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Saharanpur News: एमबीबीएस डॉक्टरों की पोस्ट 23, साक्षात्कार देने पहुंचे 44
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सहारनपुर। बेरोजगारी का आलम यह है कि अब डॉक्टर की नौकरी के लिए भी कतार लगने लगी है। जिले के सरकारी अस्पतालों में संविदा पर 23 एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति होनी है। इसके लिए बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में 44 अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार दिया। शिक्षा और अनुभव के दस्तावेज एकत्र कर लिए गए हैं। जल्द ही नियमानुसार चयन सूची तैयार की जाएगी। उसके अनुसार अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए बुलाया जाएगा।
दरअसल, जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में दो चिकित्सा अधिकारी, जिला स्तरीय अस्पताल में चार ईएमओ के पदों पर एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती होनी है। शहरी पीएचसी व यूपीएचएसी में पांच चिकित्सा अधिकारी और सीएचसी एनएसडी क्लीनिक में 12 जनरल फिजिशियन एवं चिकित्सा अधिकारी के पदों पर भी एमबीबीएस डॉक्टर रखे जाने हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों अखबारों में विज्ञापन दिया था।
बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में सिटी मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार, मुख्य कोषाधिकारी सूरज कुमार, सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार, प्रमुख अधीक्षक डॉ. रामानंद, महिला सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह, डीपीएम खालिद हुसैन व एकाउंट मैनेजर ज्ञानेंद्र शुक्ला ने अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया। साक्षात्कार दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक हुआ। एक-एक कर अभ्यर्थियों को बुलाया गया। इस दौरान सभी अभ्यर्थियों के शिक्षा और अनुभव दस्तावेज चेक किए गए। 23 पदों पर होने वाली नियुक्ति एक वित्तीय वर्ष तक के लिए मान्य होगी, जिसे भारत सरकार के अनुमोदन के बाद ही बढ़ाया जा सकेगा। कोई भी प्रतिकूल तथ्य पाए जाने पर डॉक्टर की संविदा समाप्त की जा सकती है। यानी नौकरी की गारंटी नहीं है।
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-- एमबीबीएस डॉक्टरों को करनी पड़ रही मशक्कत
एमबीबीएस कोर्स में दाखिले के लिए जहां कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है, वहीं कोर्स पूरा करने में लाखों रुपये का खर्च भी होता है। इसके अलावा एमबीबीएस की शिक्षा भी काफी ध्यान देने वाली मानी जाती है। इतना कुछ करने के बाद भी एमबीबीएस डॉक्टरों को कच्ची नौकरियों के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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दरअसल, जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में दो चिकित्सा अधिकारी, जिला स्तरीय अस्पताल में चार ईएमओ के पदों पर एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती होनी है। शहरी पीएचसी व यूपीएचएसी में पांच चिकित्सा अधिकारी और सीएचसी एनएसडी क्लीनिक में 12 जनरल फिजिशियन एवं चिकित्सा अधिकारी के पदों पर भी एमबीबीएस डॉक्टर रखे जाने हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों अखबारों में विज्ञापन दिया था।
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बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में सिटी मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार, मुख्य कोषाधिकारी सूरज कुमार, सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार, प्रमुख अधीक्षक डॉ. रामानंद, महिला सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह, डीपीएम खालिद हुसैन व एकाउंट मैनेजर ज्ञानेंद्र शुक्ला ने अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया। साक्षात्कार दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक हुआ। एक-एक कर अभ्यर्थियों को बुलाया गया। इस दौरान सभी अभ्यर्थियों के शिक्षा और अनुभव दस्तावेज चेक किए गए। 23 पदों पर होने वाली नियुक्ति एक वित्तीय वर्ष तक के लिए मान्य होगी, जिसे भारत सरकार के अनुमोदन के बाद ही बढ़ाया जा सकेगा। कोई भी प्रतिकूल तथ्य पाए जाने पर डॉक्टर की संविदा समाप्त की जा सकती है। यानी नौकरी की गारंटी नहीं है।
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एमबीबीएस कोर्स में दाखिले के लिए जहां कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है, वहीं कोर्स पूरा करने में लाखों रुपये का खर्च भी होता है। इसके अलावा एमबीबीएस की शिक्षा भी काफी ध्यान देने वाली मानी जाती है। इतना कुछ करने के बाद भी एमबीबीएस डॉक्टरों को कच्ची नौकरियों के लिए भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।