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57 कर्मचारियों के भरोसे 31 पेयजल योजनाएं

Mon, 07 Sep 2020 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 11:57 PM IST
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31 drinking water schemes with 57 employees
छुटमलपुर (सहारनपुर)। जिले की एक बड़ी आबादी की प्यास बुझाने वाला जल निगम कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। 31 पेयजल योजनाओं पर केवल 57 कर्मचारी ही तैनात हैं। तीन योजनाओं पर तो एक भी स्थाई कर्मचारी तैनात नहीं है। इसके चलते निर्बाध पेयजल आपूर्ति और टैक्स वसूली प्रभावित हो रही है।
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जल निगम सहारनपुर जनपद में अपनी 31 पेयजल योजनाओं के माध्यम से डेढ़ सौ से ज्यादा गांवों में पेयजल आपूर्ति करता है। पिछले काफी समय से निगम में कर्मचारियों की कोई भर्ती नहीं हुई। लगातार सेवानिवृत्त होने के कारण कर्मचारियों की संख्या घटकर केवल 57 रह गई है। नकुड़ क्षेत्र की कुंडी पेयजल योजना, सरसावा क्षेत्र की बरथा कायस्थ और बेहट की बादशाहीबाग योजना पर तो एक भी स्थाई कर्मचारी तैनात नहीं है। सूत्रों के अनुसार यहां आस पड़ोस के ग्रामीण ही प्राइवेट कर्मी के रूप में नलकूप संचालन से लेकर वाल्व खोलने बंद करने का काम करते हैं। वहीं जीवाला, बड़कलां, मीरपुर गंदेवड़, दूधला, रंधेड़ी, गदरहेड़ी, शाहजहांपुर, गागलहेड़ी में स्थित पेयजल योजनाओं पर एक एक कर्मचारी ही तैनात है। इस कर्मचारी के छुट्टी या विभागीय कार्य के लिए बाहर जाने की दशा में यहां नलकूप तक नहीं चल पाता है। आधा दर्जन से ज्यादा योजनाओं पर दो-दो नलकूप हैं, जिन्हें चलाने के लिए मात्र एक आपरेटर या कहीं कहीं तो चौकीदार ही तैनात किया हुआ है। ऐसे में एक कर्मचारी द्वारा 24 घंटे योजना पर रह कर कम से कम आधा किमी की दूरी पर स्थित दोनो नलकूपों का संचालन व्यवहारिक रुप से संभव नहीं है। इससे जहां कई बार पेयजल सप्लाई प्रभावित होती है वहीं लीकेज या अन्य तकनीकी खराबी आने की दशा में उसे ठीक कराने में कई कई दिन लग जाते हैं।
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चोरी की वारदातें भी हो चुकी हैं।
थाप्पुल इस्माइलपुर के आधा दर्जन मजरों, बादशाहीबाग, मगनपुरा योजनाओं पर सोलर पैनल से नलकूप संचालित हैं। कर्मचारियों की तैनाती न होने के कारण यहां पूर्व में सोलर पैनल चोरी की वारदातें हो चुकी हैं। इससे निगम को आर्थिक नुकसान तो उठाना ही पड़ा नलकूप भी काफी समय तक बंद पड़े रहे।
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कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के चलते और नई भर्ती न होने के कारण जिले की 31 पेयजल योजनाओं पर जल कर इकट्ठा करने के लिए केवल दो कर संग्रह लिपिक ही बचे हैं। ऐसे में निगम राजस्व की वसूली भी नहीं कर पा रहा है। लिपिकों की कमी के चलते जल कर वसूली के लिए आपरेटर या चौकीदार को ही जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कर वसूली की स्थिति क्या होगी।

नई भर्ती न होने और कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से परेशानी खड़ी हुई है। योजनाओं पर प्राइवेट व्यक्ति को तैनात करके इनका संचालन सुचारु रूप से कराया जाएगा। तैनात व्यक्ति द्वारा जल कर की जो वसूली की जाएगी उसी से उसके वेतन की व्यवस्था का प्रावधान किया जाएगा।
राजेंद्र सिंह
परियोजना प्रबंधक जल निगम सहारनपुर
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