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मुस्लिम महिला का राखी बांधना नाजायज : उलमा

Tue, 28 Aug 2018 12:26 AM IST
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:26 AM IST
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मुस्लिम महिला का राखी बांधना नाजायज : उलमा
देवबंद (सहारनपुर)। रक्षाबंधन पर्व पर देवबंद कोतवाल को मुस्लिम महिला द्वारा राखी बांधने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। देवबंदी उलमा का कहना है कि मुस्लिम महिला का राखी बांधना नाजायज है। क्योंकि इस्लाम में महिलाओं को पर्दे से बाहर निकलने और गैर मर्द के बदन को छूने की इजाजत नहीं है।
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मदरसा दारुल उलूम निसवा के नायब मोहतमिम मौलाना नजीफ कासमी का कहना है कि राखी बांधना बंधवाना और टीका लगाने की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। जो लोग ऐसा कर रहे हैं वो इस्लाम से दूर होने के साथ साथ जबरदस्ती इस्लाम के अंदर इन चीजों को शामिल कर रहे हैं। जो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि हदीस में आया है कि जिसने किसी कौम की परंपराओं को अपनाया वो उसी कौम में से है इस्लाम से नहीं। मुफ्ती तारिक का कहना है कि राखी बांधने वाली महिला ने जो किया वो गैर शरई है। इस्लाम में इसकी जरा भी गुंजाइश नहीं है। इसलिए महिला को अपने किए की तौबा करनी चाहिए। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि इस्लाम धर्म मुस्लिम महिलाओं को राखी बांधने और टीका लगाने की इजाजत नहीं देता। क्योंकि ऐसा करने से बेपर्दगी होती है और राखी बांधने के लिए गैर मर्द के बदन को छूना पड़ता है, जबकि इस्लाम में गैर महरम को छूना या बिना पर्दे के उसके सामने जाने को नाजायज करार दिया गया है।
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