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पुलिस की कार्रवाई पर दलित संगठनों ने जताया रोष

Thu, 05 Apr 2018 12:08 AM IST
Updated Thu, 05 Apr 2018 12:08 AM IST
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पुलिस की कार्रवाई पर दलित संगठनों ने जताया रोष
सहारनपुर। शहर में दो अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा जगह-जगह किए गए हंगामा और प्रदर्शन के मामले में 900 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने पर दलित संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर रोष जताया है। दलित संगठनों का कहना है कि लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया, कोई हिंसा नहीं होने दी गई। पुलिस और प्रशासन जिले का माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहा है।
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जिले में भी दलित संगठनों द्वारा बेहट रोड, घंटाघर पर जाम लगाया गया। इस मामले में नगर कोतवाली, देहात कोतवाली तथा जीआरपी थाना में 900 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जिस पर दलित संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। दलित संगठनों ने पुलिस और प्रशासन पर जिले का माहौल बिगाड़ने के प्रयास का आरोप भी लगाया है। भीम आर्मी भारत एकता मिशन के जिलाध्यक्ष कमल वालिया ने पुलिस की कार्रवाई पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि एक ओर तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उनका आभार जता रहे हैं कि उन्होंने अपना आंदोलन शांतिपूर्वक किया। दूसरी ओर उन पर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन ही माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहा है। बेवजह मुकदमे दर्ज कर दलित युवकों को परेशान करने का प्रयास है।
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बसपा जिलाध्यक्ष जनेश्वर प्रसाद कहते हैं कि दलित संगठनों ने पुलिस और प्रशासन का शांति बनाए रखने में पूरा सहयोग किया। पूरे अनुशासन में रहकर अपने हक के मुद्दे को उठाया। कहीं कोई हिंसा नहीं होने दी। फिर भी पुलिस की एफआईआर की कार्रवाई किया जाना निंदनीय है। इस मामले में उन्होंने एसएसपी से भी मुलाकात की है और कार्रवाई पर विरोध जताया है।
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अनुसूचित जाति, जनजाति अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष अमर सिंह ने कहा कि पुलिस ने शांतिपूर्ण आंदोलन पर भी कार्रवाई कर दी है। जो पूरी तरह से गलत है। पुलिस की इस कार्रवाई से माहौल बिगड़ेगा। अनुसूचित जाति, जनजाति संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष राकेश कुमार ने कहा है कि दलित समाज की आवाज को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन ने एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की है। पुलिस को शुक्रगुजार होना चाहिए कि यहां पर कहीं भी कोई बड़ी घटना नहीं हुई। शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। लेकिन पुलिस मामले को भड़काने का प्रयास कर रही है।
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