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दया धर्म का मूल मंत्र : विरंजन
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:28 AM IST
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दया धर्म का मूल मंत्र : विरंजन
सहारनपुर। जैन मुनि विरंजन सागर महाराज ने कहा कि दया धर्म का मूल मंत्र है, जहां दया का भाव नहीं है, वहां धर्म की जड़ सूखने लगती है।
बड़तला यादगार स्थित अतिथि भवन में सत्संग के दौरान जैन मुनि विरंजन सागर महाराज ने कहा कि जिसके जीवन की नीव में धर्म होगा, उसके जीवन में सुख, शांति और आनंद की हरियाली सदैव रहेगी। इसलिए कहते हैं कि धर्म की जड़ सदा हरी है। जो धर्म की जड़ का सतत चिंतन करता है, उसे जीवन में सुख-शांति के फल मिलते हैं। संजीव जैन, चौधरी सुदेश जैन, पवन जैन, राजीव जैन, सौरभ जैन, अंकुर जैन, चंद्रभान जैन, आशू जैन, अनिल जैन, विपुल जैन, कुलदीप जैन, मुकेश जैन, नवीन जैन, आशीष कुमार जैन, रेणु जैन, शशि जैन, रीना जैन, रजनी जैन, प्रीति जैन, वीना जैन, अंजलि जैन, मंजू जैन आदि मौजूद रहे।
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सहारनपुर। जैन मुनि विरंजन सागर महाराज ने कहा कि दया धर्म का मूल मंत्र है, जहां दया का भाव नहीं है, वहां धर्म की जड़ सूखने लगती है।
बड़तला यादगार स्थित अतिथि भवन में सत्संग के दौरान जैन मुनि विरंजन सागर महाराज ने कहा कि जिसके जीवन की नीव में धर्म होगा, उसके जीवन में सुख, शांति और आनंद की हरियाली सदैव रहेगी। इसलिए कहते हैं कि धर्म की जड़ सदा हरी है। जो धर्म की जड़ का सतत चिंतन करता है, उसे जीवन में सुख-शांति के फल मिलते हैं। संजीव जैन, चौधरी सुदेश जैन, पवन जैन, राजीव जैन, सौरभ जैन, अंकुर जैन, चंद्रभान जैन, आशू जैन, अनिल जैन, विपुल जैन, कुलदीप जैन, मुकेश जैन, नवीन जैन, आशीष कुमार जैन, रेणु जैन, शशि जैन, रीना जैन, रजनी जैन, प्रीति जैन, वीना जैन, अंजलि जैन, मंजू जैन आदि मौजूद रहे।