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रिहायशी इलाकों में खड़े कर दिए व्यावसायिक भवन
Updated Tue, 03 Jul 2018 12:13 AM IST
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रिहायशी इलाकों में खड़े कर दिए व्यावसायिक भवन
सहारनपुर। रिहायशी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर व्यावसायिक भवन खड़े कर दिए गए हैं। कहीं प्राधिकरण की अनुमति से तो कहीं अवैध तरीके से यह निर्माण किया गया। इतना ही नहीं, प्राधिकरण की नाक के नीचे हकीकतनगर और मिशन कंपाउंड सहित कई कालोनियों में भी मकान तोड़कर तीन से चार मंजिला तक शॉपिंग और आफिस कांप्लेक्स बना दिए गए। इस मामले में लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं की गई है।
आवास विकास कालोनी, जिसका नाम ही आवास से जुड़ा है। यह कालोनी रिहायशी होनी चाहिए। लेकिन क्षेत्र के लोगों ने मानकों का उल्लंघन करते हुए गली-गली में व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोल लिए हैं। कुछ जगहों पर तो पूरी मार्केट ही बना ली गई है। आवास विकास में पिछले करीब 15 साल से आवासीय भवनों को तोड़कर व्यावसायिक भवनों के रूप में विकसित करने का सिलसिला जारी है। दूसरी ओर, आवास विकास परिषद की ओर से बनाई गई दुकानें वर्षों से बंद पड़ी हैं, जो जर्जर हो चुकी हैं।
उधर, विकास प्राधिकरण से मुश्किल से 200 मीटर की दूरी पर हकीकत नगर और 500 मीटर दूर मिशन कंपाउंड में भी ऐसे ही हालात हैं, जहां जगह-जगह पुराने मकान तोड़कर दुकानों के साथ ही बहुमंजिला शॉपिंग और ऑफिस कांप्लेक्स खड़े कर दिए गए हैं। इन भवनों का नक्शा विकास प्राधिकरण से पास होने की बात कही जा रही है।
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सवाल यह है कि रिहायशी कालोनी में व्यावसायिक भवनों के नक्शे कैसे पास कर दिए गए। गिल कॉलोनी, नुमाइश कैंप, खाताखेड़ी समेत अनेक कॉलोनियां इसकी उदाहरण हैं, जहां आवास के लिए आवंटित प्लॉट्स में व्यावसायिक भवन तैयार कर दिए गए हैं। प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि नक्शा पास करते समय यह देखा जाता है कि प्लॉट की रजिस्ट्री कि इस्तेमाल के लिए हुई है। अगर व्यावसायिक हुई है तो व्यावसायिक भवन का नक्शा पास होगा और यदि आवासीय के लिए हुई है तो आवासीय भवन का नक्शा पास होगा। यह भी बताया कि नए मास्टर प्लान में व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र अलग-अलग रखे गए हैं। इसके अलावा पूर्व से स्थापित कॉलोनियों में डेली यूज के सामान की छोटी दुकानें खोली जा सकती हैं।
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कॉलोनीवासियों को रहती है परेशानी
व्यावसायिक गतिविधियों ने कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का चैन छीना हुआ है क्योंकि व्यावसायिक भवनों में रात के 12 बजे तक और कई बार पूरी रात तक गतिविधियां होने की वजह से शोर-शराबा रहता है। साथ ही कई इलाकों में कुटीर उद्योग भी कॉलोनियों के बीच में चल रहे हैं। इनके शोर से भी लोग परेशान हैं। आवास विकास निवासी आशीष गुप्ता का कहना है कि व्यावसायिक भवन रिहायशी क्षेत्र से अलग ही होने चाहिएं। मिशन कंपाउंड निवासी संदीप और मुकेश ने भी व्यावसायिक गतिविधियों से परेशानी रहने की बात कही है। शिकायत पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है।
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मैने यहां अभी ज्वाइन किया है। यहां की आवासीय कालोनियों की स्थिति से पूरी तरह वाकिफ नहीं हुईं। संबंधित अभियंताओं से रिपोर्ट मांगी जाएगी। नियमों के विपरीत किए जा रहे व्यावसायिक निर्माण कार्यों पर अंकुश लगाया जाएगा। जांच कराकर भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी होगी।
मुकेश यादव, अधिशासी अभियंता, आवास विकास परिषद।
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आवासीय कॉलोनियों में मकानों तो तोड़कर व्यावसायिक के रूप में विकसित किया जाना नियम के विरुद्घ है। ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी। साथ ही गलत पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसमें भवनों का ध्वस्तीकरण भी शामिल है।
-ज्ञानेंद्र सिंह, कार्यवाहक उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण।
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सहारनपुर। रिहायशी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर व्यावसायिक भवन खड़े कर दिए गए हैं। कहीं प्राधिकरण की अनुमति से तो कहीं अवैध तरीके से यह निर्माण किया गया। इतना ही नहीं, प्राधिकरण की नाक के नीचे हकीकतनगर और मिशन कंपाउंड सहित कई कालोनियों में भी मकान तोड़कर तीन से चार मंजिला तक शॉपिंग और आफिस कांप्लेक्स बना दिए गए। इस मामले में लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं की गई है।
आवास विकास कालोनी, जिसका नाम ही आवास से जुड़ा है। यह कालोनी रिहायशी होनी चाहिए। लेकिन क्षेत्र के लोगों ने मानकों का उल्लंघन करते हुए गली-गली में व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोल लिए हैं। कुछ जगहों पर तो पूरी मार्केट ही बना ली गई है। आवास विकास में पिछले करीब 15 साल से आवासीय भवनों को तोड़कर व्यावसायिक भवनों के रूप में विकसित करने का सिलसिला जारी है। दूसरी ओर, आवास विकास परिषद की ओर से बनाई गई दुकानें वर्षों से बंद पड़ी हैं, जो जर्जर हो चुकी हैं।
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उधर, विकास प्राधिकरण से मुश्किल से 200 मीटर की दूरी पर हकीकत नगर और 500 मीटर दूर मिशन कंपाउंड में भी ऐसे ही हालात हैं, जहां जगह-जगह पुराने मकान तोड़कर दुकानों के साथ ही बहुमंजिला शॉपिंग और ऑफिस कांप्लेक्स खड़े कर दिए गए हैं। इन भवनों का नक्शा विकास प्राधिकरण से पास होने की बात कही जा रही है।
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सवाल यह है कि रिहायशी कालोनी में व्यावसायिक भवनों के नक्शे कैसे पास कर दिए गए। गिल कॉलोनी, नुमाइश कैंप, खाताखेड़ी समेत अनेक कॉलोनियां इसकी उदाहरण हैं, जहां आवास के लिए आवंटित प्लॉट्स में व्यावसायिक भवन तैयार कर दिए गए हैं। प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि नक्शा पास करते समय यह देखा जाता है कि प्लॉट की रजिस्ट्री कि इस्तेमाल के लिए हुई है। अगर व्यावसायिक हुई है तो व्यावसायिक भवन का नक्शा पास होगा और यदि आवासीय के लिए हुई है तो आवासीय भवन का नक्शा पास होगा। यह भी बताया कि नए मास्टर प्लान में व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र अलग-अलग रखे गए हैं। इसके अलावा पूर्व से स्थापित कॉलोनियों में डेली यूज के सामान की छोटी दुकानें खोली जा सकती हैं।
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कॉलोनीवासियों को रहती है परेशानी
व्यावसायिक गतिविधियों ने कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का चैन छीना हुआ है क्योंकि व्यावसायिक भवनों में रात के 12 बजे तक और कई बार पूरी रात तक गतिविधियां होने की वजह से शोर-शराबा रहता है। साथ ही कई इलाकों में कुटीर उद्योग भी कॉलोनियों के बीच में चल रहे हैं। इनके शोर से भी लोग परेशान हैं। आवास विकास निवासी आशीष गुप्ता का कहना है कि व्यावसायिक भवन रिहायशी क्षेत्र से अलग ही होने चाहिएं। मिशन कंपाउंड निवासी संदीप और मुकेश ने भी व्यावसायिक गतिविधियों से परेशानी रहने की बात कही है। शिकायत पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है।
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मैने यहां अभी ज्वाइन किया है। यहां की आवासीय कालोनियों की स्थिति से पूरी तरह वाकिफ नहीं हुईं। संबंधित अभियंताओं से रिपोर्ट मांगी जाएगी। नियमों के विपरीत किए जा रहे व्यावसायिक निर्माण कार्यों पर अंकुश लगाया जाएगा। जांच कराकर भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी होगी।
मुकेश यादव, अधिशासी अभियंता, आवास विकास परिषद।
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आवासीय कॉलोनियों में मकानों तो तोड़कर व्यावसायिक के रूप में विकसित किया जाना नियम के विरुद्घ है। ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी। साथ ही गलत पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसमें भवनों का ध्वस्तीकरण भी शामिल है।
-ज्ञानेंद्र सिंह, कार्यवाहक उपाध्यक्ष, विकास प्राधिकरण।