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जिले में हर साल बढ़ रहे एचआईवी पॉजिटिव मरीज
Updated Sat, 01 Dec 2018 12:20 AM IST
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सहारनपुर। आज विश्व एड्स दिवस है। एड्स यानी एक ऐसी बीमारी, जिसका नाम सुनने भर से इंसान की रूह कांप जाए। सहारनपुर में भी यह बीमारी बड़ा रूप लेती जा रही है। प्रत्येक वर्ष एचआईवी पॉजिटिव मरीज सामने आ रहे हैं। नवंबर 2018 तक के आंकड़ों पर गौर करें, तो यहां एआरटी (एंट्री रेट्रोवायरस ट्रीटमेंट) सेंटर में 1675 से मरीज दर्ज हो चुके हैं।
एचआईवी पॉजिटिव के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होने की एक बड़ी वजह बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक नहीं किया जाना भी है। एचआईवी पॉजिटिव सबसे अधिक मामले देहात क्षेत्रों के हैं, जहां अज्ञानता और बीमारी के प्रति जागरूकता कम है। आंकड़े उठाकर देखें तो वर्ष 2015 में एचआईवी पॉजिटिव के कुल 186 मामले सामने आए थे। उम्मीद थी कि विभाग जन जागरूकता के लिए कदम उठाएगा, जिससे मरीजों के आंकड़े को कम किया जा सके, मगर ठीक अगले वर्ष 2016 में 191 मरीज सामने आए। वर्ष 2017 में कुल 202 नए मरीज सामने आए। जनवरी से अगस्त 2018 तक 226 नए मरीज सामने आए थे। वर्तमान में एआरटी में दर्ज मरीजों की संख्या 1675 है।
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गंभीर मरीजों को भेजते हैं मेरठ
एसबीडी जिला अस्पताल में बने एआरटी सेंटर में वर्ष 2013 वायरस लोड मापने की मशीन लगाई गई थी, जिसके बाद से मरीजों की यहीं जांच कर इलाज दिया जाने लगा है। इससे पहले मरीजों को मेडिकल कॉलेज मेरठ भेजा जाता था, जहां जांच और इलाज दोनों मिलते थे। मगर मशीन लगने के बाद ज्यादातर मरीज यहीं इलाज पा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि गंभीर मरीजों को अब भी मेरठ ही भेजा जाता है।
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बीमारी की गिरफ्त में बच्चे भी
एआरटी सेंटर में इलाज पा रहे एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1675 से अधिक है। खास बात यह है कि इसमें करीब 80 मरीज ऐसे हैं, जो दस वर्ष से कम आयु के बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें जन्मजात यह बीमारी मिली है। एचआईवी पॉजिटिव बच्चे सामने की स्थिति चौंकाने वाली है। विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों में 18 माह की उम्र पूरा होने के बाद एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चलता है।
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एड्स फैलने के कारण
- संक्रमित व्यक्ति को लगाई गई सुई लगाने से।
- असुरक्षित यौन संबंध बनाने से।
- संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ाने से।
- संक्रमित व्यक्ति को इस्तेमाल किए गए ब्लेड से सेविंग करना आदि।
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एड्स के प्रारंभिक लक्षण
- वजह कम होना और खांसी का लगातार बने रहना।
- बार-बार जुकाम होना तथा बुखार और सिरदर्द होना।
- शरीर पर निशान बनना और थकान रहना।
- हैजा होना, भोजन के प्रति अरुचि होना आदि।
----- वर्जन -----
वर्तमान में हमारे पास एचआईवी पॉजिटिव के 1675 मरीज दर्ज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। एआरटी सेंटर में एचआईवी की जांच के लिए हमारे पास मशीन और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है। गंभीर मरीजों को ही मेरठ भेजा जाता है। जन जागरूकता के लिए जो भी निर्देश मिलते हैं उनका अनुपालन कराया जाता रहा है। -- शिवकांत यादव, एआरटी सेंटर काउंसलर।
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एचआईवी पॉजिटिव के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होने की एक बड़ी वजह बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक नहीं किया जाना भी है। एचआईवी पॉजिटिव सबसे अधिक मामले देहात क्षेत्रों के हैं, जहां अज्ञानता और बीमारी के प्रति जागरूकता कम है। आंकड़े उठाकर देखें तो वर्ष 2015 में एचआईवी पॉजिटिव के कुल 186 मामले सामने आए थे। उम्मीद थी कि विभाग जन जागरूकता के लिए कदम उठाएगा, जिससे मरीजों के आंकड़े को कम किया जा सके, मगर ठीक अगले वर्ष 2016 में 191 मरीज सामने आए। वर्ष 2017 में कुल 202 नए मरीज सामने आए। जनवरी से अगस्त 2018 तक 226 नए मरीज सामने आए थे। वर्तमान में एआरटी में दर्ज मरीजों की संख्या 1675 है।
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गंभीर मरीजों को भेजते हैं मेरठ
एसबीडी जिला अस्पताल में बने एआरटी सेंटर में वर्ष 2013 वायरस लोड मापने की मशीन लगाई गई थी, जिसके बाद से मरीजों की यहीं जांच कर इलाज दिया जाने लगा है। इससे पहले मरीजों को मेडिकल कॉलेज मेरठ भेजा जाता था, जहां जांच और इलाज दोनों मिलते थे। मगर मशीन लगने के बाद ज्यादातर मरीज यहीं इलाज पा रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि गंभीर मरीजों को अब भी मेरठ ही भेजा जाता है।
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बीमारी की गिरफ्त में बच्चे भी
एआरटी सेंटर में इलाज पा रहे एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1675 से अधिक है। खास बात यह है कि इसमें करीब 80 मरीज ऐसे हैं, जो दस वर्ष से कम आयु के बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें जन्मजात यह बीमारी मिली है। एचआईवी पॉजिटिव बच्चे सामने की स्थिति चौंकाने वाली है। विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों में 18 माह की उम्र पूरा होने के बाद एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चलता है।
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एड्स फैलने के कारण
- संक्रमित व्यक्ति को लगाई गई सुई लगाने से।
- असुरक्षित यौन संबंध बनाने से।
- संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ाने से।
- संक्रमित व्यक्ति को इस्तेमाल किए गए ब्लेड से सेविंग करना आदि।
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एड्स के प्रारंभिक लक्षण
- वजह कम होना और खांसी का लगातार बने रहना।
- बार-बार जुकाम होना तथा बुखार और सिरदर्द होना।
- शरीर पर निशान बनना और थकान रहना।
- हैजा होना, भोजन के प्रति अरुचि होना आदि।
----- वर्जन -----
वर्तमान में हमारे पास एचआईवी पॉजिटिव के 1675 मरीज दर्ज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। एआरटी सेंटर में एचआईवी की जांच के लिए हमारे पास मशीन और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है। गंभीर मरीजों को ही मेरठ भेजा जाता है। जन जागरूकता के लिए जो भी निर्देश मिलते हैं उनका अनुपालन कराया जाता रहा है। -- शिवकांत यादव, एआरटी सेंटर काउंसलर।