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केवीके किसानों को निशुल्क बांटेगा दस हजार नीम के पौधे
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:26 AM IST
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केवीके किसानों को निशुल्क बांटेगा दस हजार नीम के पौधे
सहारनपुर। खेती में रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने और नीम की खाद से बने कीटनाशकों के प्रयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र जिले के किसानों को दस हजार नीम के पौधे निशुल्क: बांटेगा। इससे जहां सफेद गिडार और दीमक जैसे भूमिगत कीट नियंत्रित होंगे वहीं कई फसलों को निमोटेड रोगों से भी निजात मिल सकेगी।
खेती पर रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते दुष्प्रभाव को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र जैव कीटनाशकों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। इसके लिए नीम के पौधरोपण पर खासा जोर दिया जा रहा है। केवीके अपनी नर्सरी में तैयार 10 हजार नीम के पौधों को जिले के किसानों को निशुल्क वितरित करेगा। नीम से जहां पर्यावरण सुधारने में मदद मिलेगी वहीं, यह हानिकारक कीटों से भी मुक्ति दिलाएगा। नीम की खली से दीमक और सफेद गिडार जैसे हानिकारक कीट नियंत्रित होने के साथ ही निमोटोड जैसे जड़ में लगने वाले रोगों पर पर अंकुश लग सकेगा। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि रासायनिक कीटनाशक पर्यावरण के साथ ही मानव के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। खासतौर पर सब्जी की फसलों पर होने वाले रासायनिक कीटनाशक के छिड़काव का फसल पर एक पखवाडे़ तक असर रहता है। जबकि सब्जी को अधिक से अधिक एक हफ्ते के अंदर तोड़कर बाजार में भेज दिया जाता है। इस सब्जी के खाने से मानव के अंदर कीटनाशकों का असर चला जाता है। इसलिए केवीके नीम के बने जैव कीटनाशकों के प्रयोग करने पर जोर दे रहा है। इसके लिए अपनी नर्सरी में तैयार 10 हजार नीम के पौधे किसानों को निशुल्क वितरित किए जाएंगे।
नीम से बने जैव कीटनाशक एवं खाद के फायदे
सहारनपुर। नीम की खली के प्रयोग से फसलों को पौषक तत्वों की उपलब्धता के साथ ही दीमक और सफेद गिडार जैसे बेहद हानिकारक भूमिगत कीटों पर नियंत्रण भी होता है। इसके अलावा निमोटोड जैसी फसल की जड़ में लगने वाले रोग भी इससे दूर होंगे। केवीके प्रभारी डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि दीमक और सफेद गिडार भूमिगत कीट हैं जो पौधों की मुलायम जड़ों को खाकर फसल को नष्ट कर देती हैं। रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करने से ये कीट भूमि में काफी गहरे चले जाते हैं। कीटनाशकों का असर समाप्त होते ही दोबारा भूमि की सतह पर आने लगते हैं। निमोटोड पौधों की जड़ों में गांठें बना देता है। जिससे पौधे उचित खुराक के अभाव में बौने रह जाते हैं, इसके चलते फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
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सहारनपुर। खेती में रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने और नीम की खाद से बने कीटनाशकों के प्रयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र जिले के किसानों को दस हजार नीम के पौधे निशुल्क: बांटेगा। इससे जहां सफेद गिडार और दीमक जैसे भूमिगत कीट नियंत्रित होंगे वहीं कई फसलों को निमोटेड रोगों से भी निजात मिल सकेगी।
खेती पर रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते दुष्प्रभाव को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र जैव कीटनाशकों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। इसके लिए नीम के पौधरोपण पर खासा जोर दिया जा रहा है। केवीके अपनी नर्सरी में तैयार 10 हजार नीम के पौधों को जिले के किसानों को निशुल्क वितरित करेगा। नीम से जहां पर्यावरण सुधारने में मदद मिलेगी वहीं, यह हानिकारक कीटों से भी मुक्ति दिलाएगा। नीम की खली से दीमक और सफेद गिडार जैसे हानिकारक कीट नियंत्रित होने के साथ ही निमोटोड जैसे जड़ में लगने वाले रोगों पर पर अंकुश लग सकेगा। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि रासायनिक कीटनाशक पर्यावरण के साथ ही मानव के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। खासतौर पर सब्जी की फसलों पर होने वाले रासायनिक कीटनाशक के छिड़काव का फसल पर एक पखवाडे़ तक असर रहता है। जबकि सब्जी को अधिक से अधिक एक हफ्ते के अंदर तोड़कर बाजार में भेज दिया जाता है। इस सब्जी के खाने से मानव के अंदर कीटनाशकों का असर चला जाता है। इसलिए केवीके नीम के बने जैव कीटनाशकों के प्रयोग करने पर जोर दे रहा है। इसके लिए अपनी नर्सरी में तैयार 10 हजार नीम के पौधे किसानों को निशुल्क वितरित किए जाएंगे।
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नीम से बने जैव कीटनाशक एवं खाद के फायदे
सहारनपुर। नीम की खली के प्रयोग से फसलों को पौषक तत्वों की उपलब्धता के साथ ही दीमक और सफेद गिडार जैसे बेहद हानिकारक भूमिगत कीटों पर नियंत्रण भी होता है। इसके अलावा निमोटोड जैसी फसल की जड़ में लगने वाले रोग भी इससे दूर होंगे। केवीके प्रभारी डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि दीमक और सफेद गिडार भूमिगत कीट हैं जो पौधों की मुलायम जड़ों को खाकर फसल को नष्ट कर देती हैं। रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करने से ये कीट भूमि में काफी गहरे चले जाते हैं। कीटनाशकों का असर समाप्त होते ही दोबारा भूमि की सतह पर आने लगते हैं। निमोटोड पौधों की जड़ों में गांठें बना देता है। जिससे पौधे उचित खुराक के अभाव में बौने रह जाते हैं, इसके चलते फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
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