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ढूंढे नहीं मिल रहे है शराब के दुकानों के ठेकेदार
Updated Thu, 27 Sep 2018 12:26 AM IST
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सहारनपुर। मंडल के तीन जिलों में अंग्रेजी और देसी शराब की दुकानों के लिए ठेकेदार ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। आबकारी महकमा अब चौथी बार यानि अंतिम बार 60 दुकानों आवंटन के लिए लाटरी डालने की तैयारी में है। सूत्रों की माने तो पर्दे के पीछे से तो काफी लोगों ठेका लेने की जुगत में लगे है, क्योंकि सामने आने पर उन्हें काला धन पकड़ने का डर सता रहा है। विभागीय अधिकारी भी इस तथ्य को नहीं नकार रहे हैं। बड़ी बात यह है कि इतनी संख्या में दुकानों का आवंटन न होने के बावजूद भी राजस्व में इस साल 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई हैं।
मंडल के तीन जिलों सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिले में 818 शराब की दुकानें हैं। इनमें देसी की 442, अंग्रेजी की 179, बीयर की 173 और 14 मॉडल शॉप है। इनमें से अभी 60 दुकानों का आवंटन नहीं हो पाया है। मुजफ्फरनगर में अंग्रेजी और देसी की दो, शामली में आठ देसी और एक बीयर की दुकान शामिल हैं। बाकी दुकानें सहारनपुर जिले की है। आबकारी महकमा इन ठेकों के लिए पहले तीन बार आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर चुका है, लेकिन इन ठेकों के लिए आवेदन न होने के कारण उनका आवंटन नहीं हो सका है। इस वित्तीय वर्ष के छह माह बीत चुके हैं। आबकारी महकमा इन दुकानों के आवंटन के लिए चौथी बार लाटरी डालने की तैयारी में लगा है। आबकारी सूत्रों के मुताबिक दुकान लेने वाले तो काफी लोग है, मगर नंबर वन में भुगतान करने की स्थिति में वह इनकम टैक्स विभाग की नजर में आने का डर सता रहा है, क्योंकि अधिकांश ने अपनी संपत्ति को कम दर्शाया है। इन ठेकों के आवंटन के बाद जिले में पिछले साल के मुकाबले राजस्व में कमी के बजाए वृद्धि हुई हैं। इस कारण भी आबकारी अधिकारियों को ठेके के आवंटन को लेकर ज्यादा दबाव नहीं है।
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मंडल में बढ़ा 34 प्रतिशत राजस्व
सहारनपुर मंडल के तीनों जिलों में भले ही आधा वित्तीय वर्ष पूरा होने के बाद 60 ठेकों का आवंटन नहीं हो पाया हो, लेकिन राजस्व में पिछले साल के मुकाबले राजस्व में 34 प्रतिशत वृद्धि हुई है। पिछले साल राजस्व 625 करोड़ था, जो इस बार बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
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सहारनपुर मंडल की चार अंग्रेजी समेत देसी शराब के ठेकों का आवंटन नहीं हो सका है। एक बार फिर से इन ठेकों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यदि इस बार भी ठेकेदार नहीं आए तो इन ठेकों का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।
--राकेश चतुर्वेदी, आबकारी आयुक्त सहारनपुर मंडल।
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मंडल के तीन जिलों सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिले में 818 शराब की दुकानें हैं। इनमें देसी की 442, अंग्रेजी की 179, बीयर की 173 और 14 मॉडल शॉप है। इनमें से अभी 60 दुकानों का आवंटन नहीं हो पाया है। मुजफ्फरनगर में अंग्रेजी और देसी की दो, शामली में आठ देसी और एक बीयर की दुकान शामिल हैं। बाकी दुकानें सहारनपुर जिले की है। आबकारी महकमा इन ठेकों के लिए पहले तीन बार आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर चुका है, लेकिन इन ठेकों के लिए आवेदन न होने के कारण उनका आवंटन नहीं हो सका है। इस वित्तीय वर्ष के छह माह बीत चुके हैं। आबकारी महकमा इन दुकानों के आवंटन के लिए चौथी बार लाटरी डालने की तैयारी में लगा है। आबकारी सूत्रों के मुताबिक दुकान लेने वाले तो काफी लोग है, मगर नंबर वन में भुगतान करने की स्थिति में वह इनकम टैक्स विभाग की नजर में आने का डर सता रहा है, क्योंकि अधिकांश ने अपनी संपत्ति को कम दर्शाया है। इन ठेकों के आवंटन के बाद जिले में पिछले साल के मुकाबले राजस्व में कमी के बजाए वृद्धि हुई हैं। इस कारण भी आबकारी अधिकारियों को ठेके के आवंटन को लेकर ज्यादा दबाव नहीं है।
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मंडल में बढ़ा 34 प्रतिशत राजस्व
सहारनपुर मंडल के तीनों जिलों में भले ही आधा वित्तीय वर्ष पूरा होने के बाद 60 ठेकों का आवंटन नहीं हो पाया हो, लेकिन राजस्व में पिछले साल के मुकाबले राजस्व में 34 प्रतिशत वृद्धि हुई है। पिछले साल राजस्व 625 करोड़ था, जो इस बार बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
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सहारनपुर मंडल की चार अंग्रेजी समेत देसी शराब के ठेकों का आवंटन नहीं हो सका है। एक बार फिर से इन ठेकों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यदि इस बार भी ठेकेदार नहीं आए तो इन ठेकों का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।
--राकेश चतुर्वेदी, आबकारी आयुक्त सहारनपुर मंडल।