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इनकम टैक्स के मुख्य आयुक्त ने किया दारुल उलूम का दौरा
Updated Wed, 10 Oct 2018 12:24 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। आयकर विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम का दौरा किया। इस दौरान संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
आयकर विभाग के मुख्य आयुक्त रजनीकांत गुप्ता, संयुक्त आयुक्त राजेश कुमार, जेपी सिंह और रजनीकांत गुप्ता की पत्नी शाम करीब चार बजे दारुल उलूम पहुंचे। जहां उन्होंने मेहमानखाने में मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की। इस दौरान मोहतमिम ने देवबंदी उलमा, संस्था में दी जानी वाली शिक्षा, छात्रों के रहन सहन और उनकी संख्या के बारे में जानकारी दी। साथ ही बताया कि दारुल उलूम डेढ़ सौ वर्ष पूर्व स्थापित किया गया। जिसका पूरा निजाम चंदा पर चलता है। यहां तालीम हासिल करने वालों छात्रों को रहने खाने के साथ साथ नि:शुल्क पुस्तकें दी जाती हैं और चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। रजनीकांत गुप्ता ने कहा कि उनकी बहुत पहले से इच्छा थी कि वह दारुल उलूम का दौरा करें जो आज पूरी हुई है। कहा कि दारुल उलूम के बारे में जितना सुना और पढ़ा था यह उससे कहीं अधिक है। मोहतमिम से वार्ता के बाद उन्होंने पुस्तकालय में जाकर ऐतिहासिक पुस्तकों को देखा और उनकी जानकारी ली। एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया और नई लाइब्रेरी का दौरा भी किया। इस मौके पर तंजीम-ओ-तरक्की विभाग के अशरफ उस्मानी, नैय्यर उस्मानी, मौलाना शफीकुर्रहमान, मौलाना रजी आदि मौजूद रहे।
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आयकर विभाग के मुख्य आयुक्त रजनीकांत गुप्ता, संयुक्त आयुक्त राजेश कुमार, जेपी सिंह और रजनीकांत गुप्ता की पत्नी शाम करीब चार बजे दारुल उलूम पहुंचे। जहां उन्होंने मेहमानखाने में मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की। इस दौरान मोहतमिम ने देवबंदी उलमा, संस्था में दी जानी वाली शिक्षा, छात्रों के रहन सहन और उनकी संख्या के बारे में जानकारी दी। साथ ही बताया कि दारुल उलूम डेढ़ सौ वर्ष पूर्व स्थापित किया गया। जिसका पूरा निजाम चंदा पर चलता है। यहां तालीम हासिल करने वालों छात्रों को रहने खाने के साथ साथ नि:शुल्क पुस्तकें दी जाती हैं और चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। रजनीकांत गुप्ता ने कहा कि उनकी बहुत पहले से इच्छा थी कि वह दारुल उलूम का दौरा करें जो आज पूरी हुई है। कहा कि दारुल उलूम के बारे में जितना सुना और पढ़ा था यह उससे कहीं अधिक है। मोहतमिम से वार्ता के बाद उन्होंने पुस्तकालय में जाकर ऐतिहासिक पुस्तकों को देखा और उनकी जानकारी ली। एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया और नई लाइब्रेरी का दौरा भी किया। इस मौके पर तंजीम-ओ-तरक्की विभाग के अशरफ उस्मानी, नैय्यर उस्मानी, मौलाना शफीकुर्रहमान, मौलाना रजी आदि मौजूद रहे।
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