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डेंगू को रोकने में सहयोगी बनेगी गैंबूसिया मछली
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:30 AM IST
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सहारनपुर। डेंगू और मलेरिया के मच्छर को पनपने से पहले ही खत्म करने की तैयारी चिकित्सा विभाग ने कर ली है। इस अभियान में गैंबूसिया मछली विभाग की सहयोगी बनेगी । हरिद्वार से खरीदी गई इन मछलियों को विभाग तालाबों में छोड़ेगा, जहां मछलियां मच्छर के लार्वा को अपनी खुराक बनाकर मच्छरों का पनपने से रोकेगी। मछली छोड़ने की शुरूआत मंगलवार को जिला अस्पताल से कर दी गई। यहां जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शिवांका गौड़ की देखरेख में कर्मचारियों ने पानी की टंकी के नीचे बने गड्ढे में मछलियां छोड़कर की।
डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि यह समय मच्छरों की पैदावार का है, जिसमें तालाबों, नालों और नालियों में मच्छर का लार्वा बड़ी संख्या में पनपकर मच्छर का रूप ले रहा है। यही लार्वा मच्छर बनने के बाद लोगों में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने की वजह बनता है। ऐसे में चिकित्सा विभाग ने तालाबों में गैंबूसिया मछली छोड़ने का निर्णय लिया है। मच्छर का लार्वा इस मछली का पसंदीदा भोजन है। मछलियां मंगा ली गई हैं। पहले चरण में देवबंद के बाला सुंदरी स्थित दस बीघा तालाब में मछली छोड़ी जा रही, जिसके बाद अंबेहटा में मछली छोड़ने की योजना है। दूसरे चरण में नकुड़ और गंगोह के तालाबों में यह मछलियां छोड़ी जाएंगी। शहर में तालाब की तलाश की जा रही है। उन्होंने मछलियों को छोड़ने की शुरूआत मंगलवार को जिला अस्पताल में टंकी के नीचे बने गड्ढे से की। उन्होंने उम्मीद जताई कि गैंबूसिया मछली को तालाबों में छोड़ने का विभाग का प्रयास सफल होगा।
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विभाग ने हरिद्वार से बड़ी संख्या में गैंबूसिया मछलियां मंगाई हैं, जिनको तालाबों में छोड़ा जाएगा। यह मछली मच्छर के लार्वा को खाकर मच्छरों को पनपने से रोकेंगी। ऐसे प्रयास पहले भी किए गए हैं, जो सफल रहे थे। इस बार भी हमें उम्मीद है कि हम मछलियों के सहयोग से मच्छरों को पनपने से पहले ही खत्म करने में सफल रहेंगे।
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डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।
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डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि यह समय मच्छरों की पैदावार का है, जिसमें तालाबों, नालों और नालियों में मच्छर का लार्वा बड़ी संख्या में पनपकर मच्छर का रूप ले रहा है। यही लार्वा मच्छर बनने के बाद लोगों में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने की वजह बनता है। ऐसे में चिकित्सा विभाग ने तालाबों में गैंबूसिया मछली छोड़ने का निर्णय लिया है। मच्छर का लार्वा इस मछली का पसंदीदा भोजन है। मछलियां मंगा ली गई हैं। पहले चरण में देवबंद के बाला सुंदरी स्थित दस बीघा तालाब में मछली छोड़ी जा रही, जिसके बाद अंबेहटा में मछली छोड़ने की योजना है। दूसरे चरण में नकुड़ और गंगोह के तालाबों में यह मछलियां छोड़ी जाएंगी। शहर में तालाब की तलाश की जा रही है। उन्होंने मछलियों को छोड़ने की शुरूआत मंगलवार को जिला अस्पताल में टंकी के नीचे बने गड्ढे से की। उन्होंने उम्मीद जताई कि गैंबूसिया मछली को तालाबों में छोड़ने का विभाग का प्रयास सफल होगा।
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विभाग ने हरिद्वार से बड़ी संख्या में गैंबूसिया मछलियां मंगाई हैं, जिनको तालाबों में छोड़ा जाएगा। यह मछली मच्छर के लार्वा को खाकर मच्छरों को पनपने से रोकेंगी। ऐसे प्रयास पहले भी किए गए हैं, जो सफल रहे थे। इस बार भी हमें उम्मीद है कि हम मछलियों के सहयोग से मच्छरों को पनपने से पहले ही खत्म करने में सफल रहेंगे।
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डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।