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22 सप्ताह के कार्यक्रम से होगी लर्निंग गैप की भरपाई
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सहारनपुर। कोरोना काल में हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक नुकसान, जिसे लर्निंग गैप कहा गया है की भरपाई के लिए निपुण भारत मिशन के तहत 22 सप्ताह का विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है। कार्यक्रम के बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित आठवीं तक के सभी विद्यालयों में चलेगा। जिसकी तैयारियां भी विभागीय स्तर से शुरू कर दी गई है।
कोरोना काल में सभी शिक्षण संस्थाएं बंद रहे। पठन पाठन को जारी रखने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई और मोहल्ला कक्षाएं आदि शुरू की गईं, लेकिन इन सबके बावजूद विद्यार्थी पाठ्यक्रमों को उतना बेहतर नहीं समझ पाए, जितना समझने चाहिए थे। लगातार घर पर रहने से वह लापरवाह होने के साथ ही उनकी लेखन की गति में भी कमी आई। कई बच्चों के साथ ऐसा भी हुआ है, कि उन्हें जो आता था वह उसे भी भूल गए हैं। ऐसे में निपुण भारत मिशन के तहत 22 सप्ताह का विशेष कार्यक्रम तैयार किया है, जिसमें शिक्षक शैक्षणिक रूप से कमजोर हुए विद्यार्थियों पर काम करेंगे। यह शिक्षकों के लिए एक चुनौती होगी कि वह 22 सप्ताह यानी करीब 150 दिन में विद्यार्थियों में आई शैक्षणिक कमी की भरपाई कर सकें। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए लिखित सामग्री विभाग के पास आएगी, जहां से यह सामग्री शिक्षकों को भेजी जाएगी। कार्यक्रम में सब कुछ निर्धारित है। जैसे किस दिन और किस पीरियड में क्या पढ़ाया जाना है। निर्देश हैं कि 22 सप्ताह के कार्यक्रम के बाद ही विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की अन्य किताबें पढ़ाई जाएं।
कोरोना की वजह से आए लर्निंग गैप की भरपाई के लिए 22 सप्ताह का कार्यक्रम चलेगा। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 22 सप्ताह के इस कार्यक्रम में शिक्षकों को कैसे काम करना है यह सब निर्धारित है। निश्चित रूप से इस कार्यक्रम से शिक्षा का स्तर बढ़ेगा।
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अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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कोरोना काल में सभी शिक्षण संस्थाएं बंद रहे। पठन पाठन को जारी रखने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई और मोहल्ला कक्षाएं आदि शुरू की गईं, लेकिन इन सबके बावजूद विद्यार्थी पाठ्यक्रमों को उतना बेहतर नहीं समझ पाए, जितना समझने चाहिए थे। लगातार घर पर रहने से वह लापरवाह होने के साथ ही उनकी लेखन की गति में भी कमी आई। कई बच्चों के साथ ऐसा भी हुआ है, कि उन्हें जो आता था वह उसे भी भूल गए हैं। ऐसे में निपुण भारत मिशन के तहत 22 सप्ताह का विशेष कार्यक्रम तैयार किया है, जिसमें शिक्षक शैक्षणिक रूप से कमजोर हुए विद्यार्थियों पर काम करेंगे। यह शिक्षकों के लिए एक चुनौती होगी कि वह 22 सप्ताह यानी करीब 150 दिन में विद्यार्थियों में आई शैक्षणिक कमी की भरपाई कर सकें। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए लिखित सामग्री विभाग के पास आएगी, जहां से यह सामग्री शिक्षकों को भेजी जाएगी। कार्यक्रम में सब कुछ निर्धारित है। जैसे किस दिन और किस पीरियड में क्या पढ़ाया जाना है। निर्देश हैं कि 22 सप्ताह के कार्यक्रम के बाद ही विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की अन्य किताबें पढ़ाई जाएं।
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कोरोना की वजह से आए लर्निंग गैप की भरपाई के लिए 22 सप्ताह का कार्यक्रम चलेगा। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 22 सप्ताह के इस कार्यक्रम में शिक्षकों को कैसे काम करना है यह सब निर्धारित है। निश्चित रूप से इस कार्यक्रम से शिक्षा का स्तर बढ़ेगा।
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अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।