। लेकिन विभाग ने फरमान सुना दिया है कि किताबें शिक्षकों को ही विभागीय कार्यालयों से स्कूलों तक ले जानी होंगी।
जिले में 1355 प्राथमिक और 576 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैँ। इन विद्यालयों में करीब पौने दो लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। सभी बच्चों को किताबें शासन की ओर से निशुल्क दी जाती हैँ। यह किताबें एक अप्रैल को दी जानी थी। लेकिन पहले टेंडर प्रक्रिया न होने और बाद में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिल सकी हैँ। जो किताबें जिले में पहुंच चुकी हैं, वह भी बच्चों तक नहीं पहुंचाई गई। विभागीय अधिकारियों को किताबें स्वयं विद्यालयों में पहुंचानी थी। लेकिन विभाग ने अपना पल्ला झाड़ते हुए शिक्षकों को ही किताबें बीआरसी से ले जाने का फरमान सुना दिया हैं। ऐसे में शिक्षक विद्यालयों में अध्यापन कार्य छोड़कर किताबें बीआरसी से विद्यालयों तक ले जाने में लगे हैँ।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संदीप पंवार का कहना हैं कि किताबों को विद्यालयों तक भिजवाने का कार्य विभाग का है। लेकिन विभागीय अधिकारी और कर्मचारी शिक्षकों से ही किताबों स्कूलों तक ले जाने का कार्य करा रहे हैँ।
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शासन से नहीं होती धनराशि आवंटित
बीएसए रामेंद्र सिंह का कहना है कि विभाग की ओर से किताबों को ब्लॉक संसाधन केंद्रों तक पहुंचा दिया जाता है। यहां से संबंधित ब्लॉक के विद्यालयों में किताबें शिक्षकों को स्वयं ले जानी पड़ती हैँ। इसके लिए शासन से कोई धनराशि आवंटित नहीं होती हैँ। ऐसे में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता हैँ।
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सहारनपुर। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक इन दिनों अध्यापन कार्य छोड़कर किताबें ढोने में व्यस्त हैं। दरअसल, विद्यालयों तक किताबों को पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग की थी। लेकिन विभाग ने फरमान सुना दिया है कि किताबें शिक्षकों को ही विभागीय कार्यालयों से स्कूलों तक ले जानी होंगी।
जिले में 1355 प्राथमिक और 576 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैँ। इन विद्यालयों में करीब पौने दो लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। सभी बच्चों को किताबें शासन की ओर से निशुल्क दी जाती हैँ। यह किताबें एक अप्रैल को दी जानी थी। लेकिन पहले टेंडर प्रक्रिया न होने और बाद में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते बच्चों को अभी तक किताबें नहीं मिल सकी हैँ। जो किताबें जिले में पहुंच चुकी हैं, वह भी बच्चों तक नहीं पहुंचाई गई। विभागीय अधिकारियों को किताबें स्वयं विद्यालयों में पहुंचानी थी। लेकिन विभाग ने अपना पल्ला झाड़ते हुए शिक्षकों को ही किताबें बीआरसी से ले जाने का फरमान सुना दिया हैं। ऐसे में शिक्षक विद्यालयों में अध्यापन कार्य छोड़कर किताबें बीआरसी से विद्यालयों तक ले जाने में लगे हैँ।
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प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संदीप पंवार का कहना हैं कि किताबों को विद्यालयों तक भिजवाने का कार्य विभाग का है। लेकिन विभागीय अधिकारी और कर्मचारी शिक्षकों से ही किताबों स्कूलों तक ले जाने का कार्य करा रहे हैँ।
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शासन से नहीं होती धनराशि आवंटित
बीएसए रामेंद्र सिंह का कहना है कि विभाग की ओर से किताबों को ब्लॉक संसाधन केंद्रों तक पहुंचा दिया जाता है। यहां से संबंधित ब्लॉक के विद्यालयों में किताबें शिक्षकों को स्वयं ले जानी पड़ती हैँ। इसके लिए शासन से कोई धनराशि आवंटित नहीं होती हैँ। ऐसे में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता हैँ।