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सर्पदंश से वृद्ध की मौत
Updated Sat, 04 Aug 2018 12:21 AM IST
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नकुड़ (सहारनपुर)। घर में बने पूजाघर में पूजा कर रहे वृद्ध को सांप ने डस लिया। वह बेहोश हो गया। परिजन घटों तक नागदोन व झाड़ फूंक के चक्कर में लगे रहे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उसे सीएचसी ले गये जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
शामली जनपद के गांव खेड़की निवासी 65 वर्षीय पुन्नालाल पुत्र मंसाराम करीब पंद्रह वर्षों से परिवार के साथ गांव टाबर में रह रहा था। बताया जाता है कि शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे वह अपने घर में बने पूजाघर में पूजा कर रहा था। इस दौरान वहां पहले से मौजूद एक सांप ने उसे डस लिया। सांप के काटने से पुन्नामल तुरंत बेहोश हो गया। ग्रामीणों के अनुसार परिजन तुरंत ही उसे गांव के ही एक व्यक्ति के यहां नागदोन लगवाने के लिए ले गये। बताया जाता है कि करीब दो घंटों तक उसे नागदोन लगायी गई, लेकिन कुछ राहत नहीं मिली और पीड़ित व्यक्ति को दिखना भी बंद हो गया। इसके बाद परिजन उसे किसी गांव में झाड़ फूंक के लिए ले गये। झाड़ फूंक से भी कुछ राहत नहीं मिली तो परिजन उसे सीएचसी में ले गये, वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सीएचसी अधीक्षक डा. रोहित वालिया ने बताया कि मृतक के परिजन बिना किसी कानूनी कार्रवाई के ही मृतक को अपने साथ ले गये। देर शाम मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
समय रहते इलाज मिलता तो बच सकी थी जान।
नकुड़। सीएचसी अधीक्षक डा. रोहित वालिया का कहना था कि सीएचसी में सांप के काटने के इलाज संबंधी सभी कारगर दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन परिजन जब उसे सीएचसी लेकर पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी। झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ कर यदि समय रहते परिजनों द्वारा उसे सीएचसी लाया गया होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि मृत घोषित करने के बाद परिजनों ने मृतक का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया और उसे अपने साथ ले गये।
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शामली जनपद के गांव खेड़की निवासी 65 वर्षीय पुन्नालाल पुत्र मंसाराम करीब पंद्रह वर्षों से परिवार के साथ गांव टाबर में रह रहा था। बताया जाता है कि शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे वह अपने घर में बने पूजाघर में पूजा कर रहा था। इस दौरान वहां पहले से मौजूद एक सांप ने उसे डस लिया। सांप के काटने से पुन्नामल तुरंत बेहोश हो गया। ग्रामीणों के अनुसार परिजन तुरंत ही उसे गांव के ही एक व्यक्ति के यहां नागदोन लगवाने के लिए ले गये। बताया जाता है कि करीब दो घंटों तक उसे नागदोन लगायी गई, लेकिन कुछ राहत नहीं मिली और पीड़ित व्यक्ति को दिखना भी बंद हो गया। इसके बाद परिजन उसे किसी गांव में झाड़ फूंक के लिए ले गये। झाड़ फूंक से भी कुछ राहत नहीं मिली तो परिजन उसे सीएचसी में ले गये, वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सीएचसी अधीक्षक डा. रोहित वालिया ने बताया कि मृतक के परिजन बिना किसी कानूनी कार्रवाई के ही मृतक को अपने साथ ले गये। देर शाम मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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समय रहते इलाज मिलता तो बच सकी थी जान।
नकुड़। सीएचसी अधीक्षक डा. रोहित वालिया का कहना था कि सीएचसी में सांप के काटने के इलाज संबंधी सभी कारगर दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन परिजन जब उसे सीएचसी लेकर पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी। झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ कर यदि समय रहते परिजनों द्वारा उसे सीएचसी लाया गया होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि मृत घोषित करने के बाद परिजनों ने मृतक का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया और उसे अपने साथ ले गये।
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