{"_id":"5b41103f4f1c1b92468b52da","slug":"191530990655-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किताबें नहीं मिली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किताबें नहीं मिली
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साढौली कदीम। सरकार के अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा के दावे खोखले होते नजर आ रहे हैं। शिक्षण सत्र के तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी परिषदीय स्कूलों में किताबें तक नहीं पहुंच पायी हैं।
विकास खंड साढ़ौली कदीम के परिषदीय स्कूलों में तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी शासन द्वारा किताबें नहीं भेजी जा सकी हैं। ऐसे में इन स्कूलों में जाने वाले बच्चे कुछ समय खेलकर वापस घर चले आते हैं। विकास खंड में संचालित 42 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगभग चार हजार बच्चे तथा 101 प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 16 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले इन बच्चों का भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अभिभावक रणजीत सिंह, केहर सिंह, मन्नूसिंह, रमेशचंद, किरणपाल, दिलशाद, मो. माजिद, चौ. इरशाद, फुरकान, अफजाल आदि का कहना है कि सरकारी स्कूलों में उनके बच्चों को किताबें ही समय से नहीं मिल पा रही हैं तो पढ़ाई कैसे हो पाएगी। ऐसे में वे अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। उधर खंड शिक्षा अधिकारी प्रभात कुमार का कहना था कि अभी प्राथमिक विद्यालयों की कोई भी पुस्तक शासन स्तर से नहीं पहुंच पाई है। केवल कक्षा सात व आठ की कुछ पुस्तकें आई थीं जिनका वितरण कराया जा रहा है। जल्द पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने की मांग की जा रही है।
विज्ञापन
विकास खंड साढ़ौली कदीम के परिषदीय स्कूलों में तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी शासन द्वारा किताबें नहीं भेजी जा सकी हैं। ऐसे में इन स्कूलों में जाने वाले बच्चे कुछ समय खेलकर वापस घर चले आते हैं। विकास खंड में संचालित 42 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगभग चार हजार बच्चे तथा 101 प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 16 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले इन बच्चों का भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अभिभावक रणजीत सिंह, केहर सिंह, मन्नूसिंह, रमेशचंद, किरणपाल, दिलशाद, मो. माजिद, चौ. इरशाद, फुरकान, अफजाल आदि का कहना है कि सरकारी स्कूलों में उनके बच्चों को किताबें ही समय से नहीं मिल पा रही हैं तो पढ़ाई कैसे हो पाएगी। ऐसे में वे अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। उधर खंड शिक्षा अधिकारी प्रभात कुमार का कहना था कि अभी प्राथमिक विद्यालयों की कोई भी पुस्तक शासन स्तर से नहीं पहुंच पाई है। केवल कक्षा सात व आठ की कुछ पुस्तकें आई थीं जिनका वितरण कराया जा रहा है। जल्द पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने की मांग की जा रही है।
विज्ञापन