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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी का इंतकाल
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:08 AM IST
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना कासमी का इंतकाल
देवबंद(सहारनपुर)। दारुल उलूम वक्फ के सदर मोहतमिम व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को इंतकाल हो गया। वह 94 वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।
विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के संस्थापक हजरत मौलाना कासिम नानौतवी के परपोते व मौलाना कारी मोहम्मद तैय्यब के बेटे मौलाना सालिम कासमी पिछले लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनका मोहल्ला बड़जियाउलहक स्थित आवास पर ही इलाज चल रहा था। शनिवार की दोपहर करीब 2 बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही इस्लामिक हल्कों में शोक की लहर दौड़ गई। देखते ही देखते उनके आवास पर हजारों मदरसा छात्रों और नगरवासियों का तांता लग गया। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी, नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिद मद्रासी, बिहार से सांसद व दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना असरारुलहक कासमी और सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल समेत प्रमुख उलमा उनके आवास पर पहुंचे और उनके इंतकाल पर गहरा दुख जताया। 80 के दशक में दारुल उलूम पर कब्जे की घटना के बाद मौलाना सालिम कासमी ने भारी विरोध के बाद अपने विशेष सहयोगियों के साथ मिलकर जामा मस्जिद में दारुल उलूम वक्फ की स्थापना की। उनका लगाया हुआ छोटा सा पेड़ आज बड़ा वृक्ष बन गया है। दारुल उलूम वक्फ का नाम दीनी तालीम के दूसरे सबसे बड़े इदारे के तौर पर लिया जाता है। उलमा उनके इंतकाल को इस्लामिक हल्कों के लिए बड़ी क्षति बता रहे हैं। रात्रि करीब 10 बजे दारुल उलूम की आहत-ए-मोलसरी में उनकी नमाज-ए-जनाजा अदा की गई। जिसमें हजारों की तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया। बाद में उन्हें मजार-ए-कासमी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
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देवबंद(सहारनपुर)। दारुल उलूम वक्फ के सदर मोहतमिम व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को इंतकाल हो गया। वह 94 वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।
विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के संस्थापक हजरत मौलाना कासिम नानौतवी के परपोते व मौलाना कारी मोहम्मद तैय्यब के बेटे मौलाना सालिम कासमी पिछले लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनका मोहल्ला बड़जियाउलहक स्थित आवास पर ही इलाज चल रहा था। शनिवार की दोपहर करीब 2 बजकर 20 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही इस्लामिक हल्कों में शोक की लहर दौड़ गई। देखते ही देखते उनके आवास पर हजारों मदरसा छात्रों और नगरवासियों का तांता लग गया। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी, नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिद मद्रासी, बिहार से सांसद व दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना असरारुलहक कासमी और सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल समेत प्रमुख उलमा उनके आवास पर पहुंचे और उनके इंतकाल पर गहरा दुख जताया। 80 के दशक में दारुल उलूम पर कब्जे की घटना के बाद मौलाना सालिम कासमी ने भारी विरोध के बाद अपने विशेष सहयोगियों के साथ मिलकर जामा मस्जिद में दारुल उलूम वक्फ की स्थापना की। उनका लगाया हुआ छोटा सा पेड़ आज बड़ा वृक्ष बन गया है। दारुल उलूम वक्फ का नाम दीनी तालीम के दूसरे सबसे बड़े इदारे के तौर पर लिया जाता है। उलमा उनके इंतकाल को इस्लामिक हल्कों के लिए बड़ी क्षति बता रहे हैं। रात्रि करीब 10 बजे दारुल उलूम की आहत-ए-मोलसरी में उनकी नमाज-ए-जनाजा अदा की गई। जिसमें हजारों की तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया। बाद में उन्हें मजार-ए-कासमी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
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