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पर्दे में रहने से होती है महिलाओं की हिफाजत: खुर्शीदा
Updated Tue, 04 Dec 2018 12:53 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। मुस्लिम महिलाओं का बिना बुर्के के किसी भी आयोजन में शरीक होने को इस्लाम के खिलाफ बताने वाले दारुल उलूम के फतवे का मुस्लिम महिलाओं ने समर्थन किया है। महिलाओं का कहना है कि पर्दे से महिलाओं की हिफाजत होती है और वह बुरी नजरों से भी बचती हैं।
सोमवार को मदरसा जामिया इल्हामिया मदरसातुल बनात की प्रबंधक खुर्शीदा खातून ने कहा कि इस्लाम धर्म में महिलाओं के लिए पर्दे का हुक्म दिया गया है। जो हुजूर के समय में ही आ गया था। इसलिए अल्लाह के हुक्म को मानते हुए मुस्लिम महिलाओं को पर्दे में रहना वाजिब है और यह हमारी पहचान भी है। उन्होंने कहा कि पर्दा किसी तरह का बोझ नहीं बल्कि महिलाओं की हिफाजत के लिए उठाया गया शानदार कदम है। संस्था की उप प्रबंधक जैनब अरशी का कहना है कि बुर्का पहने से महिलाएं बुरी नजरों से बचती हैं और उनकी हिफाजत होती है। आज समाज में तरह तरह के फितने फैले हुए हैं इन सबसे सुरक्षित रहने और खुद की हिफाजत के लिए पर्दे का होना बेहद जरूरी है। सभी महिलाओं को चाहिए कि वह पर्दे की पाबंदी करें और अपने आसपास रहने वाली मुस्लिम महिलाओं को युवतियों को इसके लिए जागरूक करें। बता दें कि बुर्का पहनने को लेकर दारुल उलूम से काफी दिन पहले यह फतवा जारी हुआ था। जिसे सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। फतवे में मुफ्तियों ने बिना बुर्के के मुस्लिम महिलाओं का किसी भी आयोजन में शिरकत करने को इस्लाम के खिलाफ बताया था।
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सोमवार को मदरसा जामिया इल्हामिया मदरसातुल बनात की प्रबंधक खुर्शीदा खातून ने कहा कि इस्लाम धर्म में महिलाओं के लिए पर्दे का हुक्म दिया गया है। जो हुजूर के समय में ही आ गया था। इसलिए अल्लाह के हुक्म को मानते हुए मुस्लिम महिलाओं को पर्दे में रहना वाजिब है और यह हमारी पहचान भी है। उन्होंने कहा कि पर्दा किसी तरह का बोझ नहीं बल्कि महिलाओं की हिफाजत के लिए उठाया गया शानदार कदम है। संस्था की उप प्रबंधक जैनब अरशी का कहना है कि बुर्का पहने से महिलाएं बुरी नजरों से बचती हैं और उनकी हिफाजत होती है। आज समाज में तरह तरह के फितने फैले हुए हैं इन सबसे सुरक्षित रहने और खुद की हिफाजत के लिए पर्दे का होना बेहद जरूरी है। सभी महिलाओं को चाहिए कि वह पर्दे की पाबंदी करें और अपने आसपास रहने वाली मुस्लिम महिलाओं को युवतियों को इसके लिए जागरूक करें। बता दें कि बुर्का पहनने को लेकर दारुल उलूम से काफी दिन पहले यह फतवा जारी हुआ था। जिसे सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। फतवे में मुफ्तियों ने बिना बुर्के के मुस्लिम महिलाओं का किसी भी आयोजन में शिरकत करने को इस्लाम के खिलाफ बताया था।
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