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बढ़िया उत्पादन ने बढ़ाया जिले में तिलहन का रकबा
Updated Sat, 21 Apr 2018 12:34 AM IST
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सहारनपुर। बढ़िया उत्पादन के चलते जिले में लगातार तिलहन के रकबे में बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्ष 2015-16 में जनपद में जहां 7655 हेक्टेयर में इसकी खेती हो रही थी वह इस बार बढ़कर 11150 हेक्टेयर हो गई है। तिलहन में राई, सरसों, तोरिया और मूंगफली की खेती शामिल हैं।
कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को उत्तम खेती करने के दिए जा रहे टिप्स का असर सामने आने लगा है। इसके चलते न सिर्फ प्रति बीघा उत्पादन बढ़ा है वहीं किसानों का रुझान भी तिलहन की खेती की ओर लगातार बढ़ रहा है। जिले में वर्ष 2015-16 में जहां 7655 हेक्टेयर में तिलहन की खेती हो रही थी। वह 2017-18 में बढ़कर 11150 हेक्टेयर हो गई है। गांव नल्हेड़ा के किसान सिकंदर सिंह और साल्हापुर के सुखवीर सिंह राठी का कहना है कि नई प्रजातियों की उपलब्धता और तकनीक के चलते तिलहन का उत्पादन बढ़ा है। इसके अलावा किसान अब तिलहन की मुख्य फसल सरसों की खेती को गंभीरता से कर रहे हैं। साथ ही पिछले कई वर्षों से मौसम इन फसलों का साथ दे रहा है। उन्होंने बताया कि पहले किसान सरसों की फसल में छंटाई कम करते थे। जिससे उसके उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। अब कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर किसान सरसों की छंटाई पर अधिक जोर दे रहे हैं। इससे सरसों का पौधे को अधिक जगह मिलती है और उस पर फल भी अच्छा आता है।
जिले में तिलहन का रकबा
वर्ष रकबा हेक्टेयर
2015-16 7655
2016-17 9546
2017-18 11150
बढ़िया उत्पादन के चलते जिले में किसानों का रुझान तिलहन की खेती की ओर बढ़ रहा है। इसके चलते पिछले तीन वर्षों से इसके रकबे में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। मौसम के साथ ही नई प्रजातियों और तकनीक की इसमें बड़ी भूमिका है।
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- राजीव कुमार, उप निदेशक कृषि।
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कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को उत्तम खेती करने के दिए जा रहे टिप्स का असर सामने आने लगा है। इसके चलते न सिर्फ प्रति बीघा उत्पादन बढ़ा है वहीं किसानों का रुझान भी तिलहन की खेती की ओर लगातार बढ़ रहा है। जिले में वर्ष 2015-16 में जहां 7655 हेक्टेयर में तिलहन की खेती हो रही थी। वह 2017-18 में बढ़कर 11150 हेक्टेयर हो गई है। गांव नल्हेड़ा के किसान सिकंदर सिंह और साल्हापुर के सुखवीर सिंह राठी का कहना है कि नई प्रजातियों की उपलब्धता और तकनीक के चलते तिलहन का उत्पादन बढ़ा है। इसके अलावा किसान अब तिलहन की मुख्य फसल सरसों की खेती को गंभीरता से कर रहे हैं। साथ ही पिछले कई वर्षों से मौसम इन फसलों का साथ दे रहा है। उन्होंने बताया कि पहले किसान सरसों की फसल में छंटाई कम करते थे। जिससे उसके उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। अब कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर किसान सरसों की छंटाई पर अधिक जोर दे रहे हैं। इससे सरसों का पौधे को अधिक जगह मिलती है और उस पर फल भी अच्छा आता है।
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जिले में तिलहन का रकबा
वर्ष रकबा हेक्टेयर
2015-16 7655
2016-17 9546
2017-18 11150
बढ़िया उत्पादन के चलते जिले में किसानों का रुझान तिलहन की खेती की ओर बढ़ रहा है। इसके चलते पिछले तीन वर्षों से इसके रकबे में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। मौसम के साथ ही नई प्रजातियों और तकनीक की इसमें बड़ी भूमिका है।
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- राजीव कुमार, उप निदेशक कृषि।